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पिपरी इंस्पेक्टर के विरुद्ध होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई
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नाबालिग लड़की के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में कोर्ट के आदेश के चार माह बाद भी पिपरी थाने की पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं किया। इस मामले में अपर सत्र न्यायाधीश पॉक्सो कोर्ट निहारिका चौहान की अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। पिपरी इंस्पेक्टर के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और कृत कार्रवाई से 23 सितंबर को अवगत कराने का अनुरोध किया है।
नाबालिग लड़की के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में कोर्ट ने 21 मई को पिपरी इंस्पेक्टर को एफआईआर दर्ज कर विधि अनुरूप विवेचना करने का आदेश दिया था। चार माह गुजर जाने के बावजूद इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। जब कोर्ट ने थाने से आख्या मांगी तो 20 सितंबर को भेजी गई आख्या में इंस्पेक्टर ने अवगत कराया कि पीड़िता की तलाश की जा रही है। अभी तक उसका पता नहीं चल पाया है। इस कारण से एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।
मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि पिपरी इंस्पेक्टर को विधिक प्रक्रिया का ज्ञान नहीं है। उन्होंने कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं किया है। यह कृत्य उनकी अक्षमता, संवेदनहीनता, कार्य के प्रति लापरवाही व अवमानना का द्योतक है। एसपी सोनभद्र को भेजे अनुरोध पत्र में कोर्ट ने पिपरी इंस्पेक्टर के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए कृत कार्रवाई से 23 सितंबर को कोर्ट को अवगत कराने को कहा है।
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नाबालिग लड़की के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में कोर्ट ने 21 मई को पिपरी इंस्पेक्टर को एफआईआर दर्ज कर विधि अनुरूप विवेचना करने का आदेश दिया था। चार माह गुजर जाने के बावजूद इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। जब कोर्ट ने थाने से आख्या मांगी तो 20 सितंबर को भेजी गई आख्या में इंस्पेक्टर ने अवगत कराया कि पीड़िता की तलाश की जा रही है। अभी तक उसका पता नहीं चल पाया है। इस कारण से एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।
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मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि पिपरी इंस्पेक्टर को विधिक प्रक्रिया का ज्ञान नहीं है। उन्होंने कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं किया है। यह कृत्य उनकी अक्षमता, संवेदनहीनता, कार्य के प्रति लापरवाही व अवमानना का द्योतक है। एसपी सोनभद्र को भेजे अनुरोध पत्र में कोर्ट ने पिपरी इंस्पेक्टर के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए कृत कार्रवाई से 23 सितंबर को कोर्ट को अवगत कराने को कहा है।
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