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Sonebhadra News: प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों में बिगड़े हालात, हर तीसरा व्यक्ति मिल रहा बीमार
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सोनभद्र। प्रदूषण प्रभावित इलाके में रह रहे लोगों की सेहत तेजी से बिगड़ रही है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से आयोजित शिविरों प्राप्त आंकड़ों से इसकी पुष्टि हुई है। पिछले महीने लगाए गए शिविरों में आने वाला हर तीसरा मरीज बीमार मिला है।
कोई सांस की बीमारी से ग्रसित है तो किसी की दांतों और हड्डियों को फ्लोरोसिस खोखला कर रहा है। ये आंकड़े उन इलाकों के हैं, जहां आरओ प्लांट लगाए गए हैं।
हालात को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अक्तूबर तक 16 गांवों में कैंप लगाने की योजना बनाई गई है। वहीं, सीपीसीबी ने फ्लोराइड, नाइट्रेट और आयरन की अधिकता वाले इलाकों में लोगों की सेहत की जांच कराने के लिए कहा है। प्रदूषण प्रभावित इलाकों में मरीजों की जांच के लिए समय-समय पर स्वास्थ्य कैंप लगाए जाते हैं।
सबसे ज्यादा प्रदूषित क्षेत्र का दर्जा रखने वाले म्योरपुर ब्लाॅक के चार गांवों में अगस्त माह में कैंप लगाए गए थे।
इन कैंपों के नतीजों को लेकर निदेशक स्वास्थ्य की तरफ से संयुक्त सचिव चिकित्सा को अगस्त के आखिरी सप्ताह में रिपोर्ट भेजी गई। बताया गया कि 18 से 23 अगस्त के बीच म्योरपुर ब्लाॅक के बीजपुर पुनर्वास, खजुरा, बेलहत्थी और जमशीला में स्वास्थ्य कैंप लगाया गया था।
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इन कैंपों में कुल 302 मरीजों की जांच की गई। इसमें 59 मरीज श्वांस के और 65 मरीज फ्लोरोसिस के पाए गए। श्वांस मरीजों में 42 की हालत गंभीर पाए जाने पर अस्पतालों के लिए रेफर किया गया।
वहीं फ्लोरोसिस के तीन मरीजों में कंकालीय फ्लोरोसिस के लक्षण मिले। उन्हें हड्डी रोग विशेषज्ञ के पास जांच-उपचार के लिए रेफर किया गया।
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कोई सांस की बीमारी से ग्रसित है तो किसी की दांतों और हड्डियों को फ्लोरोसिस खोखला कर रहा है। ये आंकड़े उन इलाकों के हैं, जहां आरओ प्लांट लगाए गए हैं।
हालात को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अक्तूबर तक 16 गांवों में कैंप लगाने की योजना बनाई गई है। वहीं, सीपीसीबी ने फ्लोराइड, नाइट्रेट और आयरन की अधिकता वाले इलाकों में लोगों की सेहत की जांच कराने के लिए कहा है। प्रदूषण प्रभावित इलाकों में मरीजों की जांच के लिए समय-समय पर स्वास्थ्य कैंप लगाए जाते हैं।
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सबसे ज्यादा प्रदूषित क्षेत्र का दर्जा रखने वाले म्योरपुर ब्लाॅक के चार गांवों में अगस्त माह में कैंप लगाए गए थे।
इन कैंपों के नतीजों को लेकर निदेशक स्वास्थ्य की तरफ से संयुक्त सचिव चिकित्सा को अगस्त के आखिरी सप्ताह में रिपोर्ट भेजी गई। बताया गया कि 18 से 23 अगस्त के बीच म्योरपुर ब्लाॅक के बीजपुर पुनर्वास, खजुरा, बेलहत्थी और जमशीला में स्वास्थ्य कैंप लगाया गया था।
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इन कैंपों में कुल 302 मरीजों की जांच की गई। इसमें 59 मरीज श्वांस के और 65 मरीज फ्लोरोसिस के पाए गए। श्वांस मरीजों में 42 की हालत गंभीर पाए जाने पर अस्पतालों के लिए रेफर किया गया।
वहीं फ्लोरोसिस के तीन मरीजों में कंकालीय फ्लोरोसिस के लक्षण मिले। उन्हें हड्डी रोग विशेषज्ञ के पास जांच-उपचार के लिए रेफर किया गया।