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Sonebhadra News: दोस्त की पत्नी से चाकू दिखाकर दुष्कर्म के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज
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सोनभद्र। विंढमगंज थाना क्षेत्र के एक गांव में दोस्त की पत्नी को चाकू दिखाकर दुष्कर्म के मामले में आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी गई है। मामले की सुनवाई कर रही अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी/सीएडब्लू अर्चना रानी की अदालत ने इसे गंभीर अपराध माना।
गत 30 अक्तूबर को विंढमगंज थाने में तहरीर देते हुए पीड़िता ने बताया कि वह 20 अक्तूबर की रात घर में अकेली थी। रात डेढ़ बजे के करीब वह शौच के लिए घर से बाहर निकली। उसी समय उसके पति का परिचित युवक वहां आया और चाकू दिखाते हुए घर के अंदर घुस गया।
आरोप है कि चाकू की नोंक पर उसने उसके साथ दुष्कर्म किया। पूछताछ में पुलिस को बताया गया कि पति के कहने पर वह उसके साथ दो-तीन बार बाजार गई थी। बाद में उसकी हरकत को देखते हुए उसने उसके साथ जाना-बात करना बंद कर दिया था। जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की तरफ से इलेक्ट्रानिक्स कार्य की मजदूरी बकाया होने और तकादा करने पर गलत आरोप में फंसा देने की दलील दी गई।
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सुनवाई कर रही न्यायालय ने पाया कि आरोपी प्राथमिकी में नामजद है। पीड़िता ने भी बयान में घटना का समर्थन किया है। अन्य साक्षियों ने भी आरोप सही बताए हैं। प्रकरण की विवेचना जारी है। किया गया आपराध गंभीर श्रेणी का है और एक महिला के विरुद्ध किया गया है। इसलिए इस स्तर पर जमानत अर्जी स्वीकार नहीं की जा सकती।
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गत 30 अक्तूबर को विंढमगंज थाने में तहरीर देते हुए पीड़िता ने बताया कि वह 20 अक्तूबर की रात घर में अकेली थी। रात डेढ़ बजे के करीब वह शौच के लिए घर से बाहर निकली। उसी समय उसके पति का परिचित युवक वहां आया और चाकू दिखाते हुए घर के अंदर घुस गया।
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आरोप है कि चाकू की नोंक पर उसने उसके साथ दुष्कर्म किया। पूछताछ में पुलिस को बताया गया कि पति के कहने पर वह उसके साथ दो-तीन बार बाजार गई थी। बाद में उसकी हरकत को देखते हुए उसने उसके साथ जाना-बात करना बंद कर दिया था। जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की तरफ से इलेक्ट्रानिक्स कार्य की मजदूरी बकाया होने और तकादा करने पर गलत आरोप में फंसा देने की दलील दी गई।
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सुनवाई कर रही न्यायालय ने पाया कि आरोपी प्राथमिकी में नामजद है। पीड़िता ने भी बयान में घटना का समर्थन किया है। अन्य साक्षियों ने भी आरोप सही बताए हैं। प्रकरण की विवेचना जारी है। किया गया आपराध गंभीर श्रेणी का है और एक महिला के विरुद्ध किया गया है। इसलिए इस स्तर पर जमानत अर्जी स्वीकार नहीं की जा सकती।