फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sonebhadra News ›   Enrollment in council schools decreased by 65 thousand in two years

Sonebhadra News: दो साल में घट गया परिषदीय स्कूलों में 65 हजार नामांकन

Thu, 11 Jul 2024 11:15 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 11 Jul 2024 11:15 PM IST
विज्ञापन
Enrollment in council schools decreased by 65 thousand in two years
सोनभद्र। परिषदीय स्कूलों में बच्चों का नामांकन बढ़ाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए है, मगर यहां स्थिति उल्टी दिख रही है। बच्चों की संख्या बढ़ने की बजाय तेजी से घट रही है। पिछले दो वर्षों में जिले के 2071 परिषदीय स्कूलों में 65 हजार से अधिक बच्चे कम हो गए हैं। इसमें भी 10,000 से अधिक नामांकन सिर्फ कक्षा-1 में इस साल ही कम हुए हैं। हालांकि नामांकन की प्रक्रिया अभी जारी है, लेकिन इसकी अब तक की प्रगति से पिछले साल के आंकड़ों को छू पाना भी मुमकिन नहीं दिख रहा। अचानक से स्कूलों में बच्चों के कम होने से विभाग भी पशोपेश में है।
विज्ञापन

सबको अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराने के संकल्प के साथ सरकार परिषदीय स्कूलों में सुविधाएं बढ़ाने पर जोर दे रही है। कायाकल्प के माध्यम से स्कूलों की दशा सुधारी जा रही है। स्कूल के छात्र डेस्क-बेंच पर बैठ रहे। स्मार्ट क्लास से पढ़ाई कर रहे हैं। आधारभूत सुविधाओं में कई स्कूल कॉन्वेंट को भी टक्कर दे रहे हैं। कॉपी-किताब, ड्रेस, बैग निशुल्क है। हर आबादी के पास स्कूल खोले गए हैं। बावजूद बच्चों की संख्या में वृद्धि नहीं हो रही। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले दो साल में ही 65 हजार से भी अधिक बच्चे इन स्कूलों में घटे हैं। वर्ष 2022-23 में जहां जिले के 2061 परिषदीय स्कूलों में बच्चों की संख्या 2.70 लाख के करीब थी। वहीं वर्ष 2023-24 में यह संख्या घटकर 2.37 लाख तक आ गई। चालू सत्र में यह संख्या 2.01 लाख तक सिमट गई है। वैसे विभाग की दलील है कि इस सत्र में प्रवेश प्रक्रिया अभी चल रही है। बच्चों की संख्या बढ़ेगी, मगर स्कूलों की दशा और अभिभावकों का रुझान कुछ और ही हकीकत बयां कर रहा है।
विज्ञापन


----

हजारों बच्चों ने पढ़ाई छोड़ी
वर्ष 2023-24 में कक्षा-1 से 5 तक जिले के स्कूलों में 160654 बच्चे थे। इनमें से 138068 बच्चे ही अगली कक्षाओं में पहुंचे। करीब 17 हजार बच्चे ऐसे हैं, जिन्होंने बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूल से 5वीं तो पास किया, लेकिन छठवीं में वहां दाखिला नहीं लिया। इनमें से कुछ ने पढ़ाई छोड़ दी तो कई अन्य निजी स्कूलों में पढ़ने चले गए। छठवीं और सातवीं में भी 2198 बच्चों का आगे की कक्षा में दाखिला नहीं हुआ है। सबसे ज्यादा अंतर नए दाखिले में आया है। पिछले साल कक्षा-1 में 24622 बच्चे थे, जबकि इस बार अब तक 14 हजार बच्चों का ही दाखिला हुआ है। नामांकन की प्रक्रिया अप्रैल से नए सत्र में स्कूल खुलने के बाद से ही चल रही है। शिक्षक घर-घर जाकर बच्चों का नामांकन कर रहे हैं, मगर अब तक स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। इससे पहले वर्ष 2022-23 में बच्चों की संख्या 269076 थी, मगर 2023-24 में संख्या घटकर 236739 तक आ गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


---

इसलिए कम हो रहे बच्चे

0 सुविधाओं की कमी ने बढ़ाई दूरी: परिषदीय स्कूलों में बच्चों की संख्या में कमी के पीछे वहां संसाधनों की कमी बड़ी वजह है। स्कूल को सजा-संवार तो दिया गया, लेकिन वहां पढ़ाने वाले शिक्षक ही नहीं है। जिले में 708 स्कूल एक शिक्षक के सहारे हैं तो 129 में कोई प्रशिक्षित शिक्षक नहीं है। शिक्षा मित्र और अनुदेशक के भरोसे पढ़ाई चल रही है।

---

0 आधार की अनिवार्यता: बच्चों को ड्रेस, कॉपी-किताब, बैग सहित अन्य सुविधाओं का लाभ देने के लिए विभाग ने डीबीटी को माध्यम बनाया है। इसके लिए आधार अनिवार्य किया गया है। गांवों में बहुत से बच्चों का आधार नहीं बन पाया है। नेटवर्क की समस्या और केंद्रों की सीमित संख्या से आधार बनवाने में दिक्कत आ रही है।

---

0 अन्यत्र चले गए कोरोना काल में घर आए बच्चे: सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या कोरोना काल में खूब बढ़ी है। महानगरों में रह रहे प्रवासी श्रमिक कोरोना में घर आए तो बच्चों का दाखिला यहीं करा दिया। बाद में स्थितियां सुधरने पर वह वापस दूसरे शहरों में चले गए। इसके अलावा बहुत से अभिभावकों ने निजी स्कूलों की महंगी फीस से बचने के लिए कोरोना काल में बच्चों का दाखिला परिषदीय स्कूल में करा दिया, मगर बाद में नाम कटवा दिया।

---

0 फर्जी नामांकन भी वजह: सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए स्कूलों में गलत तरीके से बच्चों का नामांकन कर दिया गया था। बच्चे पढ़ते निजी स्कूल में थे, लेकिन उनके नाम परिषदीय स्कूल में भी चलता था। इसी आधार पर उनके हिस्से का एमडीएम, ड्रेस, कापी-किताब का लाभ दूसरे लेते रहे। आधार से लिंक होने के बाद यह डुप्लीकेसी खत्म हुई है।


---

नए नामांकन में करमा, रॉबर्ट्सगंज पीछे

पहली कक्षा में बच्चों का नामांकन कराने में रॉबर्ट्सगंज और करमा ब्लॉक सबसे पीछे हैं। रॉबर्ट्सगंज के 273 स्कूलों में सिर्फ 1503 बच्चों का कक्षा-1 में नामाकंन हुआ है। हर स्कूल में औसतन 5-6 बच्चे ही कक्षा एक में हैं। वहीं करमा ब्लॉक के 129 स्कूलों में 629 बच्चे हैं। घोरावल के 252 स्कूलों में 1611 बच्चे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed