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धन पर्याप्त, समय समाप्त, 64 करोड़ किया सरेंडर

Sat, 02 Apr 2022 11:45 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 02 Apr 2022 11:45 PM IST
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Money enough, time expired, 64 crore surrendered
सोनभद्र। धन होने के बावजूद कई विभागों ने जनहित में काम कराने में दिलचस्पी नहीं ली। जिले में वित्तीय वर्ष 2021-2022 में खर्च के लिए आए करीब 13 अरब 23 करोड़ रुपये में से लगभग 64 करोड़ का बजट सरेंडर कर दिया गया। यह राशि जिला कोषागार के जरिए राजकीय कोष को समर्पित की गई है। यह वह धनराशि है, जिसे विभिन्न विभाग 31 मार्च तक खर्च नहीं कर पाए हैं। अब नए वित्तीय वर्ष में वेतन, निर्माण कार्य एवं सामग्री खरीद को बजट की मांग-आवंटन की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
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प्रत्येक वित्तीय वर्ष के शुरुआत से अंत तक शासन की तरफ से विभिन्न विभागों को बजट आवंटन और विभागों की तरफ से उसके खर्च की प्रक्रिया अपनाई जाती रहती है। मार्च के आखिरी दिन जो बजट खर्च होने से शेष रह जाता है उसे सरेंडर कर नए सिरे से बजट की मांग-आवंटन की प्रक्रिया शुुुुुरू की जाती है। सरकार से मिलने वाले बजट से अधिकारियों कर्मचारियों का वेतन, विभिन्न विकास कार्य, कल्याणकारी कार्यक्रमों का संचालन तथा सामग्रियों की खरीद आदि की जाती है।
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जानकारी के अनुसार पिछले वित्तीय वर्ष में जिले को करीब 13 अरब 23 करोड रुपए का बजट प्राप्त हुआ था जिसमें से लगभग 12 अरब 60 करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए। वहीं लगभग 64 करोड़ का बजट खर्च नहीं हो पाया, जिसे 31 मार्च की रात जिला कोषागार के जरिए राजकीय कोष में सरेंडर कर दिया गया। ट्रेजरी से मिली जानकारी के अनुसार पुलिस महकमे की तरफ से 14.5 करोड़, बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से 9.93 करोड़, माध्यमिक शिक्षा विभाग की तरफ से 5.36 करोड़, स्वास्थ्य विभाग ऐलोपैथिक की तरफ से 3.82 करोड़, राजस्व विभाग की तरफ से 3.79 करोड़, चिकित्सा परिवार कल्याण विभाग की तरफ से 2.87 करोड़, सिंचाई विभाग की तरफ से 2.66 करोड़, आपदा राहत विभाग की तरफ से 2.47 करोड़, समाज कल्याण विभाग 2.31 करोड़, वन विभाग 1.90 करोड़, इसी तरह अन्य विभागों की तरफ से भी अवशेष बजट को सरेंडर किया गया है। इसकी पुष्टि वरिष्ठ कोषाधिकारी अजय सिंह ने की है। उन्होंने बताया कि विभिन्न विभागों की तरफ से लगभग 64 करोड़ का बजट सरेंडर किया गया है।
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कुंडली मारकर बैठा रहा शिक्षा विभाग
सोनभद्र। शिक्षा विभाग और पंचायती राज विभाग को कायाकल्प के तहत जिले के 2061 परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में रंगरोगन, शौचालय, टाइलिंग आदि का कार्य कराना है। लेकिन कई ग्राम पंचायतों ने धन की कमी होने की बात कहते हुए सैकड़ों स्कूलों में कायाकल्प का काम पूर्ण नहीं कराया है। वहीं शिक्षा विभाग करोड़ों रुपये पर कुंडली मारकर बैठा रहा। पर्याप्त धन होने के बाद भी करमा ब्लॉक बहोरिका गांव में जर्जर हालत पहुंचे प्राथमिक विद्यालय की मरम्मत तक नहीं कराया। यहीं हाल कई स्कूलों का है। धन होने के बाद स्कूलों का मरम्मत न कराना संबंधित अधिकारियों के कार्य प्रणाली की पोल खोल रही है। बेसिक शिक्षा विभाग ने 31 मार्च को करीब नौ करोड़ 93 लाख सरेंडर कर दिया।
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