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Rain in Uttar Pradesh: बारिश के लिए सोनभद्र में टोटके का सहारा, तालाब में झाड़ू डूबोकर इंद्रदेव से मनुहार

Sat, 16 Jul 2022 04:07 PM IST
उत्पल कांत संवाद न्यूज एजेंसी, सोनभद्र
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनभद्र Published by: उत्पल कांत Updated Sat, 16 Jul 2022 04:07 PM IST
सार

यूपी के सोनभद्र जिले में मानसून आने के बाद भी बरसात में कमी से परेशान किसानों ने अब टोटकों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। 

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Rain in Uttar Pradesh sonbhadra me barish ke totke pleads with Indradev by drowning broom in  pond
एक गांव की महिलाएं पैदल ही दूसरे गांव जाती हैं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आषाढ़ के सूखा रहने और सावन में भी अब तक बारिश के आसार न दिखने से लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है। बारिश के लिए प्रार्थनाओं के साथ टोटके भी शुरू हो गए है। सोनांचल का आदिवासी समाज भी इस वक्त बारिश के लिए टोटके कर रहा है। एक गांव की महिलाएं पैदल ही दूसरे गांव पहुंचकर तालाब में झाड़ू डूबोकर इंद्रदेव का मनुहार कर रही हैं।

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शुक्रवार को रासपहरी की महिलाएं कतारबद्ध होकर बगल के खैराही गांव पहुंचीं तो शनिवार को खैराही गांव की महिलाओं ने उसी तरह रासपहरी पहुंचकर तालाब में झाड़ू डूबोया और इंद्रदेव से बरसात कराने की प्रार्थना की। इलाके के आदिवासी समाज में मान्यता है कि तालाब में झाड़ू डूबोने से इंद्रदेव खुश होते हैं और फिर अच्छी बरसात होती है।

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लोगों को सता रही सूखे की आशंका

घने वन, पहाड़ और कई बांध-बंधियां होने के बाद भी जिले की अधिकांश खेती वर्षा के पानी पर निर्भर है। खरीफ की खेती का वक्त तेजी से बीतता जा रहा है, लेकिन अब तक माकूल वर्षा नहीं हुई है। खेतों में पड़ी धान की नर्सरी पानी के अभाव में सूख रही है। मोटे अनाज से जुड़ी अन्य फसलों की भी खेती प्रभावित है।

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एक गांव की महिलाएं पैदल ही दूसरे गांव जाती हैं। - फोटो : अमर उजाला

बारिश के अभाव में खेती न होने से भरण-पोषण के गंभीर संकट की कल्पना कर लोग सहमे हुए हैं। उन्हें सूखे की आशंका सता रही है। लिहाजा वह इंद्रदेव को मनाने में जुटे हैं। तरह-तरह के टोटके हो रहे हैं। पिछले दिनों तालाब के बीच बैठकर वरूण देव की पूजा की गई थी और अब एक गांव की महिलाएं दूसरे गांव जाकर तालाब में झाड़ू डूबोकर इंद्रदेव की मनुहार कर रही हैं।

रासपहरी की उर्मिला, फूलमति, सुशीला आदि का कहना था कि यह पूरा इलाका सिर्फ खेती और मजदूरी पर ही अाश्रित है। बारिश नहीं हुई तो खेती नहीं बचेगी और जब फसल नहीं होगी तो मजदूरी भी नहीं मिलेगी। इससे गंभीर हालात होंगे। लिहाजा इंद्रदेव को मनाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रहीं। जिन परिवारों की महिलाएं नहीं जा पा रहीं, वह दूसरों को चंदा देकर चढ़ावा चढ़ा रही हैं।

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