Sonbhadra: तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आकर तेंदुए की मौत, शव के साथ सेल्फी लेने लगे राहगीर
यूपी के सोनभद्र जिले में बुधवार देर रात तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आकर एक तेंदुए की मौत हो गई। घटना मारकुंडी घाटी में स्थित सोन इको पॉइंट पास उस समय हुई जब सड़क पार कर रहा था।
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यूपी के सोनभद्र जिले में बुधवार देर रात तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आकर एक तेंदुए की मौत हो गई। घटना मारकुंडी घाटी में स्थित सोन इको पॉइंट पास उस समय हुई जब सड़क पार कर रहा था। मौके से गुजर रहे राहगीरों ने पुलिस को सूचना देते हुए तेंदुए के शव के साथ सेल्फी लेने लगे। देखते ही देखते घटनास्थल पर भीड़ जमा हो गई। इस कारण थोड़ी देर के लिए आवागमन ठप हो गया।
गुरुवार को पोस्टमार्टम के बाद शव का दाह संस्कार कराया गया। एक माह के अंदर जिले में तेंदुए के मौत की दूसरी घटना से वन विभाग सकते हैं। वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग पर तेंदुए का शव पड़ा होने से राजमार्ग पर आवागमन बाधित हो गया। बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई। पहले तो लोग तेंदुआ जिंदा होने की आशंका में सहमे रहे, लेकिन मौत की पुष्टि के बाद पास पहुंचकर सूचना वन विभाग को दी।
वन्य जीव इकाई की टीम ने मौके पर पहुंचकर शव को सड़क से हटवाया और उसे चुर्क स्थित रेंज कार्यालय ले गए। यहां गुरुवार को डीएफओ अरविंद यादव की देखरेख में पोस्टमार्टम के बाद शव का दाह संस्कार किया गया। आशंका जताई जा रही है कि साथी की मौत के बाद अन्य तेंदुआ भी आबादी क्षेत्र में आकर नुकसान पहुंचा सकते हैं।
गणना में नहीं मिले तो फिर कहां से आ रहे तेंदुए
वन विभाग की ओर से प्रत्येक तीन वर्ष पर वन्य जीवों की गणना कराई जाती है। गत वर्ष अप्रैल-मई में गणना के दौरान वन विभाग की टीम को कैैमूर के जंगलों में कहीं भी तेंदुए की मौजूदगी के निशान नहीं मिले थे। इसी आधार पर विभाग ने कैैमूर के जंगलों में तेंदुआ न होने का दावा किया था। इसके कुछ माह बाद ही तेंदुए की मौत ने सबको सकते में डाल दिया है। कुछ दिन पहले भी म्योरपुर में एक तेंदुए को जाल में फंसाकर शिकारियों ने मार डाला था। तब भी वन विभाग ने जिले में तेंदुआ न होने की बात कही थी।
नदी में अवैध खनन से हुई तेंदुए की मौत
कैमूर वन्य जीव अभ्यारण्य में तेंदुए की मौत के लिए पीयूसीएल के प्रदेश सचिव विकास शाक्य एडवोकेट ने अवैध खनन को कारण बताया है। कहा कि अवैध खनन और सेंचुरी के बेहद करीब बफर जोन में भारी ट्रकों की आवाजाही से लगातार वन्य जीव प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से सोनभद्र में सेंचुरी एरिया के एक किमी दायरे को बफर जोर घोषित कर कई दिशा-निर्देश व मानक जारी किया है। सोन नदी में शिल्पी से गुरदह 20 किलोमीटर व पटवध से कन्हौरा 14 किलोमीटर कैमूर वन्य जीव विहार में है।
बीच के 11 किलोमीटर नदी क्षेत्र में कई बालू खनन पट्टे स्वीकृत कर दिए गए हैं। मानक को ध्यान में रखा जाता तो सोन नदी में पानी पीने और जलक्रीड़ा के लिए जाने वाले वन्य जीव नदी में ट्रकों की लंबी कतारों व ध्वनि प्रदूषण से आहत होकर के बेसुध सड़कों पर नहीं भागते। उन्होंने मामले की जांच कराकर पूर्व घोषित मानकों का पालन कराने की मांग की है।