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Sonebhadra News: हमें रोटियां ही दीजिए बहुत भूख लगी है...
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सोनभद्र। शहीद स्थल प्रवंधन ट्रस्ट करारी सोनभद्र के तत्वावधान में रविवार को दोपहर में शहीद भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु को समर्पित कवि गोष्ठी आयोजित हुई। रामनाथ शिवेंद्र संपादक असुविधा ने - सद्भावना की रचना, हमें रोटियां ही दीजिए बहुत भूख लगी है दे रहे हो गीता कुरान किसलिए... सुनाया। इस दौरान छह कृतियों का विमोचन भी किया गया।
अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार अजय शेखर ने की। रामनाथ शिवेंद्र की बीसवीं कृति, अंगारों पर चलते हुए ओमप्रकाश त्रिपाठी की बारहवीं कृति, जीवन के रंग अनुभव के संग, सुधाकर पांडेय स्वदेश प्रेम की कृति, वंदेमातरम् खंडकाव्य व संयुक्त कविता संकलन, सोन काव्यांजलि का विमोचन अतिथियों ने किया।
वरिष्ठ कवयित्री कौशल्या कुमारी चौहान ने - जयहिंद वंदेमातरम् का जो करते सम्मान नहीं वे भारत माता के दुश्मन उनका हिंदुस्तान नहीं... सुनाकर वाहवाही बटोरी। आयोजक संयोजक प्रदुम्न त्रिपाठी ने - पड़े जरूरत जब भी वतन को कफन बांध हम आएंगे... सुनाया। धर्मेश चौहान ने - सबसे सुंदर सबसे न्यारा भारत देश हमारा..., दिलीप सिंह दीपक ने - तुम सबकुछ बेच दो, लेकिन हिंदुस्तान मत बेचो... सुनाया। संचालन अशोक तिवारी ने किया। वरिष्ठ कवि शिवदास, शायर अब्दुल हई, दयानंद दयालू, कवि प्रभात सिंह चंदेल ने रचनाएं सुनाईं। समाजसेवा के लिए फरीद अहमद को अंगवस्त्र लेखनी, पुस्तिका, प्रतीक चिह्न, नकद दिया गया। इस मौके पर राधेश्याम पाल, अरुण तिवारी, गोपाल कुशवाहा, विकास वर्मा, सुनील, जयराम सोनी रहे। संवाद
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अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार अजय शेखर ने की। रामनाथ शिवेंद्र की बीसवीं कृति, अंगारों पर चलते हुए ओमप्रकाश त्रिपाठी की बारहवीं कृति, जीवन के रंग अनुभव के संग, सुधाकर पांडेय स्वदेश प्रेम की कृति, वंदेमातरम् खंडकाव्य व संयुक्त कविता संकलन, सोन काव्यांजलि का विमोचन अतिथियों ने किया।
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वरिष्ठ कवयित्री कौशल्या कुमारी चौहान ने - जयहिंद वंदेमातरम् का जो करते सम्मान नहीं वे भारत माता के दुश्मन उनका हिंदुस्तान नहीं... सुनाकर वाहवाही बटोरी। आयोजक संयोजक प्रदुम्न त्रिपाठी ने - पड़े जरूरत जब भी वतन को कफन बांध हम आएंगे... सुनाया। धर्मेश चौहान ने - सबसे सुंदर सबसे न्यारा भारत देश हमारा..., दिलीप सिंह दीपक ने - तुम सबकुछ बेच दो, लेकिन हिंदुस्तान मत बेचो... सुनाया। संचालन अशोक तिवारी ने किया। वरिष्ठ कवि शिवदास, शायर अब्दुल हई, दयानंद दयालू, कवि प्रभात सिंह चंदेल ने रचनाएं सुनाईं। समाजसेवा के लिए फरीद अहमद को अंगवस्त्र लेखनी, पुस्तिका, प्रतीक चिह्न, नकद दिया गया। इस मौके पर राधेश्याम पाल, अरुण तिवारी, गोपाल कुशवाहा, विकास वर्मा, सुनील, जयराम सोनी रहे। संवाद
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