{"_id":"658ef0ba84fdd834640081b6","slug":"mandals-first-lab-established-in-sonbhadra-sonbhadra-news-c-194-1-svns1040-7621-2023-12-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sonebhadra News: पानी में आर्सेनिक की जांच के लिए सोनभद्र में मंडल का पहला लैब स्थापित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sonebhadra News: पानी में आर्सेनिक की जांच के लिए सोनभद्र में मंडल का पहला लैब स्थापित
विज्ञापन
सोनभद्र। पानी में आर्सेनिक की मात्रा है या नहीं, इसका पता लगाने के लिए अब लखनऊ तक की भागदौड़ नहीं करनी होगी। जिले में इसकी जांच शुरू कर दी गई है। परासी पांडेय स्थित जल निगम परिसर में प्रयोगशाला (लैब) स्थापित की गई है। आर्सेनिक जांच करने वाला यह मंडल का पहला लैब है। आधुनिक मशीनों के जरिए पानी में आर्सेनिक की जांच की जा सकेगी।
सोनांचल के करीब 259 गांवों में फ्लोराइड की मात्रा मानक से कई गुना ज्यादा मिली है। जल निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से पूर्व में कराई गई जांच में इसकी पुष्टि भी हुई है। कुछ इलाकों में आर्सेनिक के भी मामले आए थे। जल निगम के अधिकारियों की मानें तो सोनांचल में जब भी ग्रामीण पानी में आर्सेनिक की आशंका व्यक्त करते हैं तो जल निगम की तरफ से सैंपल लेकर लखनऊ भेजा जाता है। वहां से जांच रिपोर्ट आने में भी समय लगता था। इसे देखते हुए जल निगम ने जिले में ही आर्सेनिक की जांच के लिए लैब की स्थापना की है। इसे पिछले सप्ताह ही इंस्टाल कर चालू कर दिया गया है। पानी की गुणवत्ता की जांच कराने के लिए सभी सरकारी विभागों को पत्र भी जारी किया जा रहा है।
हर ब्लॉक से लिए जाएंगे सैंपल
भूजल में कई तरह के तत्व मौजूद हैं। खनिज प्रधान जिले के कई इलाकों में इन तत्वों की जरूरत से ज्यादा अधिकता लोगाें की सेहत को प्रभावित करता है। पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए लैब में हर ब्लॉक से सैंपल लाकर जांच की जाएगी। जिन गांव के सरकारी हैंडपंप या निजी हैंडपंप में आर्सेनिक की मात्रा अधिक मिलेगी, वहां के हैंडपंपों पर लाल निशान लगाया जाएगा। ग्राम पंचायत स्तर पर लोगों को इसके प्रति जागरूक भी किया जाएगा।
विज्ञापन
पानी में 18 प्रकार के तत्वों की हो सकेगी जांच
सदर ब्लॉक के परासी पांडेय स्थित जल निगम कार्यालय परिसर में बने प्रयोगशाला में अब कुल 18 प्रकार के तत्वों की जांच की होगी। प्रयोगशाला की केमिस्ट अनीता कुमारी के मुताबिक यहां पानी में ऑयरन, फ्लोराइड, नाइट्रेट, सल्फेट, हार्डनेस, पीएच, आर्सेनिक के साथ ही कुल 18 प्रकार के तत्वों की जांच करने की सुविधा है। जांच के बाद पता चल जाएगा कि पानी में किसी तत्व की अधिकता है और इसके सेवन करने चाहिए या नहीं।
परासी स्थित लैब के संचालन और देखरेख की सारी व्यवस्था पहले जल निगम की यूनिसेफ इकाई करता था। शासन के निर्देश पर 15 दिन पहले लैब का हैंडओवर जल निगम ग्रामीण इकाई को कर दिया गया है। अब लैब के संचालन और देख रेख की व्यवस्था वहीं करेगा। लैब में आर्सेनिक की जांच की सुविधा शुरू हो गई है। - शहनवाज अख्तर, एक्सईएन-जल निगम यूनिसेफ इकाई।
विज्ञापन
सोनांचल के करीब 259 गांवों में फ्लोराइड की मात्रा मानक से कई गुना ज्यादा मिली है। जल निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से पूर्व में कराई गई जांच में इसकी पुष्टि भी हुई है। कुछ इलाकों में आर्सेनिक के भी मामले आए थे। जल निगम के अधिकारियों की मानें तो सोनांचल में जब भी ग्रामीण पानी में आर्सेनिक की आशंका व्यक्त करते हैं तो जल निगम की तरफ से सैंपल लेकर लखनऊ भेजा जाता है। वहां से जांच रिपोर्ट आने में भी समय लगता था। इसे देखते हुए जल निगम ने जिले में ही आर्सेनिक की जांच के लिए लैब की स्थापना की है। इसे पिछले सप्ताह ही इंस्टाल कर चालू कर दिया गया है। पानी की गुणवत्ता की जांच कराने के लिए सभी सरकारी विभागों को पत्र भी जारी किया जा रहा है।
विज्ञापन
हर ब्लॉक से लिए जाएंगे सैंपल
भूजल में कई तरह के तत्व मौजूद हैं। खनिज प्रधान जिले के कई इलाकों में इन तत्वों की जरूरत से ज्यादा अधिकता लोगाें की सेहत को प्रभावित करता है। पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए लैब में हर ब्लॉक से सैंपल लाकर जांच की जाएगी। जिन गांव के सरकारी हैंडपंप या निजी हैंडपंप में आर्सेनिक की मात्रा अधिक मिलेगी, वहां के हैंडपंपों पर लाल निशान लगाया जाएगा। ग्राम पंचायत स्तर पर लोगों को इसके प्रति जागरूक भी किया जाएगा।
विज्ञापन
पानी में 18 प्रकार के तत्वों की हो सकेगी जांच
सदर ब्लॉक के परासी पांडेय स्थित जल निगम कार्यालय परिसर में बने प्रयोगशाला में अब कुल 18 प्रकार के तत्वों की जांच की होगी। प्रयोगशाला की केमिस्ट अनीता कुमारी के मुताबिक यहां पानी में ऑयरन, फ्लोराइड, नाइट्रेट, सल्फेट, हार्डनेस, पीएच, आर्सेनिक के साथ ही कुल 18 प्रकार के तत्वों की जांच करने की सुविधा है। जांच के बाद पता चल जाएगा कि पानी में किसी तत्व की अधिकता है और इसके सेवन करने चाहिए या नहीं।
परासी स्थित लैब के संचालन और देखरेख की सारी व्यवस्था पहले जल निगम की यूनिसेफ इकाई करता था। शासन के निर्देश पर 15 दिन पहले लैब का हैंडओवर जल निगम ग्रामीण इकाई को कर दिया गया है। अब लैब के संचालन और देख रेख की व्यवस्था वहीं करेगा। लैब में आर्सेनिक की जांच की सुविधा शुरू हो गई है। - शहनवाज अख्तर, एक्सईएन-जल निगम यूनिसेफ इकाई।