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मुफ्त का अनाज पर घटतौली की मार
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कोविड-19 की दूसरी लहर के चलते गरीबों के समक्ष आर्थिक संकट उपन्न हो गई है। इससे निजात दिलाने के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत जिले के करीब चार लाख एक हजार 539 राशन कार्डों से जुड़े 14 लाख 92 हजार 418 सदस्यों को राशन नि:शुल्क दिया जा रहा है। सरकार की ओर से हर माह लगभग दो करोड़ रुपये का अनाज वितरित कराया जा रहा है। लेकिन राशन की दुकानों पर घटतौली से कार्डधारक परेशान हैं। पांच किलो अनाज में 500 ग्राम से एक किलोग्राम घटतौली की जाती है। इसकी शिकायत करने के बाद गरीबों की समस्या का समाधान नही हो पा रहा है।
कोरोना वैश्विक महामारी की दूसरी लहर से गरीबों के समक्ष विभिन्न प्रकार की समस्याएं मुंह बाएं खड़ी हो गई है। इससे निजात दिलाने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार ने अंत्योदय एवं पात्र गृहस्थी के कार्डधारकों को मुफ्त में राशन देने का आदेश जारी किया है। आपूर्ति विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अन्त्योदय कार्डधारक को सरकार 35 किलो गेहूं, चावल प्रति कार्ड देती है, जबकि पात्र गृहस्थी के कार्ड धारकों को तीन किलो गेहूं और 2 किलो चावल प्रति यूनिट दिया जाता है। सरकार ने पहले प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्य योजना के अंतर्गत समस्त कार्डधारको को प्रति यूनिट पांच किग्रा खाद्यान्न माह मई और जून में नि:शुल्क वितरित करने का निर्देश दिया था, यह अनाज राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के अतिरिक्त था।
माह जून, जुलाई एवं अगस्त में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत नि:शुल्क खाद्यान्न का वितरण हो रहा है। पहले कार्डधारकों से गेहूं का दो रूपये प्रति किलोग्राम एवं चावल का तीन रूपये प्रति किग्रा मूल्य लिया जाता था। लेकिन अब सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्य योजना के अंतर्गत नवंबर 2021 तक प्रति यूनिट पांच किग्रा अनाज नि:शुल्क देने का निर्देश दिया है। जिले में वर्तमान में करीब तीन लाख 40 हजार 982 पात्र गृहस्थी एवं 60 हजार 558 अंत्योदय कार्डधारक है। दोनों मिलाकर चार लाख एक हजार 539 कार्डधारकों के 1499092 यूनिट योजना से लाभांन्वित हो रहे हैं। जुलाई में जिले के काडधारकों को मुफ्त में करीब 92 हजार 649 क्विंटल गेहूं और 62 हजार 747 क्विंटल अनाज वितरित किया गया है। वहीं नगवां ब्लॉक के वैजनाथ गांव निवासी हरि सिंह का कहना है कि कोटेदार द्वारा घटतौली कर अनाज दिया जाता है। यही आरोप गड़वान गांव निवासर मुन्ना सिंह का है। उन लोगों का कहना है कि अनाज कम मिलने की शिकायत कई बार संबंधित अधिकारियों से की जा चुकी है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी तरह के क्षेत्र के कई कार्डधारकों के आरोप है।
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बाजार से अनाज खरीदना मजबूरी
घोरावल। कोरोना संकट के मद्देनजर बहुसंख्यक आबादी की परेशानियों के मद्देनजर केंद्र सरकार द्वारा गरीब व जरूरतमंद परिवारों को मुफ्त राशन दिया जा रहा है। इससे गरीबों को भोजन के लिए सहारा मिला तो है लेकिन यह राशन पर्याप्त नहीं है। लाभार्थियों का कहना है कि इतने राशन से उनकी गृहस्थी नही चल सकती, लिहाजा उन्हें बाजार से गेहूं व चावल खरीदना पड़ता है।
घोरावल ब्लॉक के सोतिल गांव निवासी कार्डधारक संजय का कहना है कि उनके परिवार में पांच सदस्य हैं। परिवार में प्रति सदस्य पांच किलोग्राम के हिसाब से महीने में दो बार नि:शुल्क राशन मिलता है। परिवार के भरण पोषण के लिए यह राशन अपर्याप्त है। लिहाजा उन्हें बाजार से भी गेहूं व चावल खरीदना पड़ता है। धौराकुंड निवासी मंगरू यादव ने बताया कि उनके परिवार में छह छह लोग शामिल है, लेकिन डेढ़ साल से किसी कारण से दो लोगों का नाम कटा हुआ है। लिहाजा उनके परिवार के सिर्फ 4 लोगों को व गेहूं चावल मिलता है। यह राशन परिवार को खाने के लिए पर्याप्त नहीं है। पड़वनिया निवासी रामदुलारे ने बताया कि उनके परिवार में कुल 6 सदस्य हैं। महीने में दो बार तीस तीस किलो गेहूं व चावल मिलता है।इतने राशन में परिवार का पेट नही भर सकता है।इसलिए गृहस्थी चलाने के लिए उन्हें दुकान पर से राशन खरीदना पड़ता है। जुडिय़ा निवासी सद्दीक ने बताया कि मेरे परिवार में सात सदस्य हैं। कोटे से मिलने वाले अनाज अपर्याप्त है, इस नाते बाजार से राशन क्रय करना पड़ता है।
