सोनभद्र। कुपोषण से बचाव और मातृ-शिशु स्वास्थ्य में सुधार के लिए जिले में नौवां राष्ट्रीय पोषण माह व्यापक स्तर पर मनाया गया। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग (आईसीडीएस) और अदाणी फाउंडेशन के प्रोजेक्ट सुपोषण के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अभियान के दौरान 14,039 गतिविधियां हुईं। इनमें 1,35,874 सहभागिताएं दर्ज की गईं। अभियान के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों और समुदाय स्तर पर गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, किशोरियों और बच्चों के अभिभावकों को संतुलित आहार, स्वच्छता और बेहतर पोषण व्यवहार की जानकारी दी गई। रिपोर्ट के अनुसार, 6,959 पारिवारिक परामर्श सत्र और 3,382 समूह चर्चाएं आयोजित की गईं। इनमें बच्चों की देखभाल, कुपोषण से बचाव और संतुलित भोजन के महत्व पर जोर दिया गया। स्थानीय खाद्य सामग्री से पौष्टिक भोजन तैयार करने के तरीके बताने के लिए 1,288 कुकिंग डेमोंस्ट्रेशन हुए। वहीं, घरों में हरी सब्जियां उगाने को प्रोत्साहित करने के लिए 900 पोषण वाटिकाएं विकसित की गईं। इसके अलावा 358 सुपोषण हेल्प डेस्क, 354 जागरूकता रैलियां, 335 पोषण मेले और 97 स्वच्छता अभियान आयोजित किए गए। पोषण स्तर का आकलन करने के लिए शून्य से पांच वर्ष तक के 52,414 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई। इसका उद्देश्य बच्चों की वृद्धि और पोषण स्थिति का आकलन कर जरूरत के अनुसार परामर्श एवं स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना था। अभियान में छह माह तक शिशु को केवल स्तनपान कराने और छह माह पूरे होने के बाद उपयुक्त पूरक आहार शुरू करने के प्रति भी जागरूक किया गया। परिवारों को स्थानीय पौष्टिक खाद्य पदार्थों के इस्तेमाल और नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए प्रेरित किया गया। जिला कार्यक्रम अधिकारी विनीत सिंह ने बताया कि विभाग और फाउंडेशन के संयुक्त प्रयास पोषण जागरूकता बढ़ाने और मातृ-शिशु स्वास्थ्य में सुधार लाने में सहायक हैं। अभियान के माध्यम से संदेश दिया गया कि कुपोषण से निपटने के लिए निरंतर जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी जरूरी है।