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साहब! बच्चे पैदल चलकर थक जा रहे, घर भेजवा दीजिये
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बभनी। सरकार से मांगी मदद और आस लगाए बैठे रहे शनिवार को मुरादाबाद से पैदल व डग्गा वाहन से चल दिए। झोपड़ी और घरेलू सामान सब भगवान भरोसे ही छोड़ दिए। रोडवेज बस से लखनऊ से सोनभद्र जिला चिकित्सालय लाया गया। वहां से पिंकअप के माध्यम से म्योरपुर पहुंचे। वहां से पैदल बभनी तक पहुंचे हैं। यह पीड़ा छत्तीसगढ़ प्रांत के बेमेतरा थाना निवासी नवागढ़ा के रुपेश ने सुनाया। बताया कि शनिवार को भगवान भरोसे मुरादाबाद से अपनी पत्नी सहित छह लोग और पांच बच्चों के साथ चल दिए।
मुरादाबाद से लखनऊ पहुंचा, जहां से सोनभद्र जिला चिकित्सालय पहुंचे। फिर पिकअप से म्योरपुर पहुंचे, फिर पैदल बभनी पहुंचे। रूपेश ने कहा साहब हम मजदूर हैं और मजबूर हैं। साहब हम लोगों को किसी तरह घर भेजवा दें। इस समूह में रूपेश की पत्नी नीतू , प्रमोद व उसकी पत्नी बबली, बिहारी व उसकी पत्नी शीतल के अलावा पांच बच्चे शिवानी, योगिता, रितेश, नेमिता, और देवंती भी साथ में हैं। इसमें से रूपेश की पत्नी नीतू गर्भवती है। 28 मई को उसकी डिलिवरी का डेट है। अब पता नहीं कब घर पहुंचेंगे। सरकार का दावा है कि घर तक पहुचाएंगे लेकिन श्रमिकों की पीड़ा कम होने का नाम नहीं ले रही है।
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मुरादाबाद से लखनऊ पहुंचा, जहां से सोनभद्र जिला चिकित्सालय पहुंचे। फिर पिकअप से म्योरपुर पहुंचे, फिर पैदल बभनी पहुंचे। रूपेश ने कहा साहब हम मजदूर हैं और मजबूर हैं। साहब हम लोगों को किसी तरह घर भेजवा दें। इस समूह में रूपेश की पत्नी नीतू , प्रमोद व उसकी पत्नी बबली, बिहारी व उसकी पत्नी शीतल के अलावा पांच बच्चे शिवानी, योगिता, रितेश, नेमिता, और देवंती भी साथ में हैं। इसमें से रूपेश की पत्नी नीतू गर्भवती है। 28 मई को उसकी डिलिवरी का डेट है। अब पता नहीं कब घर पहुंचेंगे। सरकार का दावा है कि घर तक पहुचाएंगे लेकिन श्रमिकों की पीड़ा कम होने का नाम नहीं ले रही है।
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