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रिहंद जलाशय में राख घुलने के मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, यूपी-एमपी के पीसीबी सहित 11 विभागों को नोटिस

Sat, 26 Oct 2019 11:12 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 26 Oct 2019 11:12 PM IST
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Supreme Court strict in case of ash dissolution in Rihand reservoir
अनपरा। एनटीपीसी विंध्याचल के ऐश डैम टूटने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व जल संसाधन विभाग सहित 11 विभागों को नोटिस जारी किया है। संबंधित विभागों से पूरे मामले में 20 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई में स्पष्टीकरण मांगा है। इससे संबंधितों में खलबली मची हुई है।
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अधिवक्ता अश्वनी दूबे ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि छह अक्टूबर को एनटीपीसी विंध्याचल परियोजना का ऐश डैम टूटने से बड़े पैमाने पर राख रिहंद जलाशय में बही। इससे रिहंद जलाशय का जल दूषित हो गया है। आरोप लगाया कि ऐश डैक टूटने से लाखों मीट्रिक टन खतरनाक टाक्सिक, जहरीले केमिकल और फ्लाई ऐश गोविन्द बल्लभ पंत सागर में चली गई, जो 20 लाख लोगों के लिए पीने के पानी का प्रमुख स्रोत है। यह पानी इतना जहरीला हो गया है कि इससे कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियां भी हो सकती हैं।
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उन्होंने कहा कि जल प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण अधिनियम 1974 (47-49) के अनुसार यदि कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया जाता है तो संबंधित कंपनी का जिम्मेदार व्यक्ति दोषी माना जायेगा। कहा है कि रिहंद के किनारे के गांव चंदावल, जुड़ी, जुबाड़ी, शाहपुर, बलियरी, तेलगवां, योगीचौरा, भैरवा, घरसड़ी आदि गांवों के कुओं में देखें तो उसमें से सिर्फ राख मिश्रित पानी ही निकल रहा है। याचिका में एनटीपीसी प्रबंधन पर प्राथमिकी दर्ज करने, रिहंद जलाशय को साफ कराने, फ्लाई ऐश को तालाबों में छोड़े जाने पर रोक लगाने संबंधी बातें शामिल हैं। उधर, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ऐश बांध टूटने के मामले में 10 करोड़ रुपये का जुर्माना भी परियोजना पर लगाया है। पूरे मामले में कोर्ट ने 20 नवंबर को अगली सुनवाई की तिथि तय की है। इसमें एनटीपीसी प्रबंधन, जल स्रोत मंत्रालय, पर्यावरण मंत्रालय, केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश, प्रमुख सचिव मध्य प्रदेश, प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश व दोनों प्रदेशों के सिंचाई विभाग से स्पष्टीकरण मांगा गया है। इस संबंध में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सोनभद्र के क्षेत्रीय अधिकारी राधेश्याम का कहना है कि याचिका के संबंध में तो उन्हें जानकारी है लेकिन नोटिस के बारे में अभी जानकारी नहीं है। उधर, एनटीपीसी विंध्याचल के पीआरओ लालमनि पांडेय ने यह कहकर कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया कि इस मामले में जवाब जीएम (एचआर) लालसिंह देंगे जबकि जीएम (एचआर) ने जवाब देने की जिम्मेदारी पीआरओ पर डालकर अपनी जिम्मेेदारी से पल्ला झाड़ लिया।
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