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रम्पाकुरर में फिर पहुंचा जंगली हाथियों का दल, मचा हड़कंप
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बभनी (सोनभद्र)। छत्तीसगढ़ की सीमा से सटे बभनी थाना क्षेत्र के रम्पाकुरर गांव में बृहस्पतिवार की रात पहुंचे हाथियों ने किसानों की फसल को रौंद दिया। हाथियों ने एक ग्रामीण के खपरैल के घर को भी नुकसान पहुंचाया। हाथियों की संख्या करीब 18 बताई जा रही है। हाथियों की चिंघाड़ से ग्रामीण सहमे रहे। गांव के लोगों ने हाथियों को भगाने के लिए शोर मचाना शुरू कर दिया। इसकी सूचना पर वन क्षेत्राधिकारी की टीम गांव पहुंच कर हाथियों को जंगलों में खदेड़ने के प्रयास में जुट गई।
रम्पाकुरर गांव में बृहस्पतिवार की रात उस समय हड़कंप मच गया जब हाथियों का दल अचानक गांव में पहुंच गया। हाथियों की चिघाड़ सुनते ही ग्रामीण सहम गए। हाथियों ने रम्पाकुरर गांव में शंकर प्रसाद, हीरामन, शंकुतला देवी और चीतामन के धान की फसल को रौंद दिया। हाथियों ने शंकर प्रसाद के घर का दरवाजा तोड़ दिया और खपरैल को भी क्षति पहुंचाई। उल्लेखनीय है कि अगस्त में भी हाथियों ने सीमावर्ती गांवों डूमरहर, रम्पाकुरर, नवाटोला, महुआदोहर, मंगरमाड में ग्रामीणों की फसलों और घरों को नुकसान पहुंचाया था। काफी समय बाद वन विभाग की टीम हाथियों के झुंड को जगलों में खदेड़ने में कामयाब हो सकी। लगातार दो वर्षों से हाथियों का झुंड सीमावर्ती गांवों में उत्पात मचाने के बाद वापस हो जाते हैं लेकिन विभाग की तरफ से कोई ठोस कदम अब तक नहीं उठाया गया और न ही किसानों को फसल की क्षतिपूर्ति दी गई।
कोट
रम्पाकुरर गांव में हाथियों के होने की सूचना मिली है। वह स्वयं टीम के साथ निगरानी में लगे हैं। जानकारी मिली है कि हाथियों के झुंड ने ग्रामीणों की फसलों को नुकसान भी पहुंचाया है।- अवधनारायण मिश्र, वन क्षेत्राधिकारी।
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इनसेट
ग्रामीण टीम बनाकर रातभर करते रहे निगरानी
बभनी। रम्पाकुरर गांव में बृहस्पतिवार की रात हाथियों का झुंड पहुंचने से ग्रामीणों में दहशत है। जंगल के किनारे मकान बनाकर रहने वाले परिवारों को प्रधान पति रामकेश गुप्ता ने घर से सुरक्षित निकलवा कर दूसरे के घरों में रखवाया। इसके साथ ही गांव के राजाराम, गोपाल सिंह, भगत, रामखेलावन, विजय कुमार, मंगल सिंह, राजकुमार, देवकुमार और मोती लाल ने एक टीम बनाकर रात में गांव की निगरानी की। ग्रामीणों ने अपने घरों के सामने आग का अलाव भी जला दिए ताकि हाथियों का झुंड घरों में प्रवेश न कर सके। हाथियों के भय से लोग अपने घरों में सहमे रहे।
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रम्पाकुरर गांव में बृहस्पतिवार की रात उस समय हड़कंप मच गया जब हाथियों का दल अचानक गांव में पहुंच गया। हाथियों की चिघाड़ सुनते ही ग्रामीण सहम गए। हाथियों ने रम्पाकुरर गांव में शंकर प्रसाद, हीरामन, शंकुतला देवी और चीतामन के धान की फसल को रौंद दिया। हाथियों ने शंकर प्रसाद के घर का दरवाजा तोड़ दिया और खपरैल को भी क्षति पहुंचाई। उल्लेखनीय है कि अगस्त में भी हाथियों ने सीमावर्ती गांवों डूमरहर, रम्पाकुरर, नवाटोला, महुआदोहर, मंगरमाड में ग्रामीणों की फसलों और घरों को नुकसान पहुंचाया था। काफी समय बाद वन विभाग की टीम हाथियों के झुंड को जगलों में खदेड़ने में कामयाब हो सकी। लगातार दो वर्षों से हाथियों का झुंड सीमावर्ती गांवों में उत्पात मचाने के बाद वापस हो जाते हैं लेकिन विभाग की तरफ से कोई ठोस कदम अब तक नहीं उठाया गया और न ही किसानों को फसल की क्षतिपूर्ति दी गई।
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रम्पाकुरर गांव में हाथियों के होने की सूचना मिली है। वह स्वयं टीम के साथ निगरानी में लगे हैं। जानकारी मिली है कि हाथियों के झुंड ने ग्रामीणों की फसलों को नुकसान भी पहुंचाया है।- अवधनारायण मिश्र, वन क्षेत्राधिकारी।
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ग्रामीण टीम बनाकर रातभर करते रहे निगरानी
बभनी। रम्पाकुरर गांव में बृहस्पतिवार की रात हाथियों का झुंड पहुंचने से ग्रामीणों में दहशत है। जंगल के किनारे मकान बनाकर रहने वाले परिवारों को प्रधान पति रामकेश गुप्ता ने घर से सुरक्षित निकलवा कर दूसरे के घरों में रखवाया। इसके साथ ही गांव के राजाराम, गोपाल सिंह, भगत, रामखेलावन, विजय कुमार, मंगल सिंह, राजकुमार, देवकुमार और मोती लाल ने एक टीम बनाकर रात में गांव की निगरानी की। ग्रामीणों ने अपने घरों के सामने आग का अलाव भी जला दिए ताकि हाथियों का झुंड घरों में प्रवेश न कर सके। हाथियों के भय से लोग अपने घरों में सहमे रहे।