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Sonebhadra News: पांच वर्षों में पचास से अधिक जगहों पर हुई प्लाटिंग, रिकार्ड में पांच भी नहीं
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सोनभद्र। जमीन का धंधा तेजी से चल रहा है। चार-छह लोग मिलकर पहले खेत की जमीन खरीदते हैं, फिर उस पर प्लाट बनाकर ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं। हाल यह है कि पिछले पांच वर्षों में ही नगर से सटे इलाकों में पचास से अधिक जगहों पर प्लाटिंग कर दी गई है, लेकिन रिकार्ड में पांच का भी उल्लेख नहीं है। जिम्मेदार कर्मचारियों की कमी का रोना रो रहे हैं और उनकी मिलीभगत से धंधेबाज मलाई काट रहे हैं।
राबर्ट्सगंज नगर का तेजी से विकास हो रहा है। जिला मुख्यालय होने के कारण जिले के हर क्षेत्र के लोग यहां बसना चाह रहे हैं। इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज सहित अन्य संस्थानों के निर्माण और सुविधाओं के विकास के चलते पिछले कुछ वर्षों में यह रुझान तेजी से बढ़ा है। लिहाजा जमीन के धंधेबाजों की संख्या भी बढ़ने लगी है।
तेजी से प्लाटिंग के चलते नई कॉलोनियां बसाई जा रही हैं। दस वर्ष पहले तक जिन इलाकों में खेती होती थी, अब वहां बिल्डिंगें तनने लगी हैं या प्लाट काट दिए गए हैं। यह बात अलग है कि कागज में ऐसी कॉलोनियों या प्लाटों का अब भी कोई उल्लेख नहीं है। अधिकारी-कर्मचारी भी यह जानने की जहमत नहीं उठाते। नतीजा मनमाने ढंग से खेती की जमीन पर प्लाट तेजी से बढ़ते जा रहे हैं।
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सुविधाओं का दिखाते सब्जबाग, मौके पर कुछ नहीं
नगर में बसने की चाहत से लोग तेजी से मुख्यालय की ओर आ रहे हैं। अपने सपनों का घर बनाने के लिए वह महंगे दामों पर जमीन और प्लाट खरीद रहे हैं। प्लाट बेचते समय तो उन्हें तमाम तरह की सुविधाओं का सब्जबाग दिखाया जाता है, लेकिन जब आशियाना बनना शुरू होता है तो मौके पर कुछ नहीं मिलता। नियमों के मुताबिक किसी तरह की कॉलोनी में सड़क, पार्क, कम्यूनिटी हाल, जलनिकासी, पार्किंग, ग्रीन बेल्ट सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं होनी चाहिए। नई कॉलोनियाें में कहीं भी इस मानक का पालन नहीं हो रहा। जमीन को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर प्लाट बना दिए गए हैं। बाकी सुविधाओं का इंतजाम नहीं है।
न भूमि का डायवर्सन हुआ और न ले आउट स्वीकृत
नगर के आसपास पांच किमी का दायरा विनियमित क्षेत्र के अंतर्गत है। इस क्षेत्र में होने वाले किसी तरह के निर्माण से पहले विनियमित क्षेत्र की मंजूरी लेनी होती है, मगर यहां तेजी से हो रही प्लाटिंग से विनियमित क्षेत्र के अधिकारी अनभिज्ञ हैं। हाल यह है कि पिछले पांच वर्षों के अंदर इस क्षेत्र में पचास से अधिक स्थानों पर प्लाटिंग हुई है, लेकिन अधिकारियाें इसकी खबर भी नहीं है। किसी भी जगह प्लाटिंग से पहले ले आउट की मंजूरी ही नहीं ली गई और न ही कृषि भूमि का आवासीय श्रेणी में रुपांतरण कराया गया।
घोरावल और चुर्क रोड पर तेजी से विकास
कृषि भूमि पर आवासीय प्लाटों का निर्माण सबसे ज्यादा घोरावल और चुर्क रोड पर है। स्टेट हाईवे घोषित होने के बाद घोरावल रोड और मेडिकल व इंजीनियरिंग कॉलेज निर्माण के चलते चुर्क रोड पर लोग बसना चाह रहे हैं। राबर्ट्सगंज से जैत तक हर 100 मीटर की दूरी पर आवासीय प्लाट बिकाऊ है का बाेर्ड सड़क किनारे टंगा है। ऐसी ही स्थिति चुर्क रोड की भी है।
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इन इलाकों में तेजी से हो रही प्लाटिंग :
घोरावल रोड : राबर्ट्रसगंज से जैत तक दस जगह
शक्तिनगर रोड : लोढ़ी, छपका, पुसौली, उरमौरा में 12-14 जगह
चुर्क रोड : सहिजन कला, सहिजन खुर्द, रौंप में 8-10 जगह
पन्नूगंज रोड : घुवास, सजौर में छह-सात जगह
वाराणसी रोड : बुड़हर, बभनौली, पड़री, बिच्छी, ममुआ में 10-12 जगह
यह हैं प्रमुख मानक :
* कॉलोनी बसाने से पहले कृषि भूमि का आवासीय में स्वरूप बदलना जरूरी।
* मुख्य सड़क 25-30 फीट होनी चाहिए। इसी तरह गलियों का मानक 18-20 फीट का है।
* बच्चों के लिए पार्क, मनोरंजन के लिए कम्युनिटी हाल की जगह चिह्नित होनी चाहिए।
* जलनिकासी के लिए सीवर लाइन की समुचित व्यवस्था हो।
