शिव मंदिर धर्मशाला प्रांगण में आयोजित आठ दिवसीय श्रीमद्भागवत ज्ञान महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत कथा का समापन बुधवार को विशाल भंडारे के साथ हुआ। मुख्य यज्ञाचार्य पं. हरीराम मिश्र के नेतृत्व में पूर्णाहुति की प्रक्रिया संपन्न हुई, भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। साथ ही वृंदावन से आईं साध्वी ध्यानमूर्ति गुरू मां को श्रद्धालुओं ने भावभीनी विदाई दी।
श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन मंगलवार रात साध्वी ध्यानमूर्ति गुरू मां ने कहा कि परम अवतार भगवान श्रीकृष्ण एवं जगद्जननी माता राधारानी की पावन कथा सुनने और सुनाने वाले दोनों ही पुण्य के भागी होते हैं। कहा व्यक्ति को सदैव धर्म और सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए। उन्होंने महाभारत को उदाहरण के रुप में रखा। बोले पांडवों की तुलना में कौरवों की सेना कई गुना बड़ी थी, लेकिन पांडवों ने कौरवों को पराजित किया। क्योंकि उनके पक्ष में धर्म और सत्य की शक्ति भी थी। कहा युवा नशाखोरी, दहेज प्रथा, ऊंच नीच जैसी कुरीतियों से दूर रहें। इस मौके पर कार्यक्रम के मुख्य आयोजक राकेश कुमार, पप्पू मोदनवाल, अशोक अग्रहरि, किशानु, नगर पंचायत अध्यक्ष राजेश कुमार, रामानंद पांडेय,कमलेश मिश्र, अंकित मिश्र ,नंदलाल उमर,राजेश अग्रहरि इत्यादि रहे।