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एंबुलेंसों के जांच की आंच सोनभद्र पहुंची
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सूबे के कई जिलों में नियमों को ताक पर रखकर सेवा प्रदाता द्वारा एंबुलेंसों का भुगतान लेने के मामले की हो रही जांच की आंच सोनभद्र भी पहुंच गई है। शासन स्तर से टीम गठित कर जांच कर रिपोर्ट मुहैया कराने का निर्देश दिया गया है। टीम में सीएमओ के अलावा अन्य अधिकारी शामिल होंगे। उधर, जांच शुरू होने की भनक लगते ही नियमों को ताक पर रखकर एंबुलेंस का संचालन कर सरकार से भुगतान लेने वालों में खलबली मच गई है।
सूबे के कई जिलों में सरकारी एंबुलेंस 102-108 की सेवा देने के नाम पर बड़े फर्जीवाड़े का मामला प्रकाश में आने के बाद शासन स्तर से जांच करने का निर्णय लिया गया है। जिले में भी एंबुलेंस के फर्जी फेरे दर्शा कर काफी धनराशि का भुगतान कंपनी ने लिया है। इसके लिए कई पायलट व ईएमटी पर दबाव बना कर व नौकरी से निकालने की धमकी देकर फर्जी फेरों का आंकड़ा प्रस्तुत किया गया है। कंपनी के इस कवायद का विरोध करने पर कई लोगों को बर्खास्त कर दिया गया है। बर्खास्त किए गए एंबुलेंस कर्मियों का आरोप है कि कोरोना काल में अपनी जान की परवाह न करते हुए पीड़ितों की सेवा की। इसके बाद भी उन्होंने सेवा प्रदाता कंपनी के फर्जीवाड़े के अनुरूप फर्जी फेरे नहीं बढ़ाए तो बर्खास्त कर दिया गया। हालांकि शासन ने पिछले तीन माह के रिकार्ड की जांच का निर्णय लिया है।
वास्तविक मरीजों की पता लगाएगी टीम
महानिदेशक परिवार कल्याण स्तर से जारी पत्र में जांच की जिम्मेदारी एडी को सौंपी गई है। इनके नेतृत्व में प्रत्येक जिले में एक टीम गठित की जाएगी। इसमें डिविजनल प्रोग्राम मैनेजर एनएचएम व संबंधित जिले के सीएमओ या नामित नोडल अधिकारी के अलावा संबंधित जनपद के जिला प्रोग्राम मैनेजर शामिल किए जाएंगे। टीम को फरवरी 2022 से अप्रैल 2022 के मरीजों की जांच करनी है। तीन माह में सेवा प्रदाता कंपनी को हुए भुगतान और वास्तविक मरीजों की संख्या पीसीआर में अंकित आधार कार्ड नंबर व मोबाइल नंबर का मिलान करना होगा।
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शासन के मंशानुसार सेवा प्रदाता द्वारा एंबुलेंसों का भुगतान लेने के मामले की जांच की जाएगी। हालांकि अभी किन-किन बिंदुओं पर जांच की जानी है, इस संबंध में अभी उन्हें दिशा निर्देश नहीं मिला है। - डॉ. रमेश सिंह ठाकुर, सीएमओ।
जिले में फर्जी ढंग से एंबुलेंसों का फेरा बढ़ाकर भुगतान नहीं लिया गया है। काम में रुचि न लेने पर पिछले वर्ष कंपनी ने कुछ कर्मियों को हटा दिया था। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मरीजों से जुड़े रिकार्ड जो मांगेंगे उन्हें मुहैया कराया जाएगा। आशीष सिंह, प्रभारी 108 एंबुलेंस
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सूबे के कई जिलों में सरकारी एंबुलेंस 102-108 की सेवा देने के नाम पर बड़े फर्जीवाड़े का मामला प्रकाश में आने के बाद शासन स्तर से जांच करने का निर्णय लिया गया है। जिले में भी एंबुलेंस के फर्जी फेरे दर्शा कर काफी धनराशि का भुगतान कंपनी ने लिया है। इसके लिए कई पायलट व ईएमटी पर दबाव बना कर व नौकरी से निकालने की धमकी देकर फर्जी फेरों का आंकड़ा प्रस्तुत किया गया है। कंपनी के इस कवायद का विरोध करने पर कई लोगों को बर्खास्त कर दिया गया है। बर्खास्त किए गए एंबुलेंस कर्मियों का आरोप है कि कोरोना काल में अपनी जान की परवाह न करते हुए पीड़ितों की सेवा की। इसके बाद भी उन्होंने सेवा प्रदाता कंपनी के फर्जीवाड़े के अनुरूप फर्जी फेरे नहीं बढ़ाए तो बर्खास्त कर दिया गया। हालांकि शासन ने पिछले तीन माह के रिकार्ड की जांच का निर्णय लिया है।
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वास्तविक मरीजों की पता लगाएगी टीम
महानिदेशक परिवार कल्याण स्तर से जारी पत्र में जांच की जिम्मेदारी एडी को सौंपी गई है। इनके नेतृत्व में प्रत्येक जिले में एक टीम गठित की जाएगी। इसमें डिविजनल प्रोग्राम मैनेजर एनएचएम व संबंधित जिले के सीएमओ या नामित नोडल अधिकारी के अलावा संबंधित जनपद के जिला प्रोग्राम मैनेजर शामिल किए जाएंगे। टीम को फरवरी 2022 से अप्रैल 2022 के मरीजों की जांच करनी है। तीन माह में सेवा प्रदाता कंपनी को हुए भुगतान और वास्तविक मरीजों की संख्या पीसीआर में अंकित आधार कार्ड नंबर व मोबाइल नंबर का मिलान करना होगा।
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शासन के मंशानुसार सेवा प्रदाता द्वारा एंबुलेंसों का भुगतान लेने के मामले की जांच की जाएगी। हालांकि अभी किन-किन बिंदुओं पर जांच की जानी है, इस संबंध में अभी उन्हें दिशा निर्देश नहीं मिला है। - डॉ. रमेश सिंह ठाकुर, सीएमओ।
जिले में फर्जी ढंग से एंबुलेंसों का फेरा बढ़ाकर भुगतान नहीं लिया गया है। काम में रुचि न लेने पर पिछले वर्ष कंपनी ने कुछ कर्मियों को हटा दिया था। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मरीजों से जुड़े रिकार्ड जो मांगेंगे उन्हें मुहैया कराया जाएगा। आशीष सिंह, प्रभारी 108 एंबुलेंस