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जांच में मिला अवैध खनन, तोड़वाएंगे पुल
अमर उजाला ब्यूरो/सोनभद्र
Updated Sat, 24 Jun 2017 12:54 AM IST
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खनन के लिए पुल बनाकर सोन नदी की धारा रोकना भाजपा नेता एवं बालू ठेकेदार को महंगा पड़ गया। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद जिला प्रशासन ने टीम भेजकर जांच कराई तो अवैध खनन की पुष्टि हुई। राजस्व कर्मियों के साथ रेंजर ने भी खनन स्थल की नापी की। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक सोन नदी पर बना अवैध पुल तोड़वाया जाएगा।
बताते चलें कि भाजपा के एक नेता की कंपनी को बरहमोरी में बालू खनन का ठेका मिला है। कंपनी ने तीन दिन पूर्व सोननदी में अस्थाई पुल बना दिया व बालू की लोडिंग कराने लगी। गांव के लोगों ने विरोध किया तो ठेकेदार ने उन्हें भगा दिया। वहां मौजूद कारिंदों का कहना था कि कंपनी के मालिक भाजपा के बड़े नेता है। फिर किसी ने काम रुकवाने की कोशिश की तो उनके लिए ठीक नहीं होगा। इसी बीच अमर उजाला ने अवैध, खनन, वो भी सोननदी की धारा रोक कर शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया तो हड़कंप मच गया। प्रशासन ने एसडीएम सदर विशाल कुमार यादव, खान अधिकारी पीके दास, ओबरा वन प्रभाग के रेंजर पतिराज की टीम गठित कर जांच रिपोर्ट तलब की। इधर टीम बालू साइट पर जांच करने पहुंची उधर ठेकेदार जिलाधिकारी कार्यालय आ धमके। सूत्रों की माने तो रिपोर्ट खुद के पक्ष में कराने के लिए लंबी माथापच्ची चली। कंपनी के मैनेजर धर्मेंद्र त्यागी ने अमर उजाला को बताया कि वह लोग नियम के दायरे में काम कर रहे हैं मगर पुल बनाने की इजाजत किसने दी इस सवाल का जवाब वह नहीं दे सके। वहीं एसडीएम विशाल कुमार यादव ने कहा कि वह जांच रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। डीएम पीके उपाध्याय ने बताया कि उन्होंने मामले की जांच एसडीएम को सौंपी है। उन्हें अभी रिपोर्ट नहीं मिली है रिपोर्ट मिलते ही कार्रवाई करेंगे।
वन विभाग ने सिर्फ परिवहन की दी है अनुमति: डीएफओ
सोनभद्र। ओबरा वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी अमर बहादुर सिंह ने बताया कि नदी में अस्थाई पुल बनाने से वन विभाग का कोई लेना देना नहीं है। पुल क्यों और कैसे बनाया गया इसका जवाब राजस्व विभाग के अधिकारी ही दे सकते हैं। उन्होंने कंपनी को वन क्षेत्र से वाहन परिवहन करने की अनुमति दी है। इसके लिए वन विभाग ट्रांजिट शुल्क जमा करा रहा है।
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बताते चलें कि भाजपा के एक नेता की कंपनी को बरहमोरी में बालू खनन का ठेका मिला है। कंपनी ने तीन दिन पूर्व सोननदी में अस्थाई पुल बना दिया व बालू की लोडिंग कराने लगी। गांव के लोगों ने विरोध किया तो ठेकेदार ने उन्हें भगा दिया। वहां मौजूद कारिंदों का कहना था कि कंपनी के मालिक भाजपा के बड़े नेता है। फिर किसी ने काम रुकवाने की कोशिश की तो उनके लिए ठीक नहीं होगा। इसी बीच अमर उजाला ने अवैध, खनन, वो भी सोननदी की धारा रोक कर शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया तो हड़कंप मच गया। प्रशासन ने एसडीएम सदर विशाल कुमार यादव, खान अधिकारी पीके दास, ओबरा वन प्रभाग के रेंजर पतिराज की टीम गठित कर जांच रिपोर्ट तलब की। इधर टीम बालू साइट पर जांच करने पहुंची उधर ठेकेदार जिलाधिकारी कार्यालय आ धमके। सूत्रों की माने तो रिपोर्ट खुद के पक्ष में कराने के लिए लंबी माथापच्ची चली। कंपनी के मैनेजर धर्मेंद्र त्यागी ने अमर उजाला को बताया कि वह लोग नियम के दायरे में काम कर रहे हैं मगर पुल बनाने की इजाजत किसने दी इस सवाल का जवाब वह नहीं दे सके। वहीं एसडीएम विशाल कुमार यादव ने कहा कि वह जांच रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। डीएम पीके उपाध्याय ने बताया कि उन्होंने मामले की जांच एसडीएम को सौंपी है। उन्हें अभी रिपोर्ट नहीं मिली है रिपोर्ट मिलते ही कार्रवाई करेंगे।
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वन विभाग ने सिर्फ परिवहन की दी है अनुमति: डीएफओ
सोनभद्र। ओबरा वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी अमर बहादुर सिंह ने बताया कि नदी में अस्थाई पुल बनाने से वन विभाग का कोई लेना देना नहीं है। पुल क्यों और कैसे बनाया गया इसका जवाब राजस्व विभाग के अधिकारी ही दे सकते हैं। उन्होंने कंपनी को वन क्षेत्र से वाहन परिवहन करने की अनुमति दी है। इसके लिए वन विभाग ट्रांजिट शुल्क जमा करा रहा है।
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