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टिड्डी दलों को भगाने के लिए थाली, ढोलक, नगाडे, डीजे बजाएं
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जिला कृषि रक्षा अधिकारी जनार्दन कटियार ने ट्टिडी दलों के संभावित आक्रमण के दृष्टिगत किसानों को सतर्क किया है। कहा कि संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन ने जारी पूर्वानुमान के अनुसार 2020-21 में राजस्थान से आये टिड्डी दलों के आक्रमण की आशंका जताई है और पर्याप्त तैयार के लिए सजग किया है। उन्होंने बताया कि टिड्डी दलों के आक्रमण की दशा में एक साथ एकत्र होकर टीन के डिब्बों, थालियों, ढोलक-नगाड़ों, डीजे आदि बजाते हुए तेज आवाज करने का सुझाव दिया जा रहा है।
इससे टिड्डी दल आस-पास के खेतों में बैठ नहीं पायेंगे, जिससे नुकसान की संभावना नहीं होगी। बलुई मिट्टी टिड्डी के प्रजनन एवं अंडे देने के लिए सर्वाधिक अनुकूल होती है। टिड्डी दलों के आक्रमण से संभावित ऐसे क्षेत्रों में जुताई करवा कर जल भराव करने के लिए सुझाव दिया जाता है। ऐसी दशा में टिड्डियों के प्रजनन, वृद्धि की संभावना कम हो जाती है। टिड्डी दल सामान्यत: रात्रि में फसलों, झाड़ियों एवं पेड़ों पर प्रवास करते हैं तथा इन्हें अत्यधिक क्षति पहुंचाते हैं। टिड्डी दलों के रात्रि प्रवास के समय ही इन पर कृषि रक्षा रसायनों जैसे क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ईसी, क्लोरपाइरीफास 50 प्रतिशत ईसी लैंब्डासाइहेलोथ्रिन पांच प्रतिशत ईसी, लैंब्डासाइहेलोथ्रिन 10 प्रतिशत डबलूपी, मैथाथियान 50 प्रतिशत ईसी, डेल्टामेंथ्रिन 2.8 प्रतिशत ईसी, फिप्रोनिल पांच प्रतिशत एससी, फिप्रोनिल 2.8 प्रतिशत ईसी इत्यादि का छिड़काव कर इन्हें नियंत्रित किया जा सकता है। टिड्डी दलों के प्रभावी नियंत्रण के लिए मैथाथियान 96 प्रतिशत, यूएलबी का छिड़काव अत्यन्त प्रभावी होता है।
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इससे टिड्डी दल आस-पास के खेतों में बैठ नहीं पायेंगे, जिससे नुकसान की संभावना नहीं होगी। बलुई मिट्टी टिड्डी के प्रजनन एवं अंडे देने के लिए सर्वाधिक अनुकूल होती है। टिड्डी दलों के आक्रमण से संभावित ऐसे क्षेत्रों में जुताई करवा कर जल भराव करने के लिए सुझाव दिया जाता है। ऐसी दशा में टिड्डियों के प्रजनन, वृद्धि की संभावना कम हो जाती है। टिड्डी दल सामान्यत: रात्रि में फसलों, झाड़ियों एवं पेड़ों पर प्रवास करते हैं तथा इन्हें अत्यधिक क्षति पहुंचाते हैं। टिड्डी दलों के रात्रि प्रवास के समय ही इन पर कृषि रक्षा रसायनों जैसे क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ईसी, क्लोरपाइरीफास 50 प्रतिशत ईसी लैंब्डासाइहेलोथ्रिन पांच प्रतिशत ईसी, लैंब्डासाइहेलोथ्रिन 10 प्रतिशत डबलूपी, मैथाथियान 50 प्रतिशत ईसी, डेल्टामेंथ्रिन 2.8 प्रतिशत ईसी, फिप्रोनिल पांच प्रतिशत एससी, फिप्रोनिल 2.8 प्रतिशत ईसी इत्यादि का छिड़काव कर इन्हें नियंत्रित किया जा सकता है। टिड्डी दलों के प्रभावी नियंत्रण के लिए मैथाथियान 96 प्रतिशत, यूएलबी का छिड़काव अत्यन्त प्रभावी होता है।
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