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दो प्रोजेक्ट के कोल भंडार में लगी आग, मचा हड़कंप

Sun, 02 May 2021 06:43 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 02 May 2021 06:43 PM IST
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Fire in coal reserves of two projects, stir
शक्तिनगर। नार्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) के दो प्रोजेक्टों में मौजूद कोल भंडारों में आग से काफी कोयला जलने की आशंका जताई जा रही। आग बुझाने का प्रयास विफल होने से प्रबंधन के अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है।
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एनसीएल बीना के पूर्वी कोयला भंडार व दुद्धीचुआ प्रोजेक्ट के कोल हैंडलिंग प्लांट (वार्फवाल के ऊपरी हिस्से) के पास कोयला भंडार किया गया है। भंडारण में आग का दायरा शनिवार की रात बढ़ा तो अफसरों में खलबली मची। प्रोजेक्ट के कर्मचारियों की मानें तो दोनों कोयला क्षेत्रों के कोयला भंडारण में कई लाख टन कोयला मौजूद है। अनुमान लगाया जा रहा है कि अबतक कई टन कोयला राख में तब्दील हो चुका है। खदान में मौजूद लोगों के मुताबिक आग कई दिनों पहले लगी। इसके बाद मौजूद संसाधनों से इसे बुझाने का प्रयास किया गया, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। गर्मी को हवा का साथ मिलने से इसमें और बढ़ोत्तरी हो गई। कर्मचारियों ने व्यवस्था पर सवाल खड़ा किया। कहना था कि भंडारण के लिए जो इंतजाम किए जाने चाहिए थे वह नहीं किए गए अब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो रही है। बताया जा रहा है कि जिन कोल भंडारों में आग लगी है उसके स्टॉक को समेट कर प्रबंधन मामले को दबाने में लगा है।
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लपटों के बिना राख होता है कोयला
शक्तिनगर। एनसीएल की दुद्धीचुआ व बीना के कोयला भंडारों में लगी आग पर जानकारों का कहना है कि कोयला भंडारण की आग में ऊंची लपटें नहीं उठती बल्कि हवा का संग मिलने के बाद कोयला सुलगता है और मामूली लपटों के साथ राख में तब्दील होता रहता है। बताया जा रहा है कि इसी के चलते बीना व दुद्धीचुआ में बड़े मात्रा में कोयला राख बन गया।
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बदइंतजामी बनी बड़ी वजह
शक्तिनगर। जानकार बताते है कि कायदे से कोयला भंडारण करते वक्त भंडार पर डंपरों से डाले जा रहे कोयले को मशीनों से दबाया जाता है ताकि उसे ऑक्सीजन (हवा) ना मिल सके। लेकिन इस मामले में अनदेखी की गई और कोयला भंडार पर सतत चलने वाली प्रक्रिया का सलीके से पालन नहीं हुआ यानी दबाया नहीं गया। इससे हवा का साथ मिला तो ज्वाला बढ़ती गई।
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