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नगर पालिका कंगाल, मत पूछो विकास का हाल
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सोनभद्र। जिले की इकलौती नगर पालिका परिषद सोनभद्र (राबर्ट्सगंज) धन के अभाव से जूझ रही है। शासन की ओर से नगर पालिका को राज्य वित्त आयोग से मिलने वाली धनराशि में कटौती कर दी गई है। इससे कई कार्य प्रभावित हो रहे हैं। आय के नए स्रोत भी विकसित नहीं हो पाए हैं। धन मिलने से कर्मचारियों का वेतन भुगतान मुश्किल से हो पा रहा है लेकिन विकास के कार्य नहीं हो पा रहा है। इससे दिक्कतें आ रही है।
कोरोना काल में एक तरफ जहां निजी संस्थान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, वहीं सरकारी संस्थानों के पास भी धन की कमी हो गई है। धन की कमी के चलते कई कार्य प्रभावित होने लगे हैं। राज्य वित्त आयोग से नगर पालिका परिषद को मिलने वाले धन में भी कमी आई है। नगर पालिका के कर्मचारियों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2019-20 के सापेेक्ष वर्ष 2020-2021 में लगभग चार करोड़ रुपये राज्य वित्त आयोग से कम मिले हैं। राज्य वित्त से नगर पालिका को पहले हर महीने करीब 78 लाख रुपये यानी एक वर्ष में करीब नौ करोड़ 36 लाख रुपये मिलते थे लेकिन कोरोना काल में राज्य वित्त आयोग से मिलने वाली धनराशि में करीब चार करोड़ रुपये की कटौती कर दी गई। इस समय राज्य वित्त आयोग से 47 लाख रुपये प्रति माह धनराशि मिल रही है। पूरे साल का जोड़े तो यह धनराशि पांच करोड़ 64 लाख हुई। राज्य वित्त से हर माह मिलने वाले 47 लाख रुपये में से 46 लाख रुपये सरकारी, संविदा व आउट सोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन, एरियर व पेंशन के भुगतान पर खर्च हो जा रहा है। अन्य खर्च नगर पालिका प्रशासन को अपने निजी स्रोतों से करना पड़ रहा है। शासन से पर्याप्त धनराशि न मिलने के कारण नगरीय क्षेत्र में अन्य विकास कार्य भी नहीं हो पा रहा है।
राज्य वित्त में कटौती होने के कारण वाहनों के डीजल सहित अन्य खर्च के भुगतान में परेशानी हो रही है। राज्य वित्त से होने वाले कई कार्यों को बोर्ड फंड से कराना पड़ रहा है। इससे विकास से जुड़े कार्य प्रभावित हो रहे हैं। - प्रदीप गिरि, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद सोनभद्र।
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कोरोना काल में एक तरफ जहां निजी संस्थान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, वहीं सरकारी संस्थानों के पास भी धन की कमी हो गई है। धन की कमी के चलते कई कार्य प्रभावित होने लगे हैं। राज्य वित्त आयोग से नगर पालिका परिषद को मिलने वाले धन में भी कमी आई है। नगर पालिका के कर्मचारियों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2019-20 के सापेेक्ष वर्ष 2020-2021 में लगभग चार करोड़ रुपये राज्य वित्त आयोग से कम मिले हैं। राज्य वित्त से नगर पालिका को पहले हर महीने करीब 78 लाख रुपये यानी एक वर्ष में करीब नौ करोड़ 36 लाख रुपये मिलते थे लेकिन कोरोना काल में राज्य वित्त आयोग से मिलने वाली धनराशि में करीब चार करोड़ रुपये की कटौती कर दी गई। इस समय राज्य वित्त आयोग से 47 लाख रुपये प्रति माह धनराशि मिल रही है। पूरे साल का जोड़े तो यह धनराशि पांच करोड़ 64 लाख हुई। राज्य वित्त से हर माह मिलने वाले 47 लाख रुपये में से 46 लाख रुपये सरकारी, संविदा व आउट सोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन, एरियर व पेंशन के भुगतान पर खर्च हो जा रहा है। अन्य खर्च नगर पालिका प्रशासन को अपने निजी स्रोतों से करना पड़ रहा है। शासन से पर्याप्त धनराशि न मिलने के कारण नगरीय क्षेत्र में अन्य विकास कार्य भी नहीं हो पा रहा है।
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राज्य वित्त में कटौती होने के कारण वाहनों के डीजल सहित अन्य खर्च के भुगतान में परेशानी हो रही है। राज्य वित्त से होने वाले कई कार्यों को बोर्ड फंड से कराना पड़ रहा है। इससे विकास से जुड़े कार्य प्रभावित हो रहे हैं। - प्रदीप गिरि, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद सोनभद्र।
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