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उन्नीस वोट पाकर सपा से बीस हो गईं राधिका

Sat, 03 Jul 2021 10:30 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 03 Jul 2021 10:30 PM IST
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Radhika turns twenty from SP after getting nineteen votes
यूं तो जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव को हमेशा से सत्ता का माना जाता रहा है लेकिन शनिवार को हुए इस बार के चुनाव में नजारा बिल्कुल अलग दिखा। महीनों से एक-एक वोट सहेजने में जुटी सपा की सारी मेहनत पर ऐन वक्त पर पानी फिर गया। चुनाव को लेकर उनका सारा दांव उल्टा पड़ गया। स्थिति यह रही कि चुनाव से पहले सपा खेमे के लोग जितने वोट खुद को मिलने का दावा कर रहे थे, ठीक उतने ही वोट अपना दल की प्रत्याशी को मिल गया। कुल 31 सदस्यों वाले सदन में 19 वोट पाकर राधिका जोड़-तोड़ की रणनीति में सपा पर बीस हो गईं।
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जिला पंचायत अध्यक्ष पद की हर रणनीति में सपा ने खुद को सत्ताधारी दल से आगे रखने की कोशिश की। चुनाव के एलान के तत्काल बाद ही पार्टी ने जयप्रकाश उर्फ चेखुर पांडेय को प्रत्याशी घोषित कर दिया, ताकि उनके पास राजनीतिक गोटियां सेट करने का पर्याप्त समय मिल जाए। चेखुर ने इस मौके का लाभ भी उठाया। अपने खेमे के 11 सदस्यों और कुछ निर्दल सदस्यों के साथ वह खुद को जीत की ओर अग्रसर मान रहे थे। प्रत्याशी चयन को लेकर अपना दल और भाजपा में खींचतान के बाद उन्हें यह भरोसा था कि उन्हें क्रॉस वोटिंग का लाभ मिलेगा। पार्टी व्हिप से इतर हटकर सत्ताधारी खेमे के कुछ सदस्य उन्हें वोट करेंगे। शुक्रवार की रात तक सब कुछ इसी रणनीति के तहत होता रहा। उधर, सत्ताधारी गठबंधन बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए हरसंभव जतन करता नजर आया। लापता सदस्यों के अपहरण का मुकदमा दर्ज होने को सत्ताधारी दल की खीझ से जोड़कर देखा जा रहा था। शनिवार की सुबह तक सपा खेमे के लोग अपनी रणनीति सफल होते देख जीत को लेकर आश्वस्त थे। ऐन वक्त पर सत्ताधारी गठबंधन के सटीक दांव ने सपा को चारों खाने चित कर दिया। दोपहर में जब एक साथ 17 सदस्य वोट देने सत्ताधारी दल के नेताओं के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे तो सपाई अवाक रह गए। इसमें कई चेहरे ऐसे थे, जिसे सपा अपना समर्थक मान रहे थे। चुनाव के दौरान सत्ता का खूब जोर चलने की भी चर्चा हर ओर छाई रही।
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बाहुबली विनीत सिंह की उपस्थिति ने बदले समीकरण
चुनाव के दौरान बाहुबली श्याम नारायण सिंह उर्फ विनीत सिंह की उपस्थिति चर्चा में रही। राधिका पटेल को जीत दिलाने में पर्दे के पीछे विनीत सिंह की भूमिका को अहम माना जा रहा है। दो दिनों से वह अपना दल-एस के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष इं. आशीष पटेल के साथ जिले में ही डेरा डाले हुए थे। दोनों ने मिलकर अंतिम समय में पासा पलटते हुए जीत की रूपरेखा तैयार की। मिर्जापुर में बेहद करीबी के चुनाव मैदान में होने के बाद भी विनीत सिंह की सोनभद्र में लगातार उपस्थिति को लेकर चर्चाएं होती रहीं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक सोनभद्र में जीत की शर्त पर ही विनीत के लिए अपना दल ने मिर्जापुर की सीट छोड़ी थी। वादे के मुताबिक विनीत ने यहां जीत दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। एक साथ 17 सदस्यों को लेकर विनीत सिंह जब कलेक्ट्रेट के बाहर पहुंचे तो हर कोई अवाक था।
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