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पांच ब्लाकों में खुलेगा पंजीरी कारखाना, समूहों को मिलेगा संचालन का जिम्मा
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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जिले की महिलाओं को अब पंजीरी बनाने और उसके वितरण से भी जोड़ा जाएगा। इसके लिए जिले के पांच ब्लाकों में पंजीरी कारखाना खोला जाएगा। इस पर साढ़े चार करोड़ रुपये खर्च होंगे। महिला समूहों को इन कारखानों के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी और वह इसकी शेयर होल्डर भी बनेंगी। एक कारखाना से करीब सौ महिलाओं को रोजगार मिलने की उम्मीद है।
पंजीरी वितरण से भी बड़ी संख्या में महिला समूह जुड़ेंगे। टेक होम राशन प्लांट के रूप में लगने वाले पंजीरी कारखाने के लिए सदर, चोपन, दुद्धी, चतरा और म्योरपुर ब्लाक का चयन किया गया है। एक कारखाने के निर्माण में करीब 90 लाख रुपये खर्च आएगा। एनआरएलएम के जिला प्रबंधक एमजे रवि ने बताया कि पांच प्लांटों को लगाने में साढ़े चार करोड़ रुपये खर्च किया जाएगा। यह धनराशि अलग-अलग 300 समूहों से एकत्रित की जाएगी। इन कारखानों के संचालन की जिम्मेदारी भी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के पास होगा। यहां तैयार पोषाहार बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के जरिए बच्चों, गर्भवती महिलाओं व स्कूल न जाने वाली किशोरियों को वितरित किया जाएगा। इससे जो लाभ मिलेगा उसके आधार पर समूह की महिलाओं में बराबर-बराबर दिया जाएगा। एक समूह में औसतन 12 महिला होती हैं। एक प्लांट से 300 समूह जुड़ेंगे। इस तरह से एक प्लांट से जो महिलाएं लाभांवित होंगी उनकी संख्या 3600 होगी। सभी पांच प्लांटों से 18000 महिलाएं होंगी। प्रत्येक प्लांट में करीब 20 महिलाएं काम करेंगी। इस तरह से चार प्लांटों में कुल मिलाकर 100 महिलाएं काम करेंगी। इन्हें आठ हजार रुपये हर महीने मानदेय दिया जाएगा।
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पंजीरी वितरण से भी बड़ी संख्या में महिला समूह जुड़ेंगे। टेक होम राशन प्लांट के रूप में लगने वाले पंजीरी कारखाने के लिए सदर, चोपन, दुद्धी, चतरा और म्योरपुर ब्लाक का चयन किया गया है। एक कारखाने के निर्माण में करीब 90 लाख रुपये खर्च आएगा। एनआरएलएम के जिला प्रबंधक एमजे रवि ने बताया कि पांच प्लांटों को लगाने में साढ़े चार करोड़ रुपये खर्च किया जाएगा। यह धनराशि अलग-अलग 300 समूहों से एकत्रित की जाएगी। इन कारखानों के संचालन की जिम्मेदारी भी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के पास होगा। यहां तैयार पोषाहार बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के जरिए बच्चों, गर्भवती महिलाओं व स्कूल न जाने वाली किशोरियों को वितरित किया जाएगा। इससे जो लाभ मिलेगा उसके आधार पर समूह की महिलाओं में बराबर-बराबर दिया जाएगा। एक समूह में औसतन 12 महिला होती हैं। एक प्लांट से 300 समूह जुड़ेंगे। इस तरह से एक प्लांट से जो महिलाएं लाभांवित होंगी उनकी संख्या 3600 होगी। सभी पांच प्लांटों से 18000 महिलाएं होंगी। प्रत्येक प्लांट में करीब 20 महिलाएं काम करेंगी। इस तरह से चार प्लांटों में कुल मिलाकर 100 महिलाएं काम करेंगी। इन्हें आठ हजार रुपये हर महीने मानदेय दिया जाएगा।
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