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बिजली की मांग ने मई में ही तोड़ा जुलाई का रिकार्ड
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सूबे में बिजली की मांग ने रविवार को अब तक मई माह के सभी पिछले रिकार्डों को ध्वस्त कर दिया। पिछले वर्ष जुलाई माह में 25 हजार मेगावाट पहुंची बिजली की मांग इस साल मई में ही 25435 मेगावाट पहुंच गई।
भीषण गर्मी के कारण इस समय एसी, फ्रीज, कूलर आदि इलेक्ट्रानिक उपकरणों का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है। इससे पारा चढ़ने के साथ ही बिजली की मांग में भी भारी वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले वर्ष 16 जुलाई को प्रदेश में बिजली की मांग 25032 मेगावाट दर्ज की गई थी। इस वर्ष पड़ रही प्रचंड गर्मी के कारण मई में ही बिजली की मांग उससे अधिक पहुंच गई है। बताया जा रहा है कि अगर मांग इसी तरह बढ़ती रही तो जुलाई में प्रदेश को 30 हजार मेगावाट बिजली की आवश्यकता पड़ेगी। हालांकि रेल रैक से कोयला आपूर्ति शुरू हो जाने के बाद विद्युत परियोजनाओं में व्याप्त कोयले की किल्लत तो अवश्य कम होगी। लेकिन पुरानी मशीनें व कोयले की क्वालिटी ठीक न होने के कारण परियोजनाएं पूरी क्षमता से उत्पादन करने में विफल साबित हो रही हैं।
मांग व उपलब्धता में 10 हजार मेगावाट से अधिक का अंतर
प्रदेश में बिजली की मांग सर्वोच्च स्तर पर पहुंचने को आतुर नजर आ रही है। शनिवार को 25 हजार मेगावाट पार करने वाली बिजली की मांग रविवार को अवकाश होने के बाद भी दोपहर दो बजे ही 22 हजार मेगावाट पहुंच गई। शनिवार को ट्रिप करने वाली ओबरा की तीन इकाइयों में से एक इकाई के लोड पर आ जाने से पावर कारपोरेशन को कुछ राहत जरूर मिली लेकिन मांग व उपलब्धता के बीच 10 हजार मेगावाट से अधिक का अंतर बना हुआ है। दोपहर दो बजे के आंकड़ों के अनुसार बिजली की मांग जहां 21498 मेगावाट रही। वहीं इस दौरान निजी व सार्वजनिक ताप बिजली घर सहित हाइड्रो से कुल उपलब्धता 11797 मेगावाट रही। इससे पावर कारपोरेशन को एनर्जी एक्सचेंज से महंगे दर पर बिजली खरीदकर काम चलाना पड़ा।
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भीषण गर्मी के कारण इस समय एसी, फ्रीज, कूलर आदि इलेक्ट्रानिक उपकरणों का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है। इससे पारा चढ़ने के साथ ही बिजली की मांग में भी भारी वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले वर्ष 16 जुलाई को प्रदेश में बिजली की मांग 25032 मेगावाट दर्ज की गई थी। इस वर्ष पड़ रही प्रचंड गर्मी के कारण मई में ही बिजली की मांग उससे अधिक पहुंच गई है। बताया जा रहा है कि अगर मांग इसी तरह बढ़ती रही तो जुलाई में प्रदेश को 30 हजार मेगावाट बिजली की आवश्यकता पड़ेगी। हालांकि रेल रैक से कोयला आपूर्ति शुरू हो जाने के बाद विद्युत परियोजनाओं में व्याप्त कोयले की किल्लत तो अवश्य कम होगी। लेकिन पुरानी मशीनें व कोयले की क्वालिटी ठीक न होने के कारण परियोजनाएं पूरी क्षमता से उत्पादन करने में विफल साबित हो रही हैं।
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मांग व उपलब्धता में 10 हजार मेगावाट से अधिक का अंतर
प्रदेश में बिजली की मांग सर्वोच्च स्तर पर पहुंचने को आतुर नजर आ रही है। शनिवार को 25 हजार मेगावाट पार करने वाली बिजली की मांग रविवार को अवकाश होने के बाद भी दोपहर दो बजे ही 22 हजार मेगावाट पहुंच गई। शनिवार को ट्रिप करने वाली ओबरा की तीन इकाइयों में से एक इकाई के लोड पर आ जाने से पावर कारपोरेशन को कुछ राहत जरूर मिली लेकिन मांग व उपलब्धता के बीच 10 हजार मेगावाट से अधिक का अंतर बना हुआ है। दोपहर दो बजे के आंकड़ों के अनुसार बिजली की मांग जहां 21498 मेगावाट रही। वहीं इस दौरान निजी व सार्वजनिक ताप बिजली घर सहित हाइड्रो से कुल उपलब्धता 11797 मेगावाट रही। इससे पावर कारपोरेशन को एनर्जी एक्सचेंज से महंगे दर पर बिजली खरीदकर काम चलाना पड़ा।
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