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वनवासियों की लोककला, संस्कृति को संवार रहा सेवाकुंज आश्रम

Sun, 14 Mar 2021 11:31 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 14 Mar 2021 11:31 PM IST
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Sevakunj Ashram has been grooming the folk art, culture of the tribals
बभनी। यूपी और छत्तीसगढ़ की सीमा से सटे चपकी गांव स्थित सेवा समर्पण संस्थान सेवाकुंज आश्रम आदिवासी संस्कृति को संजो रहा है। यहां गुरुकुल पद्धति से बच्चों को शिक्षा दी जाती है। बगैर किसी प्रशिक्षक के यहां के तीरंदाज एकलव्य की भांति धनुर्धर बन रहे हैं। इन धनुर्धरों ने राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है और कई गोल्ड मेडल जीतकर संस्थान का नाम देश में रोशन किया है।
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सेवा समर्पण संस्थान सेवाकुंज आश्रम कारीडांड़ चपकी बनवासियों के लोककला व संस्कृति को संवारने का काम कर रहा है। जब आदिवासी, वनवासी समाज की कला, संस्कृति विलुप्त प्राय हो रही थी, तब सेवाकुंज आश्रम ने इस प्राचीन संस्कृति को संजोने का बीड़ा उठाया। फिर धीरे-धीरे आदिवासी संस्कृति, लोककला को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न रचनात्मक गतिविधियां शुरू कीं। अब आश्रम वनवासियों की लोक कला, संस्कृति और क्षेत्रीय लोक संगीत को बढ़ावा देने का काम कर रहा है। सेवाकुंज आश्रम वनवासियों के विधि विधान को संजोने का काम करते हुए आश्रम में बैगा पुजारियों, गोंड, चेरो आदि समाज के पुजारियों को आमंत्रित कर उनके संस्कृति को संवार रहा है। आदिवासी समाज के लोग दशहरा, दीपावली, अनंत चतुर्दशी, नवरात्र आदि अवसरों पर कर्मदेव की पूजा जन्म जन्मांतर से करते चले आ रहे हैं। आदिवासियों का जीवन हमेशा से कलात्मक रहा है जो लुप्त हो रहा था। आदिवासियों का शैला नृत्य, कर्मानृत्य अपने आप में एक आकर्षक रहा है। आदिवासी समाज आज भी करमदेव की पूजा करता है और करमडाड को अपने आंगन में खड़ा कर पूरी रात उनकी पूजा करते हैं और कर्मा खेलते हैं। सेवाकुंज आश्रम बनवासियों, आदिवासियों के लिए वरदान साबित हो रहा है। सेवाकुंज आश्रम वनवासी बच्चों को छात्रावास में रखकर नि:शुल्क शिक्षा, तीरंदाजी की शिक्षा, खेलकूद का शिक्षा दिलाने का काम करता है।जिसका परिणाम तिरंदाजी में वनवासी बच्चे अंतरराष्ट्रीय स्तर, राष्ट्रीय स्तर तथा मंडल स्तर पर गोल्ड मेडल हासिल कर चुके हैं। पूर्व राज्यपाल रामनाईक सेवाकुंज के दो छात्रों को पूर्व में सम्मानित कर चुके हैं।
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