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Sonebhadra News: एनसीएल कर्मी से 2.27 करोड़ रुपये की साइबर ठगी
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एनसीएल कर्मचारी से 2.27 करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। शेयर मार्केट में निवेश कर बड़ा मुनाफा कमाने का झांसा देकर उससे यह रुपये ठगे गए। पीड़ित की तहरीर पर साइबर थाने में मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
एनसीएल के बीना कोयला क्षेत्र में बतौर फोरमैन तैनात वाईके तिवारी के मुताबिक इसी साल जनवरी में मोबाइल पर आए एक मेसेज के जरिए वह प्रलोभन में आया। इसके बाद एक एप में पंजीकरण के साथ निवेश का सिलसिला शुरू हुआ।
पहले छोटे निवेश के बदले कर्मचारी को बड़ा लाभ दिया गया। इसके बाद कर्मी ने अधिक पैसा कमाने के चक्कर में खुद व रिश्तेदारों के साथ दोस्त मित्रों से लाखों रुपये लेकर निवेश कर दिया। कंपनी के नियम मुताबिक जब निवेश के बदले दो करोड़ 27 लाख रुपये देने की बारी आई तो फ्राॅड जीएसटी, इनकम टैक्स आदि का हवाला देकर कुछ दिन पीड़ित को गुमराह करते रहे।
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जब रकम प्राप्त करने के लिए पीड़ित अड़ गया तो तब जालसाजों ने बातचीत का तरीका बदल दिया और बेरुखी दिखाने लगे। तब कर्मचारी को ठगी का एहसास हुआ। इस संदर्भ साइबर थाने के प्रभारी राजेश सिंह ने बताया कि पीड़ित ने 2.27 करोड़ रुपये ठगी की बात कही है। मामले में केस दर्ज कर लिया गया है। जांच के बाद धनराशि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
24 बार में जमा किए थे 2.27 करोड़ रुपये
साइबर ठगों के शिकार बने एनसीएल कर्मी ने कुल 24 बार में 2.27 करोड़ रुपये जमा किए थे। पीड़ित के मुताबिक व्हाट्सएप पर लिंक आया था, जिसके माध्यम से उसने शेरखान एज ट्रेडिंग एप डाउनलोड किया। इस पर उसने अपने और भतीजी के नाम से डिमेट खाता खोलवाया। दो व्हाट्सएप नंबरों से उन्हें मेसेज आता था और आईपीओ खरीदने के निर्देश दिए जाते थे। उनकी सलाह पर जब वह आईपीओ में निवेश करता तो उसके डिमेट खाते में पैसा जमा होता गया। शुरुआत में कुछ पैसे मिले, जिससे उसका विश्वास बढ़ता गया। इसके बाद 13 जनवरी से 31 मार्च के बीच उसने 14 बार में 1.45 करोड़ और भतीजी ने दस बार में 81 लाख रुपये जमा किए। कुल 2.27 करोड़ रुपये जमा होने के बाद उनसे सर्विस टैक्स व अन्य चार्ज के नाम पर भी रुपये जमा कराए गए। यह कहा गया था कि टैक्स जमा करने के बाद वह रुपये निकाल सकेंगे। बाद में खाता संख्या गलत बताकर सत्यापन के नाम पर 68 लाख रुपये और मांगे जाने लगे। तब उसे ठगी का अहसास हुआ।
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एनसीएल के बीना कोयला क्षेत्र में बतौर फोरमैन तैनात वाईके तिवारी के मुताबिक इसी साल जनवरी में मोबाइल पर आए एक मेसेज के जरिए वह प्रलोभन में आया। इसके बाद एक एप में पंजीकरण के साथ निवेश का सिलसिला शुरू हुआ।
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पहले छोटे निवेश के बदले कर्मचारी को बड़ा लाभ दिया गया। इसके बाद कर्मी ने अधिक पैसा कमाने के चक्कर में खुद व रिश्तेदारों के साथ दोस्त मित्रों से लाखों रुपये लेकर निवेश कर दिया। कंपनी के नियम मुताबिक जब निवेश के बदले दो करोड़ 27 लाख रुपये देने की बारी आई तो फ्राॅड जीएसटी, इनकम टैक्स आदि का हवाला देकर कुछ दिन पीड़ित को गुमराह करते रहे।
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जब रकम प्राप्त करने के लिए पीड़ित अड़ गया तो तब जालसाजों ने बातचीत का तरीका बदल दिया और बेरुखी दिखाने लगे। तब कर्मचारी को ठगी का एहसास हुआ। इस संदर्भ साइबर थाने के प्रभारी राजेश सिंह ने बताया कि पीड़ित ने 2.27 करोड़ रुपये ठगी की बात कही है। मामले में केस दर्ज कर लिया गया है। जांच के बाद धनराशि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
24 बार में जमा किए थे 2.27 करोड़ रुपये
साइबर ठगों के शिकार बने एनसीएल कर्मी ने कुल 24 बार में 2.27 करोड़ रुपये जमा किए थे। पीड़ित के मुताबिक व्हाट्सएप पर लिंक आया था, जिसके माध्यम से उसने शेरखान एज ट्रेडिंग एप डाउनलोड किया। इस पर उसने अपने और भतीजी के नाम से डिमेट खाता खोलवाया। दो व्हाट्सएप नंबरों से उन्हें मेसेज आता था और आईपीओ खरीदने के निर्देश दिए जाते थे। उनकी सलाह पर जब वह आईपीओ में निवेश करता तो उसके डिमेट खाते में पैसा जमा होता गया। शुरुआत में कुछ पैसे मिले, जिससे उसका विश्वास बढ़ता गया। इसके बाद 13 जनवरी से 31 मार्च के बीच उसने 14 बार में 1.45 करोड़ और भतीजी ने दस बार में 81 लाख रुपये जमा किए। कुल 2.27 करोड़ रुपये जमा होने के बाद उनसे सर्विस टैक्स व अन्य चार्ज के नाम पर भी रुपये जमा कराए गए। यह कहा गया था कि टैक्स जमा करने के बाद वह रुपये निकाल सकेंगे। बाद में खाता संख्या गलत बताकर सत्यापन के नाम पर 68 लाख रुपये और मांगे जाने लगे। तब उसे ठगी का अहसास हुआ।