विनियमित क्षेत्र के अंतर्गत होने वाले हर निर्माण पर नजर रखी जा रही है। अवैध तरीके से प्लाटिंग पर नोटिस भी दिया जा रहा है। अब तक 10-12 लोगों को नोटिस दिया गया है। प्लाटिंग करने पर रोक नहीं है, बस नियमों के दायरे में होना चाहिए। प्लाट या जमीन खरीदते समय लोग भी सावधानी बरतें। सड़क, बिजली, पानी जैसी सुविधाओं को देखकर ही कोई प्लाट लें। - श्रवण पांडेय, जेई विनियमित क्षेत्र
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राबर्ट्सगंज नगर का तेजी से विकास हो रहा है। जिला मुख्यालय होने के कारण जिले के हर क्षेत्र के लोग यहां बसना चाह रहे हैं। इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज सहित अन्य संस्थानों के निर्माण और सुविधाओं के विकास के चलते पिछले कुछ वर्षों में यह रुझान तेजी से बढ़ा है। लिहाजा जमीन के धंधेबाजों की संख्या भी बढ़ने लगी है।
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तेजी से प्लाटिंग के चलते नई कॉलोनियां बसाई जा रही हैं। दस वर्ष पहले तक जिन इलाकों में खेती होती थी, अब वहां बिल्डिंगें तनने लगी हैं या प्लाट काट दिए गए हैं। यह बात अलग है कि कागज में ऐसी कॉलोनियों या प्लाटों का अब भी कोई उल्लेख नहीं है। अधिकारी-कर्मचारी भी यह जानने की जहमत नहीं उठाते। नतीजा मनमाने ढंग से खेती की जमीन पर प्लाट तेजी से बढ़ते जा रहे हैं।
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सुविधाओं का दिखाते सब्जबाग, मौके पर कुछ नहीं
नगर में बसने की चाहत से लोग तेजी से मुख्यालय की ओर आ रहे हैं। अपने सपनों का घर बनाने के लिए वह महंगे दामों पर जमीन और प्लाट खरीद रहे हैं। प्लाट बेचते समय तो उन्हें तमाम तरह की सुविधाओं का सब्जबाग दिखाया जाता है, लेकिन जब आशियाना बनना शुरू होता है तो मौके पर कुछ नहीं मिलता। नियमों के मुताबिक किसी तरह की कॉलोनी में सड़क, पार्क, कम्यूनिटी हाल, जलनिकासी, पार्किंग, ग्रीन बेल्ट सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं होनी चाहिए। नई कॉलोनियाें में कहीं भी इस मानक का पालन नहीं हो रहा। जमीन को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर प्लाट बना दिए गए हैं। बाकी सुविधाओं का इंतजाम नहीं है।
न भूमि का डायवर्सन हुआ और न ले आउट स्वीकृत
नगर के आसपास पांच किमी का दायरा विनियमित क्षेत्र के अंतर्गत है। इस क्षेत्र में होने वाले किसी तरह के निर्माण से पहले विनियमित क्षेत्र की मंजूरी लेनी होती है, मगर यहां तेजी से हो रही प्लाटिंग से विनियमित क्षेत्र के अधिकारी अनभिज्ञ हैं। हाल यह है कि पिछले पांच वर्षों के अंदर इस क्षेत्र में पचास से अधिक स्थानों पर प्लाटिंग हुई है, लेकिन अधिकारियाें इसकी खबर भी नहीं है। किसी भी जगह प्लाटिंग से पहले ले आउट की मंजूरी ही नहीं ली गई और न ही कृषि भूमि का आवासीय श्रेणी में रुपांतरण कराया गया।
घोरावल और चुर्क रोड पर तेजी से विकास
कृषि भूमि पर आवासीय प्लाटों का निर्माण सबसे ज्यादा घोरावल और चुर्क रोड पर है। स्टेट हाईवे घोषित होने के बाद घोरावल रोड और मेडिकल व इंजीनियरिंग कॉलेज निर्माण के चलते चुर्क रोड पर लोग बसना चाह रहे हैं। राबर्ट्सगंज से जैत तक हर 100 मीटर की दूरी पर आवासीय प्लाट बिकाऊ है का बाेर्ड सड़क किनारे टंगा है। ऐसी ही स्थिति चुर्क रोड की भी है।
इन इलाकों में तेजी से हो रही प्लाटिंग :
घोरावल रोड : राबर्ट्रसगंज से जैत तक दस जगह
शक्तिनगर रोड : लोढ़ी, छपका, पुसौली, उरमौरा में 12-14 जगह
चुर्क रोड : सहिजन कला, सहिजन खुर्द, रौंप में 8-10 जगह
पन्नूगंज रोड : घुवास, सजौर में छह-सात जगह
वाराणसी रोड : बुड़हर, बभनौली, पड़री, बिच्छी, ममुआ में 10-12 जगह
यह हैं प्रमुख मानक :
* कॉलोनी बसाने से पहले कृषि भूमि का आवासीय में स्वरूप बदलना जरूरी।
* मुख्य सड़क 25-30 फीट होनी चाहिए। इसी तरह गलियों का मानक 18-20 फीट का है।
* बच्चों के लिए पार्क, मनोरंजन के लिए कम्युनिटी हाल की जगह चिह्नित होनी चाहिए।
* जलनिकासी के लिए सीवर लाइन की समुचित व्यवस्था हो।
विनियमित क्षेत्र के अंतर्गत होने वाले हर निर्माण पर नजर रखी जा रही है। अवैध तरीके से प्लाटिंग पर नोटिस भी दिया जा रहा है। अब तक 10-12 लोगों को नोटिस दिया गया है। प्लाटिंग करने पर रोक नहीं है, बस नियमों के दायरे में होना चाहिए। प्लाट या जमीन खरीदते समय लोग भी सावधानी बरतें। सड़क, बिजली, पानी जैसी सुविधाओं को देखकर ही कोई प्लाट लें। - श्रवण पांडेय, जेई विनियमित क्षेत्र