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35 गांवों में सरकारी भूमि कब्जा करने की तैयारी!
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सोनभद्र। घोरावल कोतवाली क्षेत्र के उभ्भा गांव में भूमि को लेकर हुए विवाद की चिंगारी धीरे-धीरे जिले भर में फैलने लगी है। बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के कुछ नेता गांवों में भ्रमण कर आदिवासियों को सरकारी भूमि एवं वन विभाग की जमीन पर कब्जा करने के लिए उसका रहे हैं। अब तक करीब 35 गांवों के कुछ लोग अवैध कब्जा करने की फिराक में हैं। इसका खुफिया एजेंसियों से इनपुट मिलने के बाद पुलिस प्रशासन अलर्ट हो गया है। अशिक्षित लोगों को उसकाने वाले नेता चिह्नित किए जा रहे हैं।
17 जुलाई को उभ्भा गांव में समिति की भूमि को लेकर खूनी संघर्ष में दस लोगों की मौत हो गई थी जबकि 28 लोग घायल हो गए थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उभ्भा पहुंच कर घटना में मारे गए लोगों के आश्रितों और घायलों से मुलाकात कर जिनके पास सरकारी आवास नहीं था उन्हें मकान समेत अन्य सुविधाएं मुहैया कराने की घोषणा की। जिन लोगों पास भूमि नहीं होगी उन्हें सरकारी भूमि पर आवास बनाकर उपलब्ध कराने की भी बात कही थी। सूत्रों की मानें तो गैर प्रांत के कुछ नेता सीएम की बातों को आदिवासियों के समक्ष तोड़-मरोड़ कर पेश कर भूमि कब्जा करने के लिए उसका रहे हैं। नेताओं का कहना है कि सीएम ने जिनके पास भूमि नहीं है उन्हें सरकारी जमीन देने की बात कही है। इसलिए जो व्यक्ति अभी सरकारी भूमि हथिया लेगा वह उनकी हो जाएगी। वर्तमान में चेरूई, बिसुंधरी, मूर्तिया, ढोलो, निसोगी, रानीडीह, चननी, पोखिरिया समेत करीब 35 गांवों के कुछ लोग नेताओं के झांसे में आकर अवैध ढंग से सरकारी और वन विभाग की भूमि पर कब्जा करने की योजना तैयार करने में जुट गए हैं। उधर इसकी भनक लगते ही पुलिस प्रशासन भी चौकन्ना हो गया है। जंगलों में पुलिस की टीमें भ्रमण कर भोलीभाली जनता को उसकाने वाले नेताओं की खोजबीन शुरू कर दी है। सोमवार को मूर्तिया, उभ्भा समेत अन्य गांवों में सादे पोशाक में पुलिस कर्मी भ्रमण कर नेताओं के बारे में पता लगाने में जुटे रहे।
इस संबंध में जिलाधिकारी अंकित कुमार अग्रवाल का कहना है कि अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए राबर्टसगंज, घोरावल और दुद्धी तहसील के एसडीएम और तहसीलदारों को निर्देशित कर दिया गया है। ग्रामीणों को उसकाने वालों की शिनाख्त कर कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह कितना पहुंच वाला क्यों न हो। वहीं पुलिस अधीक्षक सलमान ताज पाटिल का कहना है एंटी भू-माफिया के तहत अवैध ढंग से भूमि पर कब्जा करने एवं उन्हें उसकाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी। थाना और चौकी प्रभारियों को क्षेत्र में भ्रमण कर ग्रामीणों को उसकाने वाले नेताओं को चिह्नित कर कार्रवाई करने के लिए निर्देशित कर दिया गया है। जंगली इलाकों में खुफिया एजेंसियों और मुखबिरों को भी सक्रिय कर दिया गया है।
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17 जुलाई को उभ्भा गांव में समिति की भूमि को लेकर खूनी संघर्ष में दस लोगों की मौत हो गई थी जबकि 28 लोग घायल हो गए थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उभ्भा पहुंच कर घटना में मारे गए लोगों के आश्रितों और घायलों से मुलाकात कर जिनके पास सरकारी आवास नहीं था उन्हें मकान समेत अन्य सुविधाएं मुहैया कराने की घोषणा की। जिन लोगों पास भूमि नहीं होगी उन्हें सरकारी भूमि पर आवास बनाकर उपलब्ध कराने की भी बात कही थी। सूत्रों की मानें तो गैर प्रांत के कुछ नेता सीएम की बातों को आदिवासियों के समक्ष तोड़-मरोड़ कर पेश कर भूमि कब्जा करने के लिए उसका रहे हैं। नेताओं का कहना है कि सीएम ने जिनके पास भूमि नहीं है उन्हें सरकारी जमीन देने की बात कही है। इसलिए जो व्यक्ति अभी सरकारी भूमि हथिया लेगा वह उनकी हो जाएगी। वर्तमान में चेरूई, बिसुंधरी, मूर्तिया, ढोलो, निसोगी, रानीडीह, चननी, पोखिरिया समेत करीब 35 गांवों के कुछ लोग नेताओं के झांसे में आकर अवैध ढंग से सरकारी और वन विभाग की भूमि पर कब्जा करने की योजना तैयार करने में जुट गए हैं। उधर इसकी भनक लगते ही पुलिस प्रशासन भी चौकन्ना हो गया है। जंगलों में पुलिस की टीमें भ्रमण कर भोलीभाली जनता को उसकाने वाले नेताओं की खोजबीन शुरू कर दी है। सोमवार को मूर्तिया, उभ्भा समेत अन्य गांवों में सादे पोशाक में पुलिस कर्मी भ्रमण कर नेताओं के बारे में पता लगाने में जुटे रहे।
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इस संबंध में जिलाधिकारी अंकित कुमार अग्रवाल का कहना है कि अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए राबर्टसगंज, घोरावल और दुद्धी तहसील के एसडीएम और तहसीलदारों को निर्देशित कर दिया गया है। ग्रामीणों को उसकाने वालों की शिनाख्त कर कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह कितना पहुंच वाला क्यों न हो। वहीं पुलिस अधीक्षक सलमान ताज पाटिल का कहना है एंटी भू-माफिया के तहत अवैध ढंग से भूमि पर कब्जा करने एवं उन्हें उसकाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी। थाना और चौकी प्रभारियों को क्षेत्र में भ्रमण कर ग्रामीणों को उसकाने वाले नेताओं को चिह्नित कर कार्रवाई करने के लिए निर्देशित कर दिया गया है। जंगली इलाकों में खुफिया एजेंसियों और मुखबिरों को भी सक्रिय कर दिया गया है।
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