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प्रजनन क्षमता पर असर डाल रहा प्रदूषण

Fri, 12 Jun 2015 10:22 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो। सोनभद्र
अमर उजाला ब्यूरो। सोनभद्र Updated Fri, 12 Jun 2015 10:22 PM IST
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Pollution to affect fertility
 ऊर्जांचल परिक्षेत्र में प्रदूषण की भयावह स्थिति इंसान के प्रजनन क्षमता पर असर डाल रही है। बीएचयू की शोध टीम की ओर से परिक्षेत्र के किए गए अध्ययन में सामने आए इस सच ने हड़कंप मच गया है। वहीं प्रदूषण नियंत्रण की हो रही कवायदों पर भी सवाल उठाए जाने लगे हैं। हालांकि ऊर्जांचल के किन-किन हिस्सों में हालात ज्यादा खराब है, इसको लेकर कुछ भी कहने से परहेज किया जा रहा है लेकिन टीम का यह भी मानना है कि जल्द इस पर प्रभावी नियंत्रण नहीं लगा तो आगे चलकर हालात और खराब होने वाले हैं।
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बताते चलें कि केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय की पहल पर दो दिन पूर्व बीएचयू से आशीष आनंद त्रिपाठी की अगुवाई में आई पांच सदस्यीय ने ऊर्जांचल परिक्षेत्र में प्रदूषण की स्थिति का अध्ययन किया। खासकर कोयला उत्खनन, परिवहन और लोडिंग के चलते होने वाले प्रदूषण और मानव जीवन पर पड़ रहे दुष्प्रभाव की जानकारी की। परियोजना क्षेत्र में रह रहे लोगों से बातचीत कर जरूरी जानकारी भी जुटाई।
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अनपरा-शक्तिननगर मार्ग पर कोयला और राख परिवहन से होने वाले प्रदूषण, सड़क की सफाई की स्थिति, पटरियों और सड़क पर जमा कोयले की परत आदि के स्थिति की जानकारी के साथ ही जरूरी तस्वीरें भी लीं। दो दिन तक इलाके का विस्तृत अध्ययन करने के बाद गत बुधवार की रात टीम वाराणसी के लिए वापस लौट गई। लोगों से बातचीत के जरिए टीम के समक्ष जो स्थिति सामने आई वह चौंकाने वाली रही। चर्म रोग, बाल झड़ने जैसी समस्याओं की बहुलता तो मिली ही खासकर आठ से दस वर्ष के बीच पापुलेशन ग्रोथ (जनसंख्या वृद्धि) में आश्चर्यजनक ढंग से कमी टीम को चौंकाने वाली रही।
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हालांकि टीम के अगुवा आकाश आनंद त्रिपाठी ने मामले को कांफिडेंशियल बताते हुए प्रदूषण के दौरान कौन-कौन सी स्थिति सामने आई और मानक के सापेक्ष प्रदूषण का स्तर कहां तक जा पहुंचा है, इसके बारे में किसी तरह की टिप्पणी से इंकार कर दिया। अलबत्ता उन्होंने यह स्वीकारा कि हालात काफी चिंताजनक है। प्रदूषण से स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत तो लोगों को परेशान किए ही है, सबसे चिंताजनक स्थिति पापुलेशन ग्रोथ को लेकर है। उनका मानना था कि जिस तरह से प्रदूषण ऊर्जांचल परिक्षेत्र के लोगों के प्रजनन क्षमता पर असर डाल रहा है, अगर उस पर अंकुश के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो हालात ज्यादा खराब हो सकते हैं।

 
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