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Sonebhadra News: खनन कारोबारी इश्तियाक की जमानत अर्जी खारिज
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सिविल जज सीनियर डिवीजन/फास्ट ट्रैक कोर्ट रवि रंजन मिश्रा की अदालत ने शुक्रवार को जमानत के मसले पर सुनवाई करते हुए खनन कारोबारी इश्तियाक खान की अर्जी खारिज कर दी। व्यापारिक साझीदार ने कारोबारी पर कूटरचित दस्तावेज के इस्तेमाल और लाभांश के गबन का आरोप लगाया है। न्यायालय ने आरोपों को गंभीर और आजीवन कारावास से दंडनीय पाते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी।
ओबरा थाना क्षेत्र के बिल्ली-मारकुंडी निवासी सुधीर कुमार श्रीवास्तव उर्फ गणेश के प्रार्थना पत्र पर 12 जुलाई 2025 को इश्तियाक खान के खिलाफ ओबरा थाने में कूटरचना, धोखाधड़ी और गबन की प्राथमिकी दर्ज की गई थी। आरोप था कि उन्होंने भरोसे का फायदा उठाते हुए खनन साझीदार रिंकी श्रीवास्तव की जगह फर्म मेसर्स राधिका इंडस्ट्रीज के नाम का इस्तेमाल किया और इसकी आड़ में कई कूटरचित दस्तावेज प्रयोग में लाने के साथ लाभांश में हेराफेरी की।
विवेचना के दौरान पुलिस की तरफ से दावा किया गया कि ऐसे कुछ चेक पाए गए हैं जिन पर इश्तियाक ने रिंकी के फर्जी हस्ताक्षर करते हुए इस्तेमाल किया। हालांकि बचाव पक्ष की दलील थी कि जिन चेकों पर फर्जी हस्ताक्षर किए गए, उन चेकों की संख्या और उसके जरिये निकाली गई धनराशि का ब्योरा नहीं दिया गया है। यह भी तर्क दिया गया है कि प्रकरण साझेदारी का है। कुल पांच पार्टनर हैं, लेकिन शिकायत सिर्फ एक पार्टनर की है। इसलिए इस पर सिविल संहिता की व्यवस्थाएं लागू होती हैं।
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वहीं अभियोजन की तरफ से सहायक अभियोजन अधिकारी दिलीप श्रीवास्तव ने पुलिस और वादी का पक्ष रखा। कहा कि आरोपी ने कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल किया है। साझेदारी के शर्तों के उल्लंघन के साथ कई ऐसी गतिविधियां अंजाम दी हैं, जो गंभीर अपराध के दायरे में आती हैं। यह भी दावा किया गया है कि पीड़ित की तरफ से जिस तरह के आरोप लगाए गए हैं, वह आजीवन कारावास तक से दंडनीय हैं। न्यायालय ने कहा कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं ही, ऐसे अपराधों में आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। इसलिए फिलहाल जमानत अर्जी स्वीकार नहीं की जा सकती।
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ओबरा थाना क्षेत्र के बिल्ली-मारकुंडी निवासी सुधीर कुमार श्रीवास्तव उर्फ गणेश के प्रार्थना पत्र पर 12 जुलाई 2025 को इश्तियाक खान के खिलाफ ओबरा थाने में कूटरचना, धोखाधड़ी और गबन की प्राथमिकी दर्ज की गई थी। आरोप था कि उन्होंने भरोसे का फायदा उठाते हुए खनन साझीदार रिंकी श्रीवास्तव की जगह फर्म मेसर्स राधिका इंडस्ट्रीज के नाम का इस्तेमाल किया और इसकी आड़ में कई कूटरचित दस्तावेज प्रयोग में लाने के साथ लाभांश में हेराफेरी की।
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विवेचना के दौरान पुलिस की तरफ से दावा किया गया कि ऐसे कुछ चेक पाए गए हैं जिन पर इश्तियाक ने रिंकी के फर्जी हस्ताक्षर करते हुए इस्तेमाल किया। हालांकि बचाव पक्ष की दलील थी कि जिन चेकों पर फर्जी हस्ताक्षर किए गए, उन चेकों की संख्या और उसके जरिये निकाली गई धनराशि का ब्योरा नहीं दिया गया है। यह भी तर्क दिया गया है कि प्रकरण साझेदारी का है। कुल पांच पार्टनर हैं, लेकिन शिकायत सिर्फ एक पार्टनर की है। इसलिए इस पर सिविल संहिता की व्यवस्थाएं लागू होती हैं।
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वहीं अभियोजन की तरफ से सहायक अभियोजन अधिकारी दिलीप श्रीवास्तव ने पुलिस और वादी का पक्ष रखा। कहा कि आरोपी ने कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल किया है। साझेदारी के शर्तों के उल्लंघन के साथ कई ऐसी गतिविधियां अंजाम दी हैं, जो गंभीर अपराध के दायरे में आती हैं। यह भी दावा किया गया है कि पीड़ित की तरफ से जिस तरह के आरोप लगाए गए हैं, वह आजीवन कारावास तक से दंडनीय हैं। न्यायालय ने कहा कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं ही, ऐसे अपराधों में आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। इसलिए फिलहाल जमानत अर्जी स्वीकार नहीं की जा सकती।