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पतियों के समर्थन में पत्नियों ने भी संभाली चुनाव में प्रचार की कमान
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मतदान की तिथि नजदीक आने के साथ ही चुनाव प्रचार जोर पकड़ने लगा है। अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए प्रत्याशी दिन-रात एक किए हुए हैं। इसके बावजूद खुद को हर मतदाता तक पहुंचता न देख उन्होंने परिवार के अन्य सदस्यों और रिश्तेदारों को भी प्रचार के लिए उतार दिया है। कहीं गृहस्थी छोड़कर पत्नियां अपने पति की हस्ती बनाने में जुटी हैं तो कहीं बुजुर्ग पिता घर-घर जाकर अपने बेटे के लिए आशीर्वाद मांग रहे हैं। बेटा, भांजा, भतीजा सहित अन्य रिश्तेदार भी नियमित जनसंपर्क के जरिए अपने परिवार के सदस्य का टेंपो हाई करने की कोशिश कर रहे हैं।
जिले में सात मार्च को मतदान होना है। प्रचार के लिए बस पांच फरवरी की शाम तक का मौका है। चुनाव में अब गिनती के दिन शेष रह जाने के कारण हर प्रत्याशी तूफानी दौरे कर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है। हर कार्यकर्ता से मिलने की कोशिश कर रहे हैं ताकि किसी को यह कहने का अवसर न मिले कि वह उनसे वोट मांगने नहीं आए। सुबह से लेकर शाम तक प्रचार करने के बाद भी हर मतदाता तक अपनी पहुंच होती न देख प्रत्याशियों ने अपने परिवार के सदस्यों को भी चुनाव मैदान में उतार दिया है।
ओबरा विधानसभा सीट से भाजपा के प्रत्याशी संजीव सिंह गोंड प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री भी हैं। जातिगत समीकरणों में फंसी ओबरा सीट पर राज्य मंत्री की प्रतिष्ठा दांव पर है। सियासत में पति की हस्ती बनाने के लिए उनकी पत्नी लीला गोंड भी मैदान में कूद चुकी हैं। पति ने भी लीला को चोपन का ब्लॉक प्रमुख बनवाने में एड़ी-चोटी का जोर लगाया था तो अब पत्नि भी पति परमेश्वर के लिए अपना दायित्व निभा रही हैं। दुद्धी से भाजपा प्रत्याशी रामदुलार गोंड की पत्नी सुरतन देवी भी पति के लिए गांव में घर-घर जा रही हैं। पति बाहर का मोर्चा संभाले हुए हैं तो पत्नी ने गांव का जिम्मा संभाल लिया है। यहीं से सपा प्रत्याशी विजय सिंह गोंड के समर्थन में उनकी भांजी सुषमा सिंह प्रचार में उतर चुकी हैं। डोर-टू-डोर पहुंचकर वोट मांग रही हैं। इसी तरह घोरावल विधानसभा सीट पर सपा प्रत्याशी रमेश दुबे के समर्थन में उनके बुजुर्ग पिता वोट मांग रहे हैं। लोगों के बीच जाकर बेटे को आशीर्वाद देने की दुहाई दे रहे हैं। कई अन्य प्रत्याशियों के भी पारिवारिक सदस्य कमर कस मैदान में उतर चुके हैं। प्रत्याशियों के साथ उनके परिवार के सदस्यों के चुनाव प्रचार से माहौल रोचक होता जा रहा है।
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जिले में सात मार्च को मतदान होना है। प्रचार के लिए बस पांच फरवरी की शाम तक का मौका है। चुनाव में अब गिनती के दिन शेष रह जाने के कारण हर प्रत्याशी तूफानी दौरे कर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है। हर कार्यकर्ता से मिलने की कोशिश कर रहे हैं ताकि किसी को यह कहने का अवसर न मिले कि वह उनसे वोट मांगने नहीं आए। सुबह से लेकर शाम तक प्रचार करने के बाद भी हर मतदाता तक अपनी पहुंच होती न देख प्रत्याशियों ने अपने परिवार के सदस्यों को भी चुनाव मैदान में उतार दिया है।
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ओबरा विधानसभा सीट से भाजपा के प्रत्याशी संजीव सिंह गोंड प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री भी हैं। जातिगत समीकरणों में फंसी ओबरा सीट पर राज्य मंत्री की प्रतिष्ठा दांव पर है। सियासत में पति की हस्ती बनाने के लिए उनकी पत्नी लीला गोंड भी मैदान में कूद चुकी हैं। पति ने भी लीला को चोपन का ब्लॉक प्रमुख बनवाने में एड़ी-चोटी का जोर लगाया था तो अब पत्नि भी पति परमेश्वर के लिए अपना दायित्व निभा रही हैं। दुद्धी से भाजपा प्रत्याशी रामदुलार गोंड की पत्नी सुरतन देवी भी पति के लिए गांव में घर-घर जा रही हैं। पति बाहर का मोर्चा संभाले हुए हैं तो पत्नी ने गांव का जिम्मा संभाल लिया है। यहीं से सपा प्रत्याशी विजय सिंह गोंड के समर्थन में उनकी भांजी सुषमा सिंह प्रचार में उतर चुकी हैं। डोर-टू-डोर पहुंचकर वोट मांग रही हैं। इसी तरह घोरावल विधानसभा सीट पर सपा प्रत्याशी रमेश दुबे के समर्थन में उनके बुजुर्ग पिता वोट मांग रहे हैं। लोगों के बीच जाकर बेटे को आशीर्वाद देने की दुहाई दे रहे हैं। कई अन्य प्रत्याशियों के भी पारिवारिक सदस्य कमर कस मैदान में उतर चुके हैं। प्रत्याशियों के साथ उनके परिवार के सदस्यों के चुनाव प्रचार से माहौल रोचक होता जा रहा है।
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