कोटेदारों के माध्यम से कार्डधारकों को अनाज उपलब्ध कराया जा रहा है। घटतौली करने वाले कोटेदारों के खिलाफ शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी। आरोप सही मिलने पर संबंधित कोटेदारों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
गौरीशंकर शुक्ला, जिला पूर्ति अधिकारी
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कोरोना वैश्विक महामारी की दूसरी लहर से गरीबों के समक्ष विभिन्न प्रकार की समस्याएं मुंह बाएं खड़ी हो गई है। इससे निजात दिलाने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार ने अंत्योदय एवं पात्र गृहस्थी के कार्डधारकों को मुफ्त में राशन देने का आदेश जारी किया है। आपूर्ति विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अन्त्योदय कार्डधारक को सरकार 35 किलो गेहूं, चावल प्रति कार्ड देती है, जबकि पात्र गृहस्थी के कार्ड धारकों को तीन किलो गेहूं और 2 किलो चावल प्रति यूनिट दिया जाता है। सरकार ने पहले प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्य योजना के अंतर्गत समस्त कार्डधारको को प्रति यूनिट पांच किग्रा खाद्यान्न माह मई और जून में नि:शुल्क वितरित करने का निर्देश दिया था, यह अनाज राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के अतिरिक्त था।
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माह जून, जुलाई एवं अगस्त में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत नि:शुल्क खाद्यान्न का वितरण हो रहा है। पहले कार्डधारकों से गेहूं का दो रूपये प्रति किलोग्राम एवं चावल का तीन रूपये प्रति किग्रा मूल्य लिया जाता था। लेकिन अब सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्य योजना के अंतर्गत नवंबर 2021 तक प्रति यूनिट पांच किग्रा अनाज नि:शुल्क देने का निर्देश दिया है। जिले में वर्तमान में करीब तीन लाख 40 हजार 982 पात्र गृहस्थी एवं 60 हजार 558 अंत्योदय कार्डधारक है। दोनों मिलाकर चार लाख एक हजार 539 कार्डधारकों के 1499092 यूनिट योजना से लाभांन्वित हो रहे हैं। जुलाई में जिले के काडधारकों को मुफ्त में करीब 92 हजार 649 क्विंटल गेहूं और 62 हजार 747 क्विंटल अनाज वितरित किया गया है। वहीं नगवां ब्लॉक के वैजनाथ गांव निवासी हरि सिंह का कहना है कि कोटेदार द्वारा घटतौली कर अनाज दिया जाता है। यही आरोप गड़वान गांव निवासर मुन्ना सिंह का है। उन लोगों का कहना है कि अनाज कम मिलने की शिकायत कई बार संबंधित अधिकारियों से की जा चुकी है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी तरह के क्षेत्र के कई कार्डधारकों के आरोप है।
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बाजार से अनाज खरीदना मजबूरी
घोरावल। कोरोना संकट के मद्देनजर बहुसंख्यक आबादी की परेशानियों के मद्देनजर केंद्र सरकार द्वारा गरीब व जरूरतमंद परिवारों को मुफ्त राशन दिया जा रहा है। इससे गरीबों को भोजन के लिए सहारा मिला तो है लेकिन यह राशन पर्याप्त नहीं है। लाभार्थियों का कहना है कि इतने राशन से उनकी गृहस्थी नही चल सकती, लिहाजा उन्हें बाजार से गेहूं व चावल खरीदना पड़ता है।
घोरावल ब्लॉक के सोतिल गांव निवासी कार्डधारक संजय का कहना है कि उनके परिवार में पांच सदस्य हैं। परिवार में प्रति सदस्य पांच किलोग्राम के हिसाब से महीने में दो बार नि:शुल्क राशन मिलता है। परिवार के भरण पोषण के लिए यह राशन अपर्याप्त है। लिहाजा उन्हें बाजार से भी गेहूं व चावल खरीदना पड़ता है। धौराकुंड निवासी मंगरू यादव ने बताया कि उनके परिवार में छह छह लोग शामिल है, लेकिन डेढ़ साल से किसी कारण से दो लोगों का नाम कटा हुआ है। लिहाजा उनके परिवार के सिर्फ 4 लोगों को व गेहूं चावल मिलता है। यह राशन परिवार को खाने के लिए पर्याप्त नहीं है। पड़वनिया निवासी रामदुलारे ने बताया कि उनके परिवार में कुल 6 सदस्य हैं। महीने में दो बार तीस तीस किलो गेहूं व चावल मिलता है।इतने राशन में परिवार का पेट नही भर सकता है।इसलिए गृहस्थी चलाने के लिए उन्हें दुकान पर से राशन खरीदना पड़ता है। जुडिय़ा निवासी सद्दीक ने बताया कि मेरे परिवार में सात सदस्य हैं। कोटे से मिलने वाले अनाज अपर्याप्त है, इस नाते बाजार से राशन क्रय करना पड़ता है।
कोटेदारों के माध्यम से कार्डधारकों को अनाज उपलब्ध कराया जा रहा है। घटतौली करने वाले कोटेदारों के खिलाफ शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी। आरोप सही मिलने पर संबंधित कोटेदारों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
गौरीशंकर शुक्ला, जिला पूर्ति अधिकारी