House Tax: चंदौली में स्वकर वसूली को लेकर खड़ा हुआ विवाद, 2015 से टैक्स लेने पर जनहित में सवाल
Chandauli News: चंदौली जिले में स्वकर को लेकर नागरिकों ने अधिकारियों को मांगपत्र सौंपा है। कहा है कि स्वकर प्रणाली 1 अप्रैल 2015 से लागू तो कर दी गई, लेकिन विभागीय लापरवाही के कारण वर्ष 2025-26 तक भी सभी भवनों का सर्वे और कर निर्धारण पूरा नहीं हो सका।
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चंदौली जिले में नगर पालिका परिषद पं. दीनदयाल उपाध्याय नगर द्वारा स्वकर (हाउस टैक्स) वसूली को लेकर बड़ा जनहित मामला सामने आया है। नगर के भवन स्वामियों व नागरिकों ने प्रभारी अधिशासी अधिकारी एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट को प्रार्थना पत्र सौंपकर मांग की है कि स्वकर की वसूली वर्ष 2015 से न लेकर, भवनों के वास्तविक सर्वे की तिथि और संबंधित वित्तीय वर्ष से लागू की जाए।
प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि स्वकर प्रणाली 1 अप्रैल 2015 से लागू तो कर दी गई, लेकिन विभागीय लापरवाही के कारण वर्ष 2025-26 तक भी सभी भवनों का सर्वे और कर निर्धारण पूरा नहीं हो सका। इसका खामियाजा अब आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें एकमुश्त भारी एरियर के रूप में लाखों रुपये तक जमा करने पड़ रहे हैं।
नागरिकों ने आरोप लगाया कि नामांतरण और आपत्तियों से संबंधित फाइलें वर्षों से लंबित पड़ी हैं। कई मामलों में 5-6 साल से फाइलों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे लोगों को बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। साथ ही नामांतरण में वार्ड सभासद की अनिवार्य सहमति की शर्त भी बड़ी बाधा बन रही है, जिससे राजनीतिक या व्यक्तिगत कारणों से फाइलें अटक रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आधार कार्ड, पैन कार्ड और मतदाता पहचान पत्र जैसे दस्तावेज मान्य होने के बावजूद केवल सभासद की सहमति के अभाव में फाइलों को लंबित रखना अनुचित है। इससे जनता के साथ-साथ नगर पालिका के राजस्व पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
पूर्व छात्र संघ महामंत्री राकेश रोशन बागी ने कहा कि 10-11 वर्षों का टैक्स एक साथ वसूलना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने मांग की कि स्वकर की वसूली वर्ष 2026 से लागू की जाए और पुराने बकाये को समाप्त किया जाए। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता विकास शर्मा ने इसे मानवाधिकार से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि विभागीय लापरवाही का बोझ जनता पर नहीं डाला जाना चाहिए।
इस मामले में नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी राजीव मोहन सक्सेना (पीसीएस) ने कहा कि वर्ष 2015 से स्वकर लागू होने और 2020 की बोर्ड बैठक के निर्णयों की जांच कराई जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि नियमों के अनुरूप ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते न्यायपूर्ण निर्णय नहीं लिया गया तो वे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होंगे।