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विनिवेश कोयला उद्योग के लिए घातक

Sun, 04 Jan 2015 11:29 PM IST
संवाददाता अमर उजाला सोनभद्र
संवाददाता अमर उजाला सोनभद्र Updated Sun, 04 Jan 2015 11:29 PM IST
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Disinvestment deadly coal industry
 एनसीएल जयंत के आवासीय परिसर स्थित गोल मार्केट में रविवार की शाम हुई कोयला श्रमिकों की संयुक्त सभा में कोल बिल को घातक बताते हुए नेताओं ने कहा कि इससे कोयला उद्योग के साढ़े तीन लाख कामगार सीधे प्रभावित होंगे।
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नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा निरस्त कोल ब्लाकोें के आवंटन के लिए कोयला खदान स्पेशल प्राविजेंस आर्डीनेंस-2014 लाया गया। सरकार द्वारा चालाकी पूर्वक इसमें निजी व विदेशी कंपनियों को कोल माइंनिंग का व्यवसायिक अधिकार देकर कोयला उद्योग को गैर राष्ट्रीयकृत करने का कुचक्र किया गया है।
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श्रमिक नेताओं ने पिछली सरकार के वायदे का जिक्र करते हुए कहा कि बिना ट्रेड यूनियनों से चर्चा किए यह बिल लाया गया है। इसलिए इसी किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा।  बिल के क्लाज संख्या 26, 27 एवं 28 को खास तौर पर उल्लखित करते हुए नेताओं ने कहा कि इसके जरिए न्यायालय जाने के लिए रोका गया है।
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 उनका कहना था कि  इससे संवैधानिक अधिकार से वंचित करने का प्रयास किया गया है। कहा कि क्लाज संख्या चार विदेशी कंपनियों को कोयला खनन की अनुमति देता है इससे कोल इंडिया को विदेशी कंपनियों के हाथों में सौंपे जाने की साजिश की जा रही है।

 इसी तरह बिल के क्लाज संख्या 30 में कोयला खान एक्ट 1973 एवं एमएमडीआर एक्ट 1957 में संशोधन कर कोयला उद्योग को गैर राष्ट्रीयकृत करने का षड्यंत्र किया गया है। जिससे कोल इंडिया, सिंगरैनी जैसे सार्वजनिक क्षेत्र को समाप्त कर साढ़े तीन लाख कोयला मजदूरों पर प्रहार किया गया है।

 निरस्त किए गए ब्लाकों  का मसला उठाते हुए नेताओं ने कहा कि इससे हजारों मजदूर कार्यरत है, एक्ट में इन मजदूरों के समायोजन, सामाजिक सुरक्षा एवं अन्य देयकों के बारे में को जिक्र नहीं है, यानी लाखों मजदूर सड़क पर आ जाएंगे।



श्रमिक संगठनों के नेताआें ने एकजुटता का परिचय देते हुए कहा कि मंगलवार से प्रस्तावित पांच दीनी हड़ताल को हर हाल सफल बनाना होगा ताकि कोयला श्रमिकों के हितों को संरक्षित किया जा सके। कार्यक्रम में बीएमएस के वाईएन सिंह, पीके सिंह, सीटू के पीएस पांडेय एटक के अशोक दुबे, एचएमएस के अशोक पांडेय आदि मौजूद रहे।
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