नगर पंचायत कार्यालय में सेटिंग हो तो कोई भी काम आसानी से हो सकता है, फिर कोई प्रमाण पत्र ही क्यों न हासिल करना हो। नगर पंचायत कर्मचारी बिना जांचे-परखे ही प्रमाण पत्र जारी कर देते हैं। जिंदा महिला का मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने का मामला इसकी नजीर है। पूरे मामले में नगर पंचायत कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है। फिलहाल पुलिस महिला के पति समेत पांच लोगों के विरुद्ध केस दर्ज कर छानबीन में जुटी है। नगर के वार्ड नंबर 10 निवासी रवींद्र कुमार ने एक वर्ष पहले अपनी पत्नी रंजना का मृत्यु प्रमाण पत्र नगर पंचायत कार्यालय से बनवाया था। सभासद ने इसे प्रमाणित किया और फिर नगर पंचायत कर्मचारियों ने आंख मूंदकर इस पर मुहर लगा दी। ईओ के दस्तखत से प्रमाण पत्र जारी हो गया। मामले का खुलासा तब हुआ जब रवींद्र कुमार ने इस प्रमाण पत्र के आधार पर पत्नी रंजना का बीमा क्लेम पाने के लिए दावा पेश किया। निजी बीमा कंपनी के अधिकारी इसकी जांच के लिए रंजना के मायके प्रयागराज पहुंचे तो सच्चाई जानकर अवाक रह गए। रंजना जीवित है। पति और ससुरालवालों ने उसे डेढ़ वर्ष पहले दहेज के लिए उत्पीड़ित करते हुए घर से निकालकर मायके पहुंचा दिया था। तब से वहीं रह रही थी। आरोप है कि पति ने इस दौरान दूसरी शादी भी कर ली। मामला संज्ञान में आने के बाद रंजनी ने बुधवार को चोपन थाने में तहरीर दी। इसके आधार पर पुलिस ने पति रवींद्र कुमार, सास, ननद, बहनोई और पति के दोस्त पर जालसाजी, दहेज उत्पीड़न सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है। उधर, नगर पंचायत के कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। एसओ नवीन तिवारी का कहना है कि महिला की तहरीर पर केस दर्ज कर छानबीन की जा रही है। मामले में जो भी दोषी होगा, उसके विरुद्ध् सख्त कार्रवाई की जाएगी।