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भारत में कदम रखकर कहा, अब मैं सुरक्षित
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अनपरा। ककरी परियोजना कर्मचारी जेपी कुशवाहा के बेटे प्रभात शुक्रवार की सुबह दिल्ली पहुंचे। छह दिनों तक सिर्फ सफर और इंतजार के बीच लगातार युद्ध की चिंता से दिल्ली पहुंच कर उन्हें आजादी मिली। दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचते ही उन्होंने मां को फोन कर कहा कि मां मैं दिल्ली पहुंच गया हूं। अब चिंता की कोई बात नहीं है। घर लौटने में अभी उन्हें दो दिन का वक्त लगेगा।
पढ़ाई के लिए यूक्रेन गए प्रभात वहां युद्ध के दौरान फंस गए थे। ऑपरेशन गंगा के तहत उन्हें स्वदेश आने का मौका मिला। प्रभात ने बताया कि युद्ध की स्थिति को देखते हुए उन्होंने अन्य साथियों के साथ अपने घर वापसी का टिकट करा लिया था। तब हालातों को देखते हुए लगा कि अभी युद्ध छिड़ने में समय है। इसलिए सभी ने कुछ समय बाद का टिकट कराया था ताकि अपने सभी कार्यों को खत्म कर घर लौट सकें। इस बीच अचानक से शुरू हुई गोलाबारी के बीच सब कार्य अधर में लटक गए। सभी को बंकरों में छुपा दिया गया। सायरन की आवाज और सिग्नल के सहारे सभी को बंकर में जाने और बाहर निकलने की जानकारी दी जाती थी। इसके बाद जब सुुरक्षित होकर हमें बार्डर तक जाने का निर्देश प्राप्त हुआ तो बसों का टोटा हो गया। कई जगह फोन ट्राई करने के बाद एक बस मिली जिससे 54 छात्र बार्डर पर पहुंचे। बार्डर पर देखते ही देखते कुछ घंटों में सैकड़ों की भीड़ हजारों में तब्दील हो गई। हम तो सुरक्षित आ गए हैं लेकिन अब भी वहां फंसे लोगों को जल्द वापस लाने की चिंता बनी हुई है। उनकी मां ने बताया कि सुबह बेटे के भारत में होने की जानकारी से आंखें खुशी से भर गईं। उनकी मां ने सभी बच्चों के सुरक्षित घर लौटने की भी कामना की है।
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पढ़ाई के लिए यूक्रेन गए प्रभात वहां युद्ध के दौरान फंस गए थे। ऑपरेशन गंगा के तहत उन्हें स्वदेश आने का मौका मिला। प्रभात ने बताया कि युद्ध की स्थिति को देखते हुए उन्होंने अन्य साथियों के साथ अपने घर वापसी का टिकट करा लिया था। तब हालातों को देखते हुए लगा कि अभी युद्ध छिड़ने में समय है। इसलिए सभी ने कुछ समय बाद का टिकट कराया था ताकि अपने सभी कार्यों को खत्म कर घर लौट सकें। इस बीच अचानक से शुरू हुई गोलाबारी के बीच सब कार्य अधर में लटक गए। सभी को बंकरों में छुपा दिया गया। सायरन की आवाज और सिग्नल के सहारे सभी को बंकर में जाने और बाहर निकलने की जानकारी दी जाती थी। इसके बाद जब सुुरक्षित होकर हमें बार्डर तक जाने का निर्देश प्राप्त हुआ तो बसों का टोटा हो गया। कई जगह फोन ट्राई करने के बाद एक बस मिली जिससे 54 छात्र बार्डर पर पहुंचे। बार्डर पर देखते ही देखते कुछ घंटों में सैकड़ों की भीड़ हजारों में तब्दील हो गई। हम तो सुरक्षित आ गए हैं लेकिन अब भी वहां फंसे लोगों को जल्द वापस लाने की चिंता बनी हुई है। उनकी मां ने बताया कि सुबह बेटे के भारत में होने की जानकारी से आंखें खुशी से भर गईं। उनकी मां ने सभी बच्चों के सुरक्षित घर लौटने की भी कामना की है।
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