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जैन धर्मावलंबी ने घरों में मनाया पर्युषण पर्व
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सोनभद्र। कोरोना वायरस की वजह से जिले में सामूहिक रूप से धार्मिक आयोजनों पर रोक है। महामारी की वजह से ही इस साल जैन धर्मावलंबी पर्युषण पर्व अपने घरों में मना रहे है। इस साल न तो दिल्ली से संत आए और न ही सामूहिक रूप से आराधना हो रही है।
जैन समाज के अध्यक्ष पवन कुमार जैन ने बताया कि इस साल पर्युषण पर्व 15 अगस्त से मनाया जा रहा है। 23 अगस्त को सुबह पर्युषण पर्व का समापन होगा। राबट्र्सगंज के दीपनगर स्थित जैन भवन में सामूहिक रूप से आराधना होती थी। लेकिन कोरोना की वजह से नियमों का पालन सख्ती से किया जा रहा है। सत्यपाल जैन ने बताया कि पर्युषण पर्व मनाने के लिए दिल्ली से हर साल दो संत आया करते थे, लेकिन इस वर्ष महामारी की वजह से वे नहीं आए। जिले में करीब 200 जैन धर्मावलंबी है जो अपने घरों में आराधना कर रहे है। उन्होंने बताया कि पर्युषण पर्व के दौरान लोग सूर्य अस्त होने के बाद भोजन नहीं करते है। अजय कुमार जैन ने बताया कि पर्युषण पर्व के दौरान पानी में पैर रखते समय भी संभाल कर रखा जाता है। पर्युषण महापर्व से पहले समाज के लोग किसी के भी दिल को जाने अनजाने में मन, वचन, एवं काया से ठेस पहुंचाई हो या कुछ अनुचित वचन बोला गया हो तो उसके लिए वे उससे क्षमा मांगते हैं।
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जैन समाज के अध्यक्ष पवन कुमार जैन ने बताया कि इस साल पर्युषण पर्व 15 अगस्त से मनाया जा रहा है। 23 अगस्त को सुबह पर्युषण पर्व का समापन होगा। राबट्र्सगंज के दीपनगर स्थित जैन भवन में सामूहिक रूप से आराधना होती थी। लेकिन कोरोना की वजह से नियमों का पालन सख्ती से किया जा रहा है। सत्यपाल जैन ने बताया कि पर्युषण पर्व मनाने के लिए दिल्ली से हर साल दो संत आया करते थे, लेकिन इस वर्ष महामारी की वजह से वे नहीं आए। जिले में करीब 200 जैन धर्मावलंबी है जो अपने घरों में आराधना कर रहे है। उन्होंने बताया कि पर्युषण पर्व के दौरान लोग सूर्य अस्त होने के बाद भोजन नहीं करते है। अजय कुमार जैन ने बताया कि पर्युषण पर्व के दौरान पानी में पैर रखते समय भी संभाल कर रखा जाता है। पर्युषण महापर्व से पहले समाज के लोग किसी के भी दिल को जाने अनजाने में मन, वचन, एवं काया से ठेस पहुंचाई हो या कुछ अनुचित वचन बोला गया हो तो उसके लिए वे उससे क्षमा मांगते हैं।
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