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डेढ़ वर्ष पहले हुए 16 टेंडरों पर बालू खनन का खुला रास्ता
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सोनभद्र। प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को कैबिनेट में राबर्ट्सगंज तहसील के पांच गांवों को आरक्षित वन क्षेत्र घोषित कर दिया है। अब इन गांवों में राजस्व, वन और काश्तकार की भूमि के सीमांकन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इससे करीब डेढ़ साल पूर्व हुए 16 टेंडरों पर जल्द ही बालू खनन का रास्ता खुल गया है। इससे जिले सहित पूर्वांचल में बालू सस्ता होगा।
जिले के राबर्ट्सगंज तहसील के पांच गांवों ससनई, बरहमोरी, अगोरी खास, भगवा, खेवंधा में राजस्व, वन और काश्तकार की भूमि को लेकर विवाद की स्थिति थी। वन विभाग की अक्सर आपत्ति होती थी कि इन गांवों में तमाम क्षेत्र धारा चार में हैं और इन पर किसी तरह का खनन कार्य नहीं किया जा सकता है। ऐसे में इन पांचों जगहों पर किसी तरह का खनन नहीं हो पाता था। प्रशासनिक स्तर पर इन पांचों जगहों पर धारा 20 के प्रकाशन की प्रक्रिया पूर्ण करने के लिए शासन को भेजा गया था। उस प्रक्रिया पर शासन की अंतिम मूहर लग गई है। शुक्रवार को कैबिनेट में इन पांचों गांवों को आरक्षित वन क्षेत्र घोषित करने के बाद यहां बालू खनन का रास्ता साफ हो गया है। करीब डेढ़ साल पहले इन पांचों जगहों पर कुल 16 बालू खनन स्थल के लिए टेंडर की प्रक्रिया हुई थी। लेकिन बाद में यह मामला वन विभाग के हस्तक्षेप के नाते लंबित हो गया था। अब राजस्व, वन व काश्तकार की भूमि का अलग-अलग सीमांकन कर दिया गया है। ऐसे में अब इन क्षेत्रों में खनन कार्य हो सकेगा। हालांकि इसके लिए पर्यावरण की एनओसी लानी होगी। जिले में कुछ ही बालू की साइट संचालित होने से बालू काफी महंगा बिकता है। वर्तमान में बालू की कीमत चार हजार रुपये प्रति सौ फीट है। यदि अब 16 बालू साइट और चालू हो जाएगी तो बालू की कीमत और घट सकती है। हालांकि ओवरलोड की समस्या खत्म न होने से बालू की दर पर प्रभाव पड़ रहा है।
वर्जन.....
यूपी कैबिनेट में राबर्ट्सगंज तहसील के पांच गांवों को आरक्षित वन क्षेत्र घोषित किया गया है। इन गांवों में राजस्व, वन और काश्तकारों की भूमि का सीमांकन हो चुका है। ऐसे में अब इन क्षेत्रों में खनन का रास्ता साफ हो गया है। वन क्षेत्र में गैर वानिकी कार्य नहीं हो सकेंगे। शेष क्षेत्रों में खनन व अन्य विकास कार्य हो सकेंगे।-एस. राजलिंगम, जिलाधिकारी, सोनभद्र।
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जिले के राबर्ट्सगंज तहसील के पांच गांवों ससनई, बरहमोरी, अगोरी खास, भगवा, खेवंधा में राजस्व, वन और काश्तकार की भूमि को लेकर विवाद की स्थिति थी। वन विभाग की अक्सर आपत्ति होती थी कि इन गांवों में तमाम क्षेत्र धारा चार में हैं और इन पर किसी तरह का खनन कार्य नहीं किया जा सकता है। ऐसे में इन पांचों जगहों पर किसी तरह का खनन नहीं हो पाता था। प्रशासनिक स्तर पर इन पांचों जगहों पर धारा 20 के प्रकाशन की प्रक्रिया पूर्ण करने के लिए शासन को भेजा गया था। उस प्रक्रिया पर शासन की अंतिम मूहर लग गई है। शुक्रवार को कैबिनेट में इन पांचों गांवों को आरक्षित वन क्षेत्र घोषित करने के बाद यहां बालू खनन का रास्ता साफ हो गया है। करीब डेढ़ साल पहले इन पांचों जगहों पर कुल 16 बालू खनन स्थल के लिए टेंडर की प्रक्रिया हुई थी। लेकिन बाद में यह मामला वन विभाग के हस्तक्षेप के नाते लंबित हो गया था। अब राजस्व, वन व काश्तकार की भूमि का अलग-अलग सीमांकन कर दिया गया है। ऐसे में अब इन क्षेत्रों में खनन कार्य हो सकेगा। हालांकि इसके लिए पर्यावरण की एनओसी लानी होगी। जिले में कुछ ही बालू की साइट संचालित होने से बालू काफी महंगा बिकता है। वर्तमान में बालू की कीमत चार हजार रुपये प्रति सौ फीट है। यदि अब 16 बालू साइट और चालू हो जाएगी तो बालू की कीमत और घट सकती है। हालांकि ओवरलोड की समस्या खत्म न होने से बालू की दर पर प्रभाव पड़ रहा है।
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यूपी कैबिनेट में राबर्ट्सगंज तहसील के पांच गांवों को आरक्षित वन क्षेत्र घोषित किया गया है। इन गांवों में राजस्व, वन और काश्तकारों की भूमि का सीमांकन हो चुका है। ऐसे में अब इन क्षेत्रों में खनन का रास्ता साफ हो गया है। वन क्षेत्र में गैर वानिकी कार्य नहीं हो सकेंगे। शेष क्षेत्रों में खनन व अन्य विकास कार्य हो सकेंगे।-एस. राजलिंगम, जिलाधिकारी, सोनभद्र।
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