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कथा श्रवण से ही दूर होता है दुख
ब्यूरो अमर उजाला, सोनभद्र
Updated Wed, 24 Dec 2014 11:04 PM IST
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राबर्ट्सगंज आरटीएस क्लब में मंगलवार की रात्रि प्रवचन के दौरान तीर्थराज प्रयाग से पधारे मुरारी शास्त्री ने कहा कि कथा श्रवण से सभी पाप और दु:ख दोनों दूर हो जाते हैं।
इसका प्रत्यक्ष उदाहरण उस वक्त मिलता है जब लंका में अशोक वाटिका पहुंच कर हनुमान ने माता सीता को श्रीराम की कथा सुनाई तो माता सीता के सभी दु:ख दूर हो गए।
शास्त्री जी ने कहा श्रीराम जी जिन्हें निर्गुण निर्विकार वर्णानतीत आदि संबोधनों से अलंकृत किया जाता है। कथा श्रवण से पाप और दु:ख भागता है।
कथा तब तक दु:ख और पाप से पीछा नहीं छोड़ती जब तक कि पूर्णरूप से पाप न भाग जाए। उन्होंने कहा कि कथा का श्रोता सीता माता जैसा होना चाहिए और कथा सुनाने वाला हनुमान जी जैसा होना चाहिए।
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अशोक वाटिका में हनुमान ने श्रीराम कथा का श्रवण कराया। लागी सुने श्रवण मन लाई, आदि हुते सब कथा सुनाई। जौनपुर से पधारे जगदीश पांडेय और अंबिका प्रसाद दूबे ने भजन सुनाया।
काशी से पधारे ओमानंद स्वामी ने शिवजी और सती का तादात्म्य संबंध जोड़ते हुए अपनी व्याख्यान माला से भक्तजनों को आमोदित किया।
कहा कथा श्रवण में जैसी मति होगी तैसी गति बनेगी। इस मौके पर संतोष दूबे, शिवकुमार शास्त्री, यशवंत, अनिल कुमार पांडेय, सुशील पाठक, शिशु त्रिपाठी आदि मौजूद रहे। संचालन कृष्णानंद त्रिपाठी ने किया।
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इसका प्रत्यक्ष उदाहरण उस वक्त मिलता है जब लंका में अशोक वाटिका पहुंच कर हनुमान ने माता सीता को श्रीराम की कथा सुनाई तो माता सीता के सभी दु:ख दूर हो गए।
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शास्त्री जी ने कहा श्रीराम जी जिन्हें निर्गुण निर्विकार वर्णानतीत आदि संबोधनों से अलंकृत किया जाता है। कथा श्रवण से पाप और दु:ख भागता है।
कथा तब तक दु:ख और पाप से पीछा नहीं छोड़ती जब तक कि पूर्णरूप से पाप न भाग जाए। उन्होंने कहा कि कथा का श्रोता सीता माता जैसा होना चाहिए और कथा सुनाने वाला हनुमान जी जैसा होना चाहिए।
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अशोक वाटिका में हनुमान ने श्रीराम कथा का श्रवण कराया। लागी सुने श्रवण मन लाई, आदि हुते सब कथा सुनाई। जौनपुर से पधारे जगदीश पांडेय और अंबिका प्रसाद दूबे ने भजन सुनाया।
काशी से पधारे ओमानंद स्वामी ने शिवजी और सती का तादात्म्य संबंध जोड़ते हुए अपनी व्याख्यान माला से भक्तजनों को आमोदित किया।
कहा कथा श्रवण में जैसी मति होगी तैसी गति बनेगी। इस मौके पर संतोष दूबे, शिवकुमार शास्त्री, यशवंत, अनिल कुमार पांडेय, सुशील पाठक, शिशु त्रिपाठी आदि मौजूद रहे। संचालन कृष्णानंद त्रिपाठी ने किया।