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इफ्तार में दिखी गंगा-जमुनी तहजीब
अमर उजाला संवाददाता, सोनभद्र
Updated Sun, 05 Jul 2015 11:06 PM IST
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तापीय परियोजना आवासीय परिसर स्थित आपरेटिंग क्लब में शनिवार की देर शाम समाजसेवी रामकिशुन सिंह यादव की ओर से रोजा इफ्तार का आयोजन किया गया।
रोजा इफ्तार में हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों के लोगों ने शिरकत कर गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश की। इससे पूर्व मगरीब की नमाज अदा कर नेकी की राह पर चलने की सीख दी गई।
कासिम हसन ने कहा कि माहे रमजान में कुरआन शरीफ नाजिल हुआ था। इसलिए इस महीने को बरकत और मगफरत का महीना कहा जाता है। रोजेदारो को रोजा इफ्तार कराना पुण्य का कार्य बताया।
सुल्तान शहरयार खान ने कहा कि रमजान माह में जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं और जहन्नुम का दरवाजा बंद कर शैतानों को कैद कर दिया जाता है।
पहाड़ी मस्जिद के सेक्रेटरी अय्यूब नायला ने कहा कि रमजान में जकात और फितरा से गरीबों-मुफलिसों की मदद की जाती है। इस दौरान शमशाद अहमद, अफजल अली, मंसूर अली, एमए खान, अनीसुल हुदा, रज्जाक, मौलाना अकमल, शहजाद , आदिल मौजूद रहे।
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रोजा इफ्तार में हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों के लोगों ने शिरकत कर गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश की। इससे पूर्व मगरीब की नमाज अदा कर नेकी की राह पर चलने की सीख दी गई।
कासिम हसन ने कहा कि माहे रमजान में कुरआन शरीफ नाजिल हुआ था। इसलिए इस महीने को बरकत और मगफरत का महीना कहा जाता है। रोजेदारो को रोजा इफ्तार कराना पुण्य का कार्य बताया।
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सुल्तान शहरयार खान ने कहा कि रमजान माह में जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं और जहन्नुम का दरवाजा बंद कर शैतानों को कैद कर दिया जाता है।
पहाड़ी मस्जिद के सेक्रेटरी अय्यूब नायला ने कहा कि रमजान में जकात और फितरा से गरीबों-मुफलिसों की मदद की जाती है। इस दौरान शमशाद अहमद, अफजल अली, मंसूर अली, एमए खान, अनीसुल हुदा, रज्जाक, मौलाना अकमल, शहजाद , आदिल मौजूद रहे।
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