{"_id":"5fbfe82e8ebc3e9bbf6b4d61","slug":"memorandum-submitted-to-sdm-forest-rights-law-is-not-being-followed-at-the-ground-level-sonbhadra-news-vns560283055","type":"story","status":"publish","title_hn":"वनाधिकार कानून का जमीनी स्तर पर नहीं हो रहा पालन, एसडीएम को सौंपा ज्ञापन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वनाधिकार कानून का जमीनी स्तर पर नहीं हो रहा पालन, एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
विज्ञापन
घोरावल। आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के कार्यकर्ताओं ने बृहस्पतिवार को एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। आरोप लगाया कि वनाधिकार कानून के तहत जमा दावों की जिला प्रशासन द्वारा कराई जा रही जांच में अनियमितता हो रही है।
फ्रंट के जिला संयोजक कांता कोल और मजदूर किसान मंच के प्रभारी श्रीकांत सिंह ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि घोरावल में सत्तारूढ़ दल के नेताओं के इशारे पर कोल समुदाय के लोगों पर शांति भंग का मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है। उन्हें उजाड़ने की कोशिश हो रही है। इस पर रोक लगाई जाए। नेताओं ने प्रदेश सरकार के सूचना और शासनादेशों के अनुरूप कोल को वनाधिकार कानून में जनजाति का लाभ प्रदान करने की भी मांग की है। कहा कि वनाधिकार कानून के अनुपालन में नियमों व कानूनों का पालन जमीनी स्तर पर नहीं किया जा रहा है। परसौना गांव का उदाहरण देते हुए कहा कि इस गांव में गौड़ जैसी आदिवासी समुदाय के लोग पुश्तैनी रूप से वन भूमि पर काबिज हैं। इसके पर्याप्त प्रमाण उनके पास हैं, लेकिन मौके पर गए क्षेत्रीय लेखपाल द्वारा वनाधिकार कानून के नियमों के अनुसार न तो स्थलीय निरीक्षण किया गया और न ही किसी भी दावेदार को निरीक्षण के संबंध में कोई भी लिखित सूचना दी गई। कोल समुदाय के लोगों पर शांतिभंग का मुकदमा कराकर उन्हें पुश्तैनी जमीन से उजाड़ने की लगातार कोशिश की जा रही है। आईपीएफ नेता दिनकर कपूर ने इस संबंध में डीएम को ईमेल किया है। इस दौरान अमर सिंह गोंड़, सेवालाल कोल, संतलाल बैगा, केशनाथ मौर्या, राम दुलारे प्रजापति, सूरज कोल, लाल बहादुर गोड़, सुभाष भारती, विजय कोल, कैलाश चौहान, सुमारी पासी, छोटकी कोल, रूपलाल कोल, द्वारिका बिंद आदि ग्रामीण मौजूद रहे।
विज्ञापन
फ्रंट के जिला संयोजक कांता कोल और मजदूर किसान मंच के प्रभारी श्रीकांत सिंह ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि घोरावल में सत्तारूढ़ दल के नेताओं के इशारे पर कोल समुदाय के लोगों पर शांति भंग का मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है। उन्हें उजाड़ने की कोशिश हो रही है। इस पर रोक लगाई जाए। नेताओं ने प्रदेश सरकार के सूचना और शासनादेशों के अनुरूप कोल को वनाधिकार कानून में जनजाति का लाभ प्रदान करने की भी मांग की है। कहा कि वनाधिकार कानून के अनुपालन में नियमों व कानूनों का पालन जमीनी स्तर पर नहीं किया जा रहा है। परसौना गांव का उदाहरण देते हुए कहा कि इस गांव में गौड़ जैसी आदिवासी समुदाय के लोग पुश्तैनी रूप से वन भूमि पर काबिज हैं। इसके पर्याप्त प्रमाण उनके पास हैं, लेकिन मौके पर गए क्षेत्रीय लेखपाल द्वारा वनाधिकार कानून के नियमों के अनुसार न तो स्थलीय निरीक्षण किया गया और न ही किसी भी दावेदार को निरीक्षण के संबंध में कोई भी लिखित सूचना दी गई। कोल समुदाय के लोगों पर शांतिभंग का मुकदमा कराकर उन्हें पुश्तैनी जमीन से उजाड़ने की लगातार कोशिश की जा रही है। आईपीएफ नेता दिनकर कपूर ने इस संबंध में डीएम को ईमेल किया है। इस दौरान अमर सिंह गोंड़, सेवालाल कोल, संतलाल बैगा, केशनाथ मौर्या, राम दुलारे प्रजापति, सूरज कोल, लाल बहादुर गोड़, सुभाष भारती, विजय कोल, कैलाश चौहान, सुमारी पासी, छोटकी कोल, रूपलाल कोल, द्वारिका बिंद आदि ग्रामीण मौजूद रहे।
विज्ञापन