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हड़ताल से थमी कोल इंडिया की रफ्तार
संवाददाता अमर उजाला सोनभद्र
Updated Tue, 06 Jan 2015 11:06 PM IST
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केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तावित कोल विनिवेश बिल के विरोध में एनसीएल सहित अन्य अनुषांगी कंपनियों से जुड़े मजदूरों ने मंगलवार से पांच दिन की हड़ताल शुरू कर कोल इंडिया की रफ्तार रोक दी।
सुबह चार बजे से ही कामकाज ठप रख मजदूर प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतर आए। खदान क्षेत्र की ओर जाने वाले रास्तों की भी नाकेबंदी कर वाहनों और मजदूरों को रोका गया।
श्रमिक संगठनों का दावा है कि यह हड़ताल वर्ष 1977 के बाद से अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक रही। उधर, देर शाम तक केंद्रीय श्रम संगठनों के प्रतिनिधियों और कोल एवं ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल के बीच वार्ता जारी थी।
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अखिल भारतीय खदान मजदूर संघ के अध्यक्ष सुरेंद्र पांडेय, बीएमएस कोल फेडरेशन के संयुक्त महामंत्री वाईएन सिंह ने बताया कि कोल इंडिया के अन्य अनुषंगी संगठनों के साथ एनसीएल की बीना,
ककरी, कृष्णशिला, झिंगुरदा, सिंगरौली मुख्यालय, खड़िया, जयंत, निगाही, अमलोरी एवं ब्लाक-बी के साथ ही जयंत आईडब्ल्यूएसएस और नेहरू चिकित्सालय में हड़ताल का खासा असर रहा।
वहीं बीएमएस के एनके सिंह एवं मुन्नी लाल, एटक के अशोक दूबे, एचएमएस के अशोक पांडेय, इंटक के वीएस विष्ट, सीटू के प्रेम सागर, संयुक्त श्रमिक संगठन के मीडिया प्रभारी पीके सिंह ने दावा किया
आईडब्ल्यूएसएस खड़िया (पानी आपूर्ति), कृष्णशिला प्रोजेक्ट, ब्लाक बी, झिंगुरदा में कोल उत्पादन एवं डिस्पैच (लोडिंग) का काम शत-प्रतिशत प्रभावित रहा।
खड़िया में भी दूसरी पाली में यही स्थिति रही। कहा कि कुछ जगहों पर सोमवार रात लदी रैक को मंगलवार को रवाना कर कोरमपूर्ति की गई।
श्रमिक नेताओं की ओर से एनसीएल के साथ ही एसीसीएल, ईसीएल, डब्ल्यूसीएल, एमसीएल, सीसीएल,बीसीसीएल और सिंगरैनी में हड़ताल ऐतिहासिक होने का दावा किया गया।
बीना में अजय कुमार, इंद्रजीत पांडेय, मनोज सिंह, सीपी सिंह, संजीव सिंह, ककरी मे शिवमुनि सिंह, टीपी पटेल, राजेश सिंह, राधेश्याम पांडेय, भगवान शाह, कृष्णशिला में संजीव कौशल,
आरके त्रिपाठी, केडी तिवारी, डीडी पटेल, शकील, आईपी तिवारी, केके उपाध्याय, राम सिंह आदि की अगुवाई में प्रदर्शन कर आवाज उठाई गई।
सभी परियोजना क्षेत्र में खदान को जाने वाले रास्ते पर प्रदर्शन के साथ ही नाकेबंदी कर मजदूरों और वाहनों को रोका जाता रहा।
उधर, इस मसले को लेकर शाम छह बजे से श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों और केंद्रीय कोयला एवं ऊर्जा मंत्री के बीच वार्ता जारी थी। समाचार दिए जाने तक इसका निष्कर्ष पता नहीं चल सका था।
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सुबह चार बजे से ही कामकाज ठप रख मजदूर प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतर आए। खदान क्षेत्र की ओर जाने वाले रास्तों की भी नाकेबंदी कर वाहनों और मजदूरों को रोका गया।
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श्रमिक संगठनों का दावा है कि यह हड़ताल वर्ष 1977 के बाद से अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक रही। उधर, देर शाम तक केंद्रीय श्रम संगठनों के प्रतिनिधियों और कोल एवं ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल के बीच वार्ता जारी थी।
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अखिल भारतीय खदान मजदूर संघ के अध्यक्ष सुरेंद्र पांडेय, बीएमएस कोल फेडरेशन के संयुक्त महामंत्री वाईएन सिंह ने बताया कि कोल इंडिया के अन्य अनुषंगी संगठनों के साथ एनसीएल की बीना,
ककरी, कृष्णशिला, झिंगुरदा, सिंगरौली मुख्यालय, खड़िया, जयंत, निगाही, अमलोरी एवं ब्लाक-बी के साथ ही जयंत आईडब्ल्यूएसएस और नेहरू चिकित्सालय में हड़ताल का खासा असर रहा।
वहीं बीएमएस के एनके सिंह एवं मुन्नी लाल, एटक के अशोक दूबे, एचएमएस के अशोक पांडेय, इंटक के वीएस विष्ट, सीटू के प्रेम सागर, संयुक्त श्रमिक संगठन के मीडिया प्रभारी पीके सिंह ने दावा किया
आईडब्ल्यूएसएस खड़िया (पानी आपूर्ति), कृष्णशिला प्रोजेक्ट, ब्लाक बी, झिंगुरदा में कोल उत्पादन एवं डिस्पैच (लोडिंग) का काम शत-प्रतिशत प्रभावित रहा।
खड़िया में भी दूसरी पाली में यही स्थिति रही। कहा कि कुछ जगहों पर सोमवार रात लदी रैक को मंगलवार को रवाना कर कोरमपूर्ति की गई।
श्रमिक नेताओं की ओर से एनसीएल के साथ ही एसीसीएल, ईसीएल, डब्ल्यूसीएल, एमसीएल, सीसीएल,बीसीसीएल और सिंगरैनी में हड़ताल ऐतिहासिक होने का दावा किया गया।
बीना में अजय कुमार, इंद्रजीत पांडेय, मनोज सिंह, सीपी सिंह, संजीव सिंह, ककरी मे शिवमुनि सिंह, टीपी पटेल, राजेश सिंह, राधेश्याम पांडेय, भगवान शाह, कृष्णशिला में संजीव कौशल,
आरके त्रिपाठी, केडी तिवारी, डीडी पटेल, शकील, आईपी तिवारी, केके उपाध्याय, राम सिंह आदि की अगुवाई में प्रदर्शन कर आवाज उठाई गई।
सभी परियोजना क्षेत्र में खदान को जाने वाले रास्ते पर प्रदर्शन के साथ ही नाकेबंदी कर मजदूरों और वाहनों को रोका जाता रहा।
उधर, इस मसले को लेकर शाम छह बजे से श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों और केंद्रीय कोयला एवं ऊर्जा मंत्री के बीच वार्ता जारी थी। समाचार दिए जाने तक इसका निष्कर्ष पता नहीं चल सका था।