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सीआईएल का गौरव है एनसीएल-एमसीएल
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एनटीपीसी रिहंद में ऊर्जा संरक्षण के प्रतिभागियों को पुरस्कार देते अतिथिगण।
- फोटो : SONBHADRA
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एनसीएल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस के समापन पर मुख्य अतिथि सीएमडी एनसीएल प्रभात कुमार सिन्हा ने एनसीएल और एमसीएल को कोल इंडिया लिमिटेड का गौरव बताया। उन्होंने कहा कि विषम परिस्थितियों में दोनों कंपनियां ऊर्जा आवश्यकता के अनुरूप पचास फीसदी कोयले का प्रेषण कर रहीं हैं।
नार्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) और महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) को कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) का गौरव बताते हुए उन्होंने कहा कि एनसीएल व एमसीएल का सीआईएल के कुल कोयला प्रेषण में पचास प्रतिशत हिस्सेदारी गर्व की अनुभूति कराती है। उनका कहना था कि दोनों कंपनियों की टीम बधाई की पात्र हैं। इस मौके पर उन्होंने कहा कि हमें कोयला उद्योग के सतत विकास के लिए आधुनिक तकनीकी के इस्तेमाल व कोयले से जुड़े अन्य उत्पादों एवं कोयला उपयोग की नई विधियों की संभावनाओं को भी तलाशना होगा। उन्होंने कहा कि आइकॉम्स के दौरान प्राप्त शोध पत्रों व चर्चा के दौरान प्राप्त निष्कर्षों से एनसीएल सहित पूरे कोयला उद्योग को नई दिशा मिल रही है। उन्होंने विभिन्न अनुषंगी कंपनियों से आए हुए प्रतिभागियों से खदान भ्रमण कर एनसीएल की सर्वोत्तम खनन प्रथाओं का अवलोकन करने का भी आह्वान किया। समापन समारोह के दौरान भूतपूर्व उप खान सुरक्षा महानिदेशक राकेश कुलश्रेष्ठ, भूतपूर्व निदेशक एनएन ठाकुर, सीएमपीडीआई व सीसीएल के निदेशक (तकनीकी) एसके गोमस्ता, एमसीएल के निदेशक ओपी सिंह, डॉ. अनिंद्य सिन्हा, राम नारायण दुबे, एसएस सिन्हा, जेपी द्विवेदी, आईआईटी बीएचयू के प्रोप़ीयूष राय आदि रहे।
मेधावियों को किया सम्मानित
शक्तिनगर। इस दौरान उत्कृष्ट शोध पत्रों व नवाचार के लिए ‘युवा वैज्ञानिक पुरस्कार’, नवाचार के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शोधार्थियों को ‘बडिंग इनोवेटर्स अवार्ड’ और सर्वश्रेष्ठ एग्जीबिटर्स को पुरस्कृत किया गया। ‘आइकॉम्स’ के दूसरे दिन आयोजित तकनीकी सेशन में ‘क्या हम एक सतत भविष्य के लिए तैयार हैं?’, ‘खनन उद्योग से संबंधित चुनौतियों से निपटने की तैयारी’ और ‘समसामयिक खनन चुनौतियों के लिए समग्र दृष्टिकोण’ जैसी महत्वपूर्ण थीम पर विस्तृत चर्चा हुई।
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नार्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) और महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) को कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) का गौरव बताते हुए उन्होंने कहा कि एनसीएल व एमसीएल का सीआईएल के कुल कोयला प्रेषण में पचास प्रतिशत हिस्सेदारी गर्व की अनुभूति कराती है। उनका कहना था कि दोनों कंपनियों की टीम बधाई की पात्र हैं। इस मौके पर उन्होंने कहा कि हमें कोयला उद्योग के सतत विकास के लिए आधुनिक तकनीकी के इस्तेमाल व कोयले से जुड़े अन्य उत्पादों एवं कोयला उपयोग की नई विधियों की संभावनाओं को भी तलाशना होगा। उन्होंने कहा कि आइकॉम्स के दौरान प्राप्त शोध पत्रों व चर्चा के दौरान प्राप्त निष्कर्षों से एनसीएल सहित पूरे कोयला उद्योग को नई दिशा मिल रही है। उन्होंने विभिन्न अनुषंगी कंपनियों से आए हुए प्रतिभागियों से खदान भ्रमण कर एनसीएल की सर्वोत्तम खनन प्रथाओं का अवलोकन करने का भी आह्वान किया। समापन समारोह के दौरान भूतपूर्व उप खान सुरक्षा महानिदेशक राकेश कुलश्रेष्ठ, भूतपूर्व निदेशक एनएन ठाकुर, सीएमपीडीआई व सीसीएल के निदेशक (तकनीकी) एसके गोमस्ता, एमसीएल के निदेशक ओपी सिंह, डॉ. अनिंद्य सिन्हा, राम नारायण दुबे, एसएस सिन्हा, जेपी द्विवेदी, आईआईटी बीएचयू के प्रोप़ीयूष राय आदि रहे।
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मेधावियों को किया सम्मानित
शक्तिनगर। इस दौरान उत्कृष्ट शोध पत्रों व नवाचार के लिए ‘युवा वैज्ञानिक पुरस्कार’, नवाचार के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शोधार्थियों को ‘बडिंग इनोवेटर्स अवार्ड’ और सर्वश्रेष्ठ एग्जीबिटर्स को पुरस्कृत किया गया। ‘आइकॉम्स’ के दूसरे दिन आयोजित तकनीकी सेशन में ‘क्या हम एक सतत भविष्य के लिए तैयार हैं?’, ‘खनन उद्योग से संबंधित चुनौतियों से निपटने की तैयारी’ और ‘समसामयिक खनन चुनौतियों के लिए समग्र दृष्टिकोण’ जैसी महत्वपूर्ण थीम पर विस्तृत चर्चा हुई।

एनसीएल में आयोजित आइकाम्स के समापन पर संबोधित करते सीएमडी पीके सिन्हा- फोटो : SONBHADRA
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