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Sonebhadra News: 58 स्कूल वाहनों का फिटनेस खत्म, नोटिस के बाद भी कर रहे लापरवाही
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गर्मियों की छुट्टियों के बाद स्कूल खुल गए हैं। स्कूल के बच्चों को ई रिक्शा और ऑटो से ढो कर उनकी सुरक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है।
बच्चों को लाने-ले जाने के लिए संचालित स्कूल वाहनों में नियमों की अनदेखी हो रही है। जिले में 58 स्कूल वाहन ऐसे हैं, जिनकी फिटनेस की वैधता खत्म हो चुकी है। बार-बार नोटिस के बाद भी स्कूल प्रबंधन फिटनेस जांच की जरूरत नहीं समझ रहे। दूसरी ओर उन वाहनों पर भी कोई लगाम नहीं है जो स्कूल के तो नहीं हैं, लेकिन बाहरी होकर भी बच्चों को स्कूल लाते और ले जाते हैं। टेंपो, ई-रिक्शा, वैन जैसे वाहनों में बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे है।
जिले में 95 से अधिक प्राइवेट विद्यालय एवं उनकी शाखाएं चल रही हैं। प्राइवेट स्कूलों के पास 250 से अधिक खुद के वाहन हैं। इनमें ज्यादातर बसें हैं। स्कूल वाहनों के लिए शासन ने मानक तय किए हैं। उनका रंग पीला होना चाहिए। आगे-पीछे स्कूल बस लिखा होने के साथ शीशे पर जाली, स्पीड गर्वनर, फर्स्ट एड बॉक्स, ड्राइवर का नाम, नंबर सहित अन्य नियमों का पालन अनिवार्य है। उन्हें एक नियमित अंतराल पर फिटनेस जांच भी करानी होती है, ताकि पता चल सके कि उसमें कितनी बसें सुरक्षित हैं। अधिकांश वाहनों पर नाम, नंबर जैसे मानक तो पूरे हैं, लेकिन फिटनेस के मामले में 58 वाहन मानक पर खरे नहीं हैं। समय सीमा बीतने के बाद भी वाहनों की जांच नहीं कराई गई है। स्कूल ले जाने वाले निजी वाहनों में सुरक्षा के सारे मानक दरकिनार हैं। न तो उनमें जाली लगी है और न ही उनका रंग पीला है। ड्राइवर का नाम, नंबर, इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर सहित अन्य सुविधाएं भी नहीं हैं। जिले के कई प्रमुख स्कूल ऐसे हैं, जिनके पास खुद के वाहन नहीं हैं। उन स्कूलों में ज्यादातर बच्चे ऐसे वाहनों से ही आ-जा रहे हैं। पिछले साल दुद्धी, बीजपुर क्षेत्र में स्कूल वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गए थे। इसमें कई बच्चे जख्मी भी हुए। इसके बाद जांच और चालान की कार्रवाई हुई। फिर मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
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वर्जन...
58 स्कूलों के वाहनों के फिटनेस की समय सीमा खत्म होने पर 15 दिन पहले नोटिस भेजा गया था। इसमें से कुछ स्कूलों ने जांच भी कराया है। अन्य को फिर से नोटिस दी जाएगी। स्कूलों में अलग से लगाए गए वाहनों में सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए स्कूल प्रबंधकों के साथ जल्द ही बैठक होगी। जांच और चालान की कार्रवाई लगातार जारी है।
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-धनबीर यादव, एआरटीओ प्रशासन।
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बच्चों को लाने-ले जाने के लिए संचालित स्कूल वाहनों में नियमों की अनदेखी हो रही है। जिले में 58 स्कूल वाहन ऐसे हैं, जिनकी फिटनेस की वैधता खत्म हो चुकी है। बार-बार नोटिस के बाद भी स्कूल प्रबंधन फिटनेस जांच की जरूरत नहीं समझ रहे। दूसरी ओर उन वाहनों पर भी कोई लगाम नहीं है जो स्कूल के तो नहीं हैं, लेकिन बाहरी होकर भी बच्चों को स्कूल लाते और ले जाते हैं। टेंपो, ई-रिक्शा, वैन जैसे वाहनों में बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे है।
जिले में 95 से अधिक प्राइवेट विद्यालय एवं उनकी शाखाएं चल रही हैं। प्राइवेट स्कूलों के पास 250 से अधिक खुद के वाहन हैं। इनमें ज्यादातर बसें हैं। स्कूल वाहनों के लिए शासन ने मानक तय किए हैं। उनका रंग पीला होना चाहिए। आगे-पीछे स्कूल बस लिखा होने के साथ शीशे पर जाली, स्पीड गर्वनर, फर्स्ट एड बॉक्स, ड्राइवर का नाम, नंबर सहित अन्य नियमों का पालन अनिवार्य है। उन्हें एक नियमित अंतराल पर फिटनेस जांच भी करानी होती है, ताकि पता चल सके कि उसमें कितनी बसें सुरक्षित हैं। अधिकांश वाहनों पर नाम, नंबर जैसे मानक तो पूरे हैं, लेकिन फिटनेस के मामले में 58 वाहन मानक पर खरे नहीं हैं। समय सीमा बीतने के बाद भी वाहनों की जांच नहीं कराई गई है। स्कूल ले जाने वाले निजी वाहनों में सुरक्षा के सारे मानक दरकिनार हैं। न तो उनमें जाली लगी है और न ही उनका रंग पीला है। ड्राइवर का नाम, नंबर, इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर सहित अन्य सुविधाएं भी नहीं हैं। जिले के कई प्रमुख स्कूल ऐसे हैं, जिनके पास खुद के वाहन नहीं हैं। उन स्कूलों में ज्यादातर बच्चे ऐसे वाहनों से ही आ-जा रहे हैं। पिछले साल दुद्धी, बीजपुर क्षेत्र में स्कूल वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गए थे। इसमें कई बच्चे जख्मी भी हुए। इसके बाद जांच और चालान की कार्रवाई हुई। फिर मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
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58 स्कूलों के वाहनों के फिटनेस की समय सीमा खत्म होने पर 15 दिन पहले नोटिस भेजा गया था। इसमें से कुछ स्कूलों ने जांच भी कराया है। अन्य को फिर से नोटिस दी जाएगी। स्कूलों में अलग से लगाए गए वाहनों में सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए स्कूल प्रबंधकों के साथ जल्द ही बैठक होगी। जांच और चालान की कार्रवाई लगातार जारी है।
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-धनबीर यादव, एआरटीओ प्रशासन।