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Sonebhadra News: आरटीई पोर्टल पर ही नहीं है डेढ़ सौ से अधिक निजी स्कूल

Fri, 19 May 2023 09:31 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 19 May 2023 09:31 PM IST
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More than 150 private schools are not on the RTE portal
सोनभद्र। जिले में अनिवार्य शिक्षा अधिनियम (आरटीई) के तहत स्कूलों के रजिस्ट्रेशन में जमकर मनमानी की गई है। इस कारण प्रत्येक वर्ष हजारों बच्चे योजना के लाभ से वंचित हो रहे हैं।
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आरटीई के तहत निजी स्कूलों में कुल संख्या के सापेक्ष 25 फीसदी सीटों पर गरीब वर्ग के बच्चों का प्रवेश होना है। पहले चरण में छह से 28 फरवरी के बीच कुल 1176 आवेदन आए। इनमें से विभिन्न कारणों से आधे से भी कम 455 बच्चों को लाटरी के जरिए चयनित किया गया। द्वितीय चरण में 14 मार्च से छह अप्रैल के बीच कुल 647 आवेदन मिले। सत्यापन और ऑनलाइन लाटरी में 301 बच्चों को ही स्कूलों का आवंटन किया गया। तीसरे चरण की प्रक्रिया जारी है। हालांकि इस मामले में विभागीय लापरवाही से बड़ी संख्या में ऐसे स्कूल हैं, जहां कम सीटें दिखाकर बच्चों को दाखिले से वंचित कर दिया जा रहा है। इसका प्रमुख कारण यह भी है कि इन स्कूलों में शासन से आरटीई के तहत दाखिला कराने वाले बच्चों की फीस से अधिक फीस स्कूलों की है। इससे इतर विभाग के बाबुओं की कारगुजारी से हजारों छात्रों को अपने इलाकों में स्कूल ही नहीं मिल पा रहे हैं।
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विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में एक से आठ तक के बीच करीब 460 निजी स्कूलों को बेसिक शिक्षा विभाग ने मान्यता प्रदान किया है, जबकि महज 194 स्कूल ही आरटीई के पोर्टल पर मौजूद हैं। जिम्मेदारों का तर्क है कि करीब सौ स्कूल कक्षा छह से आठ तक हैं। जहां एक से कक्षाएं न होने से उन्हें शामिल नहीं किया जा सकता है। अगर इन बातों को सही मान लें तो इसके अतिरिक्त भी जिले में डेढ़ सौ से अधिक स्कूल ऐसे में जो मानक को को पूरा करने के बाद भी आरटीई के पोर्टल में शामिल नहीं हैं।
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जांच में सामने आएगी मनमानी
उच्च स्तर पर राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने शासन को पत्र लिखा है। समीक्षा में कई स्कूल दो बार पोर्टल पर दर्ज हैं तो कई इससे छूटे हुए हैं। स्कूलों का पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन ही नहीं है। ऐसे में शासन ने प्रदेश भर में ऐसे मामलों की समीक्षा कराने का निर्णय लिया है। ऐसे में आरटीई दाखिले से बचने के लिए पोर्टल पर दर्ज तमाम विद्यालयों को बंद दिखाए जाना भारी पड़ सकता है। जिला स्तर पर निजी स्कूलों की पोर्टल पर मैपिंग कराने की जिम्मेदारी बीएसए की है। उनके स्तर से क्या कमियां रहीं, विभाग इसकी समीक्षा करेगा।

यह मिलता है लाभ
आरटीई में दाखिला पाने वाले गरीब वर्ग के छात्र-छात्राओं को पाठ्य पुस्तकों, अभ्यास पुस्तिकाओं, व यूनिफार्म के लिए प्रति विद्यार्थी 5000 रुपये सरकार देती है। स्कूलों को 450 रुपये प्रतिमाह की दर से 5400 रुपये वार्षिक भुगतान किया जाता है। आरटीई एक्ट के तहत निजी स्कूलों को कक्षा की कुल सीटों का एक-चौथाई आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य है।
योजना के तहत पोर्टल पर छूटे स्कूलों को भी दर्ज किया जाएगा। आगे शासन से जो भी निर्देश मिलेंगे। उन्हें लागू कराया जाएगा। - हरिवंश कुमार, बीएसए।
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