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1962 का चुनाव : अंतिम राउंड में हारे थे राजबहादुर, अंतर से ज्यादा निरस्त हो गए थे वोट
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चुनाव में प्रत्याशियों की हार-जीत होना वैसे तो सामान्य बात है, मगर जब कोई अपनों की गलती से हार जाए तो यह काफी तकलीफ देती है। ऐसा ही कुछ हुआ था वर्ष 1962 के चुनाव में राबर्ट्सगंज सीट पर। यहां से कांग्रेस के रामनाथ पाठक चुनाव जीते थे। उन्होंने निर्दल उम्मीदवार राजबहादुर को महज 190 मतों से हरा दिया था। रोचक बात यह रही कि इस चुनाव में 3462 वोट सही तरीके से मत न पड़ने के कारण निरस्त हो गए थे। निरस्त हुए मतों में ज्यादातर राजबहादुर के पक्ष के थे।
राबर्ट्सगंज तब मिर्जापुर जिले का हिस्सा होता था। इस सीट पर सात उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था। कांग्रेस से रामनाथ पाठक मैदान में थे, जबकि जनसंघ से महेंद्र प्रताप और सोशलिस्ट पार्टी से तेजबहादुर। राज बहादुर समेत तीन उम्मीदवार निर्दल थे। मुकाबला कांग्रेस के रामनाथ पाठक और राज बहादुर के बीच ही था। चुनाव प्रचार में दोनों ही उम्मीदवारों ने जोर लगाया। मतगणना शुरू हुई तो मतपत्रों के बंडल देख किसी की जीत का अंदाजा लगाना मुश्किल था। एक-एक वोट की गिनती के साथ सबकी सांसे अटकी हुई थीं। अंतिम चक्र की गणना के बाद रामनाथ पाठक 14700 वोट पाकर विजेता घोषित हुए। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी राज बहादुर को 14510 वोट प्राप्त हुआ था। जीत-हार का अंतर सिर्फ 190 वोटों का रहा। चुनाव में कुल 39016 वोट पड़े थे, जिसमें 36528 वैध रहे। 3462 मतों को अवैध घोषित कर दिया गया था। तब मतदान का सही तरीका मालूम न होने से किसी न मतपत्र पर अंगूठा लगा दिया था तो किसी ने गलत तरीके से मतपत्र मोड़ दिया, जिससे मुहर दो निशान पर लग गया था। निरस्त वोटों में ज्यादातर निर्दल प्रत्याशी के पक्ष में थे।
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राबर्ट्सगंज तब मिर्जापुर जिले का हिस्सा होता था। इस सीट पर सात उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था। कांग्रेस से रामनाथ पाठक मैदान में थे, जबकि जनसंघ से महेंद्र प्रताप और सोशलिस्ट पार्टी से तेजबहादुर। राज बहादुर समेत तीन उम्मीदवार निर्दल थे। मुकाबला कांग्रेस के रामनाथ पाठक और राज बहादुर के बीच ही था। चुनाव प्रचार में दोनों ही उम्मीदवारों ने जोर लगाया। मतगणना शुरू हुई तो मतपत्रों के बंडल देख किसी की जीत का अंदाजा लगाना मुश्किल था। एक-एक वोट की गिनती के साथ सबकी सांसे अटकी हुई थीं। अंतिम चक्र की गणना के बाद रामनाथ पाठक 14700 वोट पाकर विजेता घोषित हुए। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी राज बहादुर को 14510 वोट प्राप्त हुआ था। जीत-हार का अंतर सिर्फ 190 वोटों का रहा। चुनाव में कुल 39016 वोट पड़े थे, जिसमें 36528 वैध रहे। 3462 मतों को अवैध घोषित कर दिया गया था। तब मतदान का सही तरीका मालूम न होने से किसी न मतपत्र पर अंगूठा लगा दिया था तो किसी ने गलत तरीके से मतपत्र मोड़ दिया, जिससे मुहर दो निशान पर लग गया था। निरस्त वोटों में ज्यादातर निर्दल प्रत्याशी के पक्ष में थे।
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