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अब नर्सरी लगाकर तरक्की राह पर चलेंगी समूह की महिलाएं
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अभी तक जिले की समूह की महिलाएं गाय के गोबर से उत्पाद बनाकर व बिजली का बिल जमा कर सहित अन्य काम करते हुए आय के साधन ढूंढ रही थीं। अब समूह की महिलाएं नर्सरी लगाकर भी अच्छा लाभ उठाएंगी। जिले के सभी दस ब्लॉक में दो-दो नर्सरी स्थापित की जाएगी। शुरूआत में सरकार की तरफ से आर्थिक मदद भी दी जाएगी। पौधे बेचकर समूह की महिलाएं आर्थिक तरक्की कर सकेंगी। इसके लिए गांवों का चयन शुरू कर दिया गया है।
शासन की तरफ से प्रदेश के सभी जिलों में महिला समूहों के माध्यम से नर्सरी संचालन करने के लिए निर्देशित किया गया है। इसके पीछे सरकार का उद्देश्य है ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना। जब महिलाएं आर्थिक रूप से संपन्न होंगी तो परिवार के साथ ही देश की तरक्की होगी। शासन के निर्देश के क्रम में जिले के सभी ब्लॉक म्योरपुर, बभनी, दुद्धी, कोन, चोपन, राबर्ट्सगंज, चतरा, नगवां, करमा और घोरावल ब्लॉक में दो- दो गांवों का चयन करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। गांवों के चयन की प्रक्रिया पूरी करके समूह की महिलाएं प्रशासन के सहयोग से फलदार एवं छायादार पौधों की नर्सरी तैयार करेंगी। समूह की महिलाओं को नर्सरी तैयार करने के लिए पहले प्रशासन की तरफ से पहले अनुदान दिया जाएगा। इसके बाद महिलाएं खुद के खर्च पर नर्सरी की देखभाल करेंगी और पौधों की बिक्री करके आमदनी कर सकेंगी।
खुद की जमीन पर तैयार करनी होगी नर्सरी
अधिकारियों की मानें तो समूह की महिलाओं को खुद की जमीन पर नर्सरी तैयार करना होगा। प्रशासन की तरफ से जमीन नहीं दी जाएगी। पहली बार नर्सरी तैयार करने के लिए प्रशिक्षण व अनुदान दिया जाएगा। इसके बाद समूह की महिलाएं पौधों की बिक्री कर नर्सरी की देखभाल करेंगी।
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गांवों के चयन की प्रक्रिया तेज
जिले के सभी ब्लॉकों में नर्सरी के लिए गांवों के चयन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। वित्तीय वर्ष के समाप्त होते-होते सभी गांवों का चयन पूरा कर लिया जाएगा। नर्सरी के लिए मजदूरी का भुगतान मनरेगा से किया जाएगा।
शासन की तरफ से गांवों में नर्सरी योजना शुरू की गई है। जिले के दसों ब्लॉक में दो-दो गांव चयन की प्रक्रिया चल रही है। गांवों का चयन करके समूह की महिलाओं की तरफ से नर्सरी तैयार कराई जाएगी। - शेषनाथ चौहान, डीसी मनरेगा, सोनभद्र।
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शासन की तरफ से प्रदेश के सभी जिलों में महिला समूहों के माध्यम से नर्सरी संचालन करने के लिए निर्देशित किया गया है। इसके पीछे सरकार का उद्देश्य है ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना। जब महिलाएं आर्थिक रूप से संपन्न होंगी तो परिवार के साथ ही देश की तरक्की होगी। शासन के निर्देश के क्रम में जिले के सभी ब्लॉक म्योरपुर, बभनी, दुद्धी, कोन, चोपन, राबर्ट्सगंज, चतरा, नगवां, करमा और घोरावल ब्लॉक में दो- दो गांवों का चयन करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। गांवों के चयन की प्रक्रिया पूरी करके समूह की महिलाएं प्रशासन के सहयोग से फलदार एवं छायादार पौधों की नर्सरी तैयार करेंगी। समूह की महिलाओं को नर्सरी तैयार करने के लिए पहले प्रशासन की तरफ से पहले अनुदान दिया जाएगा। इसके बाद महिलाएं खुद के खर्च पर नर्सरी की देखभाल करेंगी और पौधों की बिक्री करके आमदनी कर सकेंगी।
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खुद की जमीन पर तैयार करनी होगी नर्सरी
अधिकारियों की मानें तो समूह की महिलाओं को खुद की जमीन पर नर्सरी तैयार करना होगा। प्रशासन की तरफ से जमीन नहीं दी जाएगी। पहली बार नर्सरी तैयार करने के लिए प्रशिक्षण व अनुदान दिया जाएगा। इसके बाद समूह की महिलाएं पौधों की बिक्री कर नर्सरी की देखभाल करेंगी।
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गांवों के चयन की प्रक्रिया तेज
जिले के सभी ब्लॉकों में नर्सरी के लिए गांवों के चयन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। वित्तीय वर्ष के समाप्त होते-होते सभी गांवों का चयन पूरा कर लिया जाएगा। नर्सरी के लिए मजदूरी का भुगतान मनरेगा से किया जाएगा।
शासन की तरफ से गांवों में नर्सरी योजना शुरू की गई है। जिले के दसों ब्लॉक में दो-दो गांव चयन की प्रक्रिया चल रही है। गांवों का चयन करके समूह की महिलाओं की तरफ से नर्सरी तैयार कराई जाएगी। - शेषनाथ चौहान, डीसी मनरेगा, सोनभद्र।