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पारा चढ़ा तो बिजली की मांग में हुआ इजाफा
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पिछले दो दिनों से आसमान में छाये बादलों के कारण प्रदेश में पारा चढ़ गया है। इससे बिजली की खपत भी बढ़ गई है। सोमवार शाम को पीक आवर में बिजली की मांग दो हजार मेगावाट की वृद्धि के साथ 17 हजार मेगावाट के करीब पहुंच गई।
प्रदेश में पिछले एक सप्ताह से बिजली की अधिकतम मांग 15 हजार मेगावाट के आसपास बनी हुई थी। यूपीएसएलडीसी के जारी आंकड़ों के अनुसार सोमवार शाम 7:32 बजे बिजली की मांग बढ़कर 16895 मेगावाट पहुंच गई। इससे सिस्टम कंट्रोल के निर्देश पर जहां उत्पादनरत इकाइयों को फुल लोड पर चलाया जाने लगा। वहीं तकनीकी कारणों से बंद इकाइयों को जल्द से जल्द लोड पर लेने का निर्देश दिया गया। हालांकि देर रात से बिजली की मांग में उत्तरोत्तर कमी आनी शुरू हो गई। मंगलवार शाम तीन बजे तक बिजली की मांग गिरकर 11 हजार मेगावाट के करीब आ गई। इससे सिस्टम कंट्रोल के निर्देश पर देर शाम तक इकाइयों से थर्मल बैकिंग जारी रही। समाचार लिखे जाने तक अनपरा ए से 229, बी से 545, डी से 825 और निजी क्षेत्र की लैंको परियोजना से 375 मेगावाट विद्युत उत्पादन किया जा रहा था। इस दौरान रिहंद हाइड्रो के चार टरबाइनों से 185 मेगावाट विद्युत उत्पादन किया गया।
अनपरा की पांचवीं इकाई से विद्युत उत्पादन शुरू
अनपरा। तकनीकी कारणों से बंद अनपरा की पांचवीं इकाई से विद्युत उत्पादन शुरू हो गया है। प्रबंधन के अनुसार 500 मेगावाट क्षमता की इस इकाई को लाइटअप करने के बाद सफलतापूर्वक सिंक्रोनाइज कर लिया गया है। रात तक इस इकाई से पूर्ण क्षमता से विद्युत उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।
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इकाइयों से शुरू हुआ बिजली उत्पादन
ओबरा। स्थानीय तापीय परियोजना के बीटीपीएस स्विच यार्ड में सोमवार की देर शाम हुई शार्ट सर्किट की वजह से बंद हुई तीनों इकाइयों को देर रात लाइटअप कर बिजली उत्पादन शुरू कर दिया गया है। महाप्रबंधक प्रशासन इंजीनियर जीके मिश्रा ने बताया कि सोमवार की देर शाम बंद हुई तीनों इकाइयों को युद्धस्तर पर कार्य कर देर रात लगभग 12:30 तक चालू कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि शार्ट सर्किट से परियोजना निगम को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है। उन्होंने देर शाम तक 200 मेगावाट की नौंवी इकाई को भी लाइटअप करने की संभावना जताई है। समाचार लिखे जाने तक ब ताप विद्युत गृह की 200 मेगावाट की 10वीं इकाई से 160 मेगावाट, 11वीं इकाई से 152 मेगावाट और 12वीं इकाई से 171 मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा था।
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प्रदेश में पिछले एक सप्ताह से बिजली की अधिकतम मांग 15 हजार मेगावाट के आसपास बनी हुई थी। यूपीएसएलडीसी के जारी आंकड़ों के अनुसार सोमवार शाम 7:32 बजे बिजली की मांग बढ़कर 16895 मेगावाट पहुंच गई। इससे सिस्टम कंट्रोल के निर्देश पर जहां उत्पादनरत इकाइयों को फुल लोड पर चलाया जाने लगा। वहीं तकनीकी कारणों से बंद इकाइयों को जल्द से जल्द लोड पर लेने का निर्देश दिया गया। हालांकि देर रात से बिजली की मांग में उत्तरोत्तर कमी आनी शुरू हो गई। मंगलवार शाम तीन बजे तक बिजली की मांग गिरकर 11 हजार मेगावाट के करीब आ गई। इससे सिस्टम कंट्रोल के निर्देश पर देर शाम तक इकाइयों से थर्मल बैकिंग जारी रही। समाचार लिखे जाने तक अनपरा ए से 229, बी से 545, डी से 825 और निजी क्षेत्र की लैंको परियोजना से 375 मेगावाट विद्युत उत्पादन किया जा रहा था। इस दौरान रिहंद हाइड्रो के चार टरबाइनों से 185 मेगावाट विद्युत उत्पादन किया गया।
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अनपरा की पांचवीं इकाई से विद्युत उत्पादन शुरू
अनपरा। तकनीकी कारणों से बंद अनपरा की पांचवीं इकाई से विद्युत उत्पादन शुरू हो गया है। प्रबंधन के अनुसार 500 मेगावाट क्षमता की इस इकाई को लाइटअप करने के बाद सफलतापूर्वक सिंक्रोनाइज कर लिया गया है। रात तक इस इकाई से पूर्ण क्षमता से विद्युत उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।
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इकाइयों से शुरू हुआ बिजली उत्पादन
ओबरा। स्थानीय तापीय परियोजना के बीटीपीएस स्विच यार्ड में सोमवार की देर शाम हुई शार्ट सर्किट की वजह से बंद हुई तीनों इकाइयों को देर रात लाइटअप कर बिजली उत्पादन शुरू कर दिया गया है। महाप्रबंधक प्रशासन इंजीनियर जीके मिश्रा ने बताया कि सोमवार की देर शाम बंद हुई तीनों इकाइयों को युद्धस्तर पर कार्य कर देर रात लगभग 12:30 तक चालू कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि शार्ट सर्किट से परियोजना निगम को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है। उन्होंने देर शाम तक 200 मेगावाट की नौंवी इकाई को भी लाइटअप करने की संभावना जताई है। समाचार लिखे जाने तक ब ताप विद्युत गृह की 200 मेगावाट की 10वीं इकाई से 160 मेगावाट, 11वीं इकाई से 152 मेगावाट और 12वीं इकाई से 171 मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा था।