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आनंद के बदले लोगों को दुःख दे रहा चायनीज मंझा
अमर उजाला ब्यूरो, सोनभद्र
Updated Wed, 13 Jan 2016 12:00 AM IST
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मकर संक्रांति पर्व नजदीक आने के साथ ही जिले में तैयारियां तेज हो गई हैं। बाजारों में जहां लाई, ढूंडा, तिलकुट की दूकानों के साथ पतंग और मंझा की दूकानें सज गई हैं।
जबकि हाईकोर्ट ने चायनीज मंझा की बिक्री पर रोक लगाया है। हालांकि पुलिस अधीक्षक रामलाल वर्मा ने सभी थाना प्रभारियों को चायनिज मंझा की बिक्री करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करने का निर्देश जारी किया है। इसके बाद भी खुले आम चायनीज मंझा दूकानों में बिक रहा है।
मकर संक्रांति पर्व को देखते हुए राबर्ट्सगंज घोरावल, शाहगंज, रामगढ़, ओबरा, रेणुकूट, अनपरा, शक्तिनगर, दुद्धी, चोपन समेत अन्य कस्बों में पतंग और मंझा की दूकानें सज गई हैं।
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चंद रुपये की लालच में दूकानदार कोर्ट के आदेश का पालन नहीं कर चायनीज मंझा बेच रहे हैं। चायनीज मंझा सस्ते में उपलब्ध होता है, साथ पतंग उड़ाने के दौरान पेंच लड़ाने में काफी सहायक होता है। इस कारण दूकानदार भी इसको लाना पसंद करते हैं। पतंग उड़ाने वाले भी इसी मंझे को मांगते हैं।
हालांकि यह मंझा कई स्थानों पर जानलेवा साबित हुुआ, इसके चलते कोर्ट ने इसकी बिक्री पर पाबंदी लगाई। बाजार में लाने के बाद दूकानदार मंझा का नाम रखकर उसका अलग-अलग रेट भी निर्धारित किया है। इसमें बरेली, टीपू, मैदानी, सुल्तान के नाम से यह मंझा बाजार में उपलब्ध है।
रोक के बाद भी चायनीत मंझा बेचने वाले दूकानदारों के विरुद्ध पुलिस कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है यह सवाल लोगों के जेहन मेें है।
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जबकि हाईकोर्ट ने चायनीज मंझा की बिक्री पर रोक लगाया है। हालांकि पुलिस अधीक्षक रामलाल वर्मा ने सभी थाना प्रभारियों को चायनिज मंझा की बिक्री करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करने का निर्देश जारी किया है। इसके बाद भी खुले आम चायनीज मंझा दूकानों में बिक रहा है।
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मकर संक्रांति पर्व को देखते हुए राबर्ट्सगंज घोरावल, शाहगंज, रामगढ़, ओबरा, रेणुकूट, अनपरा, शक्तिनगर, दुद्धी, चोपन समेत अन्य कस्बों में पतंग और मंझा की दूकानें सज गई हैं।
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चंद रुपये की लालच में दूकानदार कोर्ट के आदेश का पालन नहीं कर चायनीज मंझा बेच रहे हैं। चायनीज मंझा सस्ते में उपलब्ध होता है, साथ पतंग उड़ाने के दौरान पेंच लड़ाने में काफी सहायक होता है। इस कारण दूकानदार भी इसको लाना पसंद करते हैं। पतंग उड़ाने वाले भी इसी मंझे को मांगते हैं।
हालांकि यह मंझा कई स्थानों पर जानलेवा साबित हुुआ, इसके चलते कोर्ट ने इसकी बिक्री पर पाबंदी लगाई। बाजार में लाने के बाद दूकानदार मंझा का नाम रखकर उसका अलग-अलग रेट भी निर्धारित किया है। इसमें बरेली, टीपू, मैदानी, सुल्तान के नाम से यह मंझा बाजार में उपलब्ध है।
रोक के बाद भी चायनीत मंझा बेचने वाले दूकानदारों के विरुद्ध पुलिस कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है यह सवाल लोगों के जेहन मेें है।