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Sonebhadra News: सात साल में तीन मीटर नीचे खिसका जिले का भूजलस्तर, दस में से छह ब्लॉकों में स्थिति गंभीर
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सोनभद्र। भूजल स्तर को नियंत्रित रखने के लिए चल रहे तमाम प्रयासों का जिले में कोई खास असर नहीं है। दोहन के चलते पानी पाताल की ओर भाग रहा है। पिछले सात वर्षों में औसत जलस्तर में करीब तीन मीटर की गिरावट हुई है। जिले के दस में से छह ब्लॉकों में स्थिति गंभीर है। भूजल की सबसे खराब स्थिति फ्लोराइड प्रभावित कोन ब्लॉक में है। पिछले दो वर्षों में यहां जलस्तर में साढ़े चार मीटर से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। चोपन, म्योरपुर, बभनी, दुद्धी और नगवां ब्लॉक में भी पानी का संकट गंभीर है।
जिले के पहाड़ी क्षेत्रों में हर साल गर्मी में पानी के लिए हाहाकार मचता है। जलापूर्ति के लिए टैंकर की मदद लेनी पड़ती है। भूजल स्तर काफी नीचे होने के कारण सामान्य हैंडपंप काम नहीं करते। गहरी बोरिंग वाले इंडिया मार्क टू हैंडपंप भी जलस्तर नीचे खिसकने से शोपीस बन जाते हैं। पानी के संकट से निजात दिलाने के लिए ही भूजल संचयन पर लगातार जोर दिया जा रहा है। मनरेगा के तहत पिछले दो वर्षों में तीन सौ से अधिक तालाब खोदे गए हैं। उनका जीर्णोद्धार कराया गया है। इसके अलावा हैंडपंपों में रिचार्ज पिट की स्थापना की गई है, ताकि उपयोग के बाद बेकार बहने वाला पानी वहीं धरती में चला जाए। सरकारी भवनों, विद्यालयों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाए गए हैं। इन तमाम कोशिशों के बाद भी भूजल स्तर में कोई खास सुधार होता नहीं दिख रहा है। भूगर्भ जल विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो हर साल स्थिति बिगड़ती ही जा रही है। पानी तेजी से पाताल की ओर भाग रहा है। नतीजा पहले जहां अप्रैल-मई में पानी का संकट गहराता था, वहां अब मार्च से ही पानी के लिए लोग परेशान होने लग रहे हैं।
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सात वर्षों में ऐसे कम हुआ औसत जलस्तर::
वर्ष: प्री मानसून: पोस्ट मानसून
2018: 09.89: 06.49
2019: 10.13: 03.92
2020: 09.34: 05.27
2021: 09.98: 03.90
2022: 11.55: 07.91
2023: 12.59: 08.64
2024: 12.37: 06.93
(जलस्तर मीटर में है)
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कोन ब्लॉक में पानी सबसे नीचे
भूगर्भ जलस्तर की सबसे खराब स्थिति कोन ब्लॉक में है। पानी में फ्लोराइड की अधिकता वाले इस क्षेत्र का औसत भूजलस्तर 17 से 19 मीटर के मध्य है। पिछले तीन वर्षों में यहां चार मीटर से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2022 में कोन ब्लॉक का मानसून से पहले भूजल स्तर 15.13 मीटर ही था, जो अब 19.62 मीटर हो चुका है। इसी तरह प्री मानसून जलस्तर 14.19 से बढ़कर 17.47 मीटर तक पहुंच गया है। म्योरपुर ब्लॉक में जलस्तर वर्ष 2022 में 8.26 मीटर से बढ़कर अब 10.74 मीटर तक जा चुका है। पोस्ट मानसून के जलस्तर में भी गिरावट आई है। चोपन ब्लॉक में 12.41 मीटर से जलस्तर 13.47 मीटर तक पहुंच गया है। जलस्तर में आ रही गिरावट के पीछे घर-घर लग रहे सबमर्सिबल पंप के जरिये बेतहाशा भूजल के दोहन को मुख्य वजह माना जा रहा है।
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अच्छी बारिश से कुछ इलाकों में राहत
पिछले साल हुई अच्छी बारिश की वजह से कई ब्लॉकों के भूजलस्तर में सुधार हुआ है। दो वर्ष से जनवरी में बभनी ब्लॉक का जलस्तर माइनस में था, मगर पिछले साल हुई बारिश की वजह से इस साल जनवरी में भूजल स्तर में अच्छा सुधार देखने को मिला।
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वर्जन::
जनपद सोनभद्र के कोन और नगवां ब्लॉक में तेजी से खिसकता भू-जलस्तर काफी चिंताजनक है। इन इलाकों में भूजल दोहन अधिक होने और पठारी इलाका होने से यह समस्या है। वर्षा जल का संचयन न होना भी एक बहुत बड़ा कारण है। अत्यधिक भू-जल दोहन से बचना होगा। - विक्रांत, सहायक भूभौतिकविद-मिर्जापुर।
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जिले के पहाड़ी क्षेत्रों में हर साल गर्मी में पानी के लिए हाहाकार मचता है। जलापूर्ति के लिए टैंकर की मदद लेनी पड़ती है। भूजल स्तर काफी नीचे होने के कारण सामान्य हैंडपंप काम नहीं करते। गहरी बोरिंग वाले इंडिया मार्क टू हैंडपंप भी जलस्तर नीचे खिसकने से शोपीस बन जाते हैं। पानी के संकट से निजात दिलाने के लिए ही भूजल संचयन पर लगातार जोर दिया जा रहा है। मनरेगा के तहत पिछले दो वर्षों में तीन सौ से अधिक तालाब खोदे गए हैं। उनका जीर्णोद्धार कराया गया है। इसके अलावा हैंडपंपों में रिचार्ज पिट की स्थापना की गई है, ताकि उपयोग के बाद बेकार बहने वाला पानी वहीं धरती में चला जाए। सरकारी भवनों, विद्यालयों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाए गए हैं। इन तमाम कोशिशों के बाद भी भूजल स्तर में कोई खास सुधार होता नहीं दिख रहा है। भूगर्भ जल विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो हर साल स्थिति बिगड़ती ही जा रही है। पानी तेजी से पाताल की ओर भाग रहा है। नतीजा पहले जहां अप्रैल-मई में पानी का संकट गहराता था, वहां अब मार्च से ही पानी के लिए लोग परेशान होने लग रहे हैं।
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सात वर्षों में ऐसे कम हुआ औसत जलस्तर::
वर्ष: प्री मानसून: पोस्ट मानसून
2018: 09.89: 06.49
2019: 10.13: 03.92
2020: 09.34: 05.27
2021: 09.98: 03.90
2022: 11.55: 07.91
2023: 12.59: 08.64
2024: 12.37: 06.93
(जलस्तर मीटर में है)
कोन ब्लॉक में पानी सबसे नीचे
भूगर्भ जलस्तर की सबसे खराब स्थिति कोन ब्लॉक में है। पानी में फ्लोराइड की अधिकता वाले इस क्षेत्र का औसत भूजलस्तर 17 से 19 मीटर के मध्य है। पिछले तीन वर्षों में यहां चार मीटर से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2022 में कोन ब्लॉक का मानसून से पहले भूजल स्तर 15.13 मीटर ही था, जो अब 19.62 मीटर हो चुका है। इसी तरह प्री मानसून जलस्तर 14.19 से बढ़कर 17.47 मीटर तक पहुंच गया है। म्योरपुर ब्लॉक में जलस्तर वर्ष 2022 में 8.26 मीटर से बढ़कर अब 10.74 मीटर तक जा चुका है। पोस्ट मानसून के जलस्तर में भी गिरावट आई है। चोपन ब्लॉक में 12.41 मीटर से जलस्तर 13.47 मीटर तक पहुंच गया है। जलस्तर में आ रही गिरावट के पीछे घर-घर लग रहे सबमर्सिबल पंप के जरिये बेतहाशा भूजल के दोहन को मुख्य वजह माना जा रहा है।
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अच्छी बारिश से कुछ इलाकों में राहत
पिछले साल हुई अच्छी बारिश की वजह से कई ब्लॉकों के भूजलस्तर में सुधार हुआ है। दो वर्ष से जनवरी में बभनी ब्लॉक का जलस्तर माइनस में था, मगर पिछले साल हुई बारिश की वजह से इस साल जनवरी में भूजल स्तर में अच्छा सुधार देखने को मिला।
वर्जन::
जनपद सोनभद्र के कोन और नगवां ब्लॉक में तेजी से खिसकता भू-जलस्तर काफी चिंताजनक है। इन इलाकों में भूजल दोहन अधिक होने और पठारी इलाका होने से यह समस्या है। वर्षा जल का संचयन न होना भी एक बहुत बड़ा कारण है। अत्यधिक भू-जल दोहन से बचना होगा। - विक्रांत, सहायक भूभौतिकविद-मिर्जापुर।