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Sonebhadra News: रॉबर्ट्सगंज में रोजाना तीन मुकदमे, हाथीनाला में महीने में तीन

Thu, 28 Nov 2024 10:52 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 28 Nov 2024 10:52 PM IST
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Three cases a day in Robertsganj, three a month in Hathinala.
सोनभद्र। रॉबर्ट्सगंज की थानेदारी चलाना आसान नहीं है। जिला मुख्यालय के इस थाने में विवादों और मुकदमों की फेहरिश्त लंबी है। यहां हर रोज औसतन तीन मुकदमे दर्ज हो रहे हैं।
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जबकि हाथीनाला थाने की स्थिति अलग है। हाईवे पर मौजूद इस थाने में पूरे महीने में दर्ज होने वाले मुकदमों की संख्या 3-4 है। इसमें भी ज्यादातर केस खुद पुलिस ने गुडवर्क के दर्ज कराए गए हैं।
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जिले में कुल 24 थाने हैं। इसमें साइबर क्राइम, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग और महिला थाने को छोड़ दें तो अन्य 21 थानों में सभी तरह के मुकदमे दर्ज होते हैं। चालू वर्ष में 27 नवंबर तक सबसे ज्यादा 903 मुकदमे रॉबर्ट्सगंज थाने में दर्ज हुए हैं।
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इसमें सड़क हादसे, मारपीट, फर्जी परमिट के जरिये सरकारी राजस्व की चोरी, मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामलों की भरमार है। दूसरे नंबर पर चोपन थाना है। यहां अब तक 258 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं, जबकि दुद्धी थाने में दर्ज मुकदमों की संख्या 229 हैं। दूसरी ओर पांच थाने ऐसे हैं, जहां मुकदमों की संख्या साै भी पार नहीं कर पाई है। ये सभी थाने सुदूर ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों के हैं।

इसमें भी हाथीनाला थाना क्षेत्र में सिर्फ 38 मुकदमे दर्ज हुए हैं। इस 38 में से भी आधे से ज्यादा मुकदमे पुलिस के गुडवर्क से जुड़े हैं। हर महीने महज 3-4 शिकायतें दर्ज होने के चलते अक्सर ऐसा होता है कि थाने में कई दिन तक कोई फरियादी ही नहीं पहुंचता। ऐसे में यहां मुंशी, दीवान की नौकरी अन्य थानों की अपेक्षा सुकून भरी है।

नवंबर तक कहां-कितने मुकदमे दर्ज
थाना : दर्ज मुकदमों की संख्या
रॉबर्ट्सगंज : 903
चोपन : 258
दुद्धी : 229
अनपरा : 184
ओबरा : 165
शक्तिनगर : 160
घोरावल : 159
पिपरी: 158
बभनी : 155
पन्नूगंज : 152
विंढमगंज : 138
कोन : 137
करमा: 136
रायपुर : 124
म्योरपुर : 121
जुगैल : 110
शाहगंज : 97
बीजपुर : 91
रामपुर बरकोनिया : 68
मांची : 61
हाथीनाला : 38
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इसलिए भी अपराध कम
रॉबर्ट्सगंज, चोपन, दुद्धी, अनपरा, ओबरा जैसे थाने नगरीय क्षेत्रों में हैं। यहां ज्यादातर पढ़ी-लिखी और जागरूक आबादी रहती है। आबादी का घनत्व भी अधिक है। छोटी-छोटी बातों पर विवाद कर लोग एक-दूसरे के खिलाफ थाने में मुकदमे दर्ज कराते हैं। पुलिस भी इन इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरतती है। दूसरी ओर सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी कम है। विवाद होने पर भी लोग थाने पहुंचने से पहले आपस में मिलकर सुलझाने की कोशिश करते हैं।

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वर्जन...

अपराध कम होने के पीछे कई कारण हैं। नगरीय क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व अधिक है। विवाद अधिक है, इसलिए अपराध भी अधिक है। रॉबर्ट्सगंज, चोपन जैसे थानों की अपेक्षा हाथीनाला, मांची थाने में आबादी कम है। इनका क्षेत्र भी कम है। पुलिस के पास जो भी मामले आते हैं, उन पर तत्परता से केस दर्ज कर कार्रवाई की जाती है। -अशोक कुमार मीणा, पुलिस अधीक्षक
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