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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sonebhadra News ›   Seven major incidents of fire due to short circuit in one and a half year, no one has NOC for electrical safety

Sonebhadra News: डेढ़ साल में शार्ट सर्किट से आग की सात बड़ी घटनाएं, किसी के पास विद्युत सुरक्षा का एनओसी नहीं

Tue, 19 Nov 2024 11:04 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 19 Nov 2024 11:04 PM IST
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Seven major incidents of fire due to short circuit in one and a half year, no one has NOC for electrical safety
दुकान, अस्पताल, दफ्तर या अन्य व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में आग लगने की घटनाएं अक्सर हो रही हैं। ज्यादातर घटनाओं में आग लगने की वजह बिजली का शार्ट सर्किट होता है। बावजूद विद्युत सुरक्षा को लेकर न जिम्मेदार गंभीर हैं और न ही लोग खुद।
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हाल यह है कि जिले में किसी भी सरकारी व निजी संस्थान और प्रतिष्ठान में विद्युत सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। यहां तक कि बड़े भवनों व दुकानों में भी विद्युत सुरक्षा को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई।
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निर्माण के वक्त न विद्युत सुरक्षा की ऑडिट होती है और न ही बाद में कभी जांच। सारा ध्यान सिर्फ अग्निशमन के इंतजामों तक सिमटा है। पिछले डेढ़ साल में सरकारी और निजी संस्थानों के दफ्तर, गोदाम और दुकान में आग लगने की सात से अधिक घटनाएं हुई हैं।
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सभी की वजह बिजली तारों का शार्ट-सर्किट ही माना गया। कई जगह आग बुझाने में अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों को पसीने छूट गए। आसपास के लोग घंटों दहशत में रहे। बावजूद हर घटना के बाद भी लापरवाही जारी है।
जर्जर, कमजोर और पुराने तारों के कनेक्शन पर बिजली का उपभोग किया जा रहा है। कई सरकारी विभागों में तारों का मकड़जाल फैला हुआ है। कलेक्ट्रेट, विकास भवन जैसे सरकारी परिसरों में अक्सर शार्ट-सर्किट की घटनाएं होती रहती हैं।
सीएमओ के अधीन स्टोर में पिछले तीन वर्षों में चार बार शार्ट-सर्किट से आग लग चुकी है। इसी साल घोरावल सीएचसी परिसर में भी शार्ट सर्किट से आग लगने की घटना हुई थी। इन घटनाओं में लाखों का नुकसान भी हुआ।

बावजूद विद्युत सुरक्षा को लेकर कोई एहतियाती कदम नहीं उठाए गए। सिर्फ सरकारी परिसर ही नहीं निजी दुकानों, प्रतिष्ठानों में भी जमकर लापरवाही बरती जा रही है। अग्निशमन के साथ विद्युत सुरक्षा को लेकर कोई बाध्यता न होने से भी लोग बेपरवाह बने हुए हैं।

इसलिए होती हैं शार्ट-सर्किट की घटनाएं
- सॉकेट में कई प्लग लगाना।
- पुराने तारों का इस्तेमाल करना।
- कटे या डैमेज तारों को अनदेखा करना।
- ऐसी जगह स्विच बोर्ड लगाना जहां आसानी से पानी पहुंचने का खतरा हो।
- एसी जैसे हाई पावर इलेक्ट्रिक उपकरणों के लिए नॉर्मल स्विच का लगाना।